MP Weather Today: जुलाई की झमाझम भी नहीं भर सकी बारिश की कमी, मध्य प्रदेश में अब भी 13% कम वर्षा, अगले 4 दिन भारी बारिश के आसार नहीं
MP में जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई तेज बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित किया, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश अब भी सामान्य मानसून से पीछे चल रहा है। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य में अब तक औसतन 13 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। पिछले 48 घंटों के दौरान मालवा-निमाड़ क्षेत्र में मूसलाधार बारिश हुई, फिर भी प्रदेश के 42 जिले अभी भी सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल सक्रिय मानसूनी सिस्टम कमजोर पड़ रहे हैं। ऐसे में अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि अगस्त के पहले सप्ताह में यदि बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में नया मौसम तंत्र विकसित होता है, तो बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है।
जुलाई के आखिरी दिनों में जमकर बरसे बादल
जुलाई के अंतिम दो दिनों में मालवा-निमाड़ और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश दर्ज की गई। खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, धार, रतलाम और खंडवा जैसे जिलों में लगातार बारिश से नदी-नाले उफान पर आ गए और कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन गई।
मौसम विभाग के अनुसार सबसे अधिक वर्षा खरगोन जिले के गोगावां में लगभग 7.6 इंच दर्ज की गई। इसके अलावा बुरहानपुर शहर में 7 इंच और बैतूल के भीमपुर में 6.6 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। प्रदेश के करीब 33 शहरों और कस्बों में भारी से अति भारी वर्षा दर्ज की गई, जिससे किसानों और आम लोगों को राहत जरूर मिली, लेकिन पूरे प्रदेश की बारिश की कमी दूर नहीं हो सकी।
अब तक कितनी हुई बारिश?
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 15.4 इंच (390.3 मिलीमीटर) बारिश दर्ज की गई है। जबकि इस समय तक सामान्य रूप से 17.6 इंच (448.4 मिलीमीटर) वर्षा होनी चाहिए थी।
इस प्रकार प्रदेश में अभी भी लगभग 2.3 इंच यानी 13 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है।
क्षेत्रवार स्थिति देखें तो—
- पूर्वी मध्य प्रदेश में लगभग 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
- पश्चिमी मध्य प्रदेश में करीब 11 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है।
यानी पश्चिमी हिस्सों में हालिया बारिश से स्थिति कुछ सुधरी है, लेकिन पूरे प्रदेश का औसत अभी भी सामान्य से कम बना हुआ है।
42 जिलों में सामान्य से कम वर्षा
MP के अधिकांश जिलों में मानसून अभी तक पूरी तरह मेहरबान नहीं हुआ है। राजधानी भोपाल, जबलपुर सहित कुल 42 जिले सामान्य से कम बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल हैं।
हालांकि कुछ जिलों में पिछले दिनों हुई तेज बारिश से जलाशयों और नदियों का जलस्तर बढ़ा है, लेकिन कृषि और भूजल की दृष्टि से अभी और अच्छी बारिश की जरूरत बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए अगस्त महीने में लगातार और संतुलित वर्षा बेहद जरूरी होगी।
अगले चार दिन भारी बारिश के संकेत नहीं
MP मौसम विभाग के अनुसार पिछले दो दिनों से सक्रिय तीन प्रमुख मानसूनी प्रणालियां अब कमजोर हो रही हैं। यही कारण है कि आने वाले चार दिनों तक प्रदेश में कहीं भी व्यापक स्तर पर भारी या अति भारी बारिश की संभावना नहीं है।
हालांकि कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। स्थानीय स्तर पर कहीं-कहीं तेज बारिश भी संभव है, लेकिन फिलहाल बड़े स्तर का कोई मजबूत मानसूनी सिस्टम सक्रिय नहीं है।
अगस्त में बदल सकते हैं हालात
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगस्त के पहले या दूसरे सप्ताह में यदि बंगाल की खाड़ी में नया निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) बनता है या मानसून ट्रफ सक्रिय होती है, तो मध्य प्रदेश में बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है।
ऐसी स्थिति में प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश होने की संभावना बनेगी, जिससे अब तक की वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।
किसानों की बढ़ी चिंता
MP में बारिश की कमी का सबसे अधिक असर किसानों पर दिखाई दे रहा है। कई क्षेत्रों में सोयाबीन, मक्का, धान और अन्य खरीफ फसलों की वृद्धि पर्याप्त नमी के अभाव में प्रभावित हो रही है।
हालांकि मालवा-निमाड़ में हालिया बारिश से कुछ राहत मिली है, लेकिन पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में किसानों की निगाहें अब अगस्त की बारिश पर टिकी हुई हैं। यदि अगले कुछ सप्ताह में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह
मौसम विभाग ने लोगों से मौसम की नियमित जानकारी लेते रहने की अपील की है। जिन क्षेत्रों में हल्की या मध्यम बारिश की संभावना है, वहां किसानों को मौसम के अनुसार कृषि कार्य करने की सलाह दी गई है।
जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
बारिश की कमी पूरी होने का इंतजार
जुलाई के अंत में हुई जोरदार बारिश ने प्रदेश के कई हिस्सों को राहत जरूर दी है, लेकिन मध्य प्रदेश अभी भी सामान्य मानसून से पीछे है। 13 प्रतिशत वर्षा की कमी और 42 जिलों में सामान्य से कम बारिश इस बात का संकेत है कि अगस्त का महीना प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। यदि नए मानसूनी सिस्टम सक्रिय होते हैं, तो आने वाले दिनों में बारिश की रफ्तार बढ़ सकती है और किसानों सहित आम लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
