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धार के डही में ठप पड़ी 108 एंबुलेंस सेवा: डेढ़-दो महीने से मरीजों को नहीं मिल रही समय पर मदद, ग्रामीणों में नाराजगी

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Published On: 31 July 2026
A 108 emergency ambulance in Madhya Pradesh, as residents of Dahi in Dhar district report prolonged disruption of emergency medical services, forcing patients to use private vehicles for hospital transport
— A 108 emergency ambulance in Madhya Pradesh, as residents of Dahi in Dhar district report prolonged disruption of emergency medical services, forcing patients to use private vehicles for hospital transport

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धार के डही में ठप पड़ी 108 एंबुलेंस सेवा: डेढ़-दो महीने से मरीजों को नहीं मिल रही समय पर मदद, ग्रामीणों में नाराजगी

कागजों में चालू, लेकिन जमीनी हकीकत में गायब आपातकालीन एंबुलेंस सेवा; निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचने को मजबूर मरीज

रिपोर्ट नरेंद्र सिरवी
डही (धार)।
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के उद्देश्य से संचालित 108 एंबुलेंस सेवा धार जिले के डही विकासखंड में पिछले करीब डेढ़ से दो महीने से प्रभावित बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में 108 एंबुलेंस नियमित रूप से उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण दुर्घटना, प्रसूति, विषाक्त पदार्थ के सेवन और अन्य गंभीर स्वास्थ्य आपात स्थितियों में मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा पा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि एंबुलेंस सेवा के बाधित होने से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वाहन में तकनीकी खराबी की जानकारी मिली है और उसे जल्द शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

डेढ़-दो महीने से प्रभावित बताई जा रही है 108 सेवा

A 108 emergency ambulance in Madhya Pradesh, as residents of Dahi in Dhar district report prolonged disruption of emergency medical services, forcing patients to use private vehicles for hospital transport

स्थानीय नागरिकों के अनुसार डही ब्लॉक में 108 एंबुलेंस सेवा पिछले करीब डेढ़ से दो महीने से नियमित रूप से उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि वाहन में तकनीकी खराबी और टायर संबंधी समस्या के कारण सेवा बाधित हुई, लेकिन अब तक इसे पूरी तरह बहाल नहीं किया जा सका।

ग्रामीणों का आरोप है कि इतनी लंबी अवधि बीत जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

पहले भी उठाया गया था मामला

स्थानीय स्तर पर इस समस्या को लेकर पहले भी आवाज उठाई जा चुकी है। क्षेत्रीय संवाददाता के अनुसार 9 जून को भी इस विषय पर समाचार प्रकाशित किया गया था और जिला स्तर के अधिकारियों को कई बार इस गंभीर समस्या से अवगत कराया गया।

इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और आज भी मरीजों को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो रही है।

आपात स्थिति में मरीजों को करना पड़ रहा इंतजार

डही क्षेत्र के लोगों का कहना है कि दुर्घटना, हार्ट अटैक, प्रसव पीड़ा या अन्य गंभीर स्थिति में मरीजों को कई-कई घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ता है।

ऐसी परिस्थितियों में परिजन मजबूरी में निजी वाहन, टैक्सी या अन्य साधनों से मरीजों को अस्पताल पहुंचाते हैं। इससे इलाज में देरी होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ भी बढ़ जाता है।

ग्रामीण महिला ने बताई अपनी परेशानी

गंगापुर निवासी कविता ने बताया कि उन्हें गंभीर स्थिति में बड़वानी अस्पताल रेफर किया गया था।

उनके अनुसार 108 एंबुलेंस को लगातार फोन करने के बावजूद करीब दो से तीन घंटे तक वाहन नहीं पहुंचा। अंततः मजबूरी में उन्हें निजी वाहन की सहायता से अस्पताल जाना पड़ा।

ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति कई अन्य मरीजों के साथ भी सामने आ चुकी है।

जनप्रतिनिधि प्रतिनिधि ने उठाए सवाल

नगर परिषद के उपाध्यक्ष प्रतिनिधि गोपाल माहेश्वरी ने बताया कि पहले कभी-कभार निसरपुर, बाग या कुक्षी से 108 एंबुलेंस डही पहुंच जाती थी, लेकिन पिछले डेढ़-दो महीने से क्षेत्र में एंबुलेंस दिखाई तक नहीं दे रही।

उन्होंने कहा कि पहले भी एंबुलेंस केवल रेफर मरीजों को कुक्षी या बड़वानी अस्पताल छोड़कर वापस लौट जाती थी, जिसके बाद लंबे समय तक क्षेत्र में कोई आपातकालीन वाहन उपलब्ध नहीं रहता था।

उनका कहना है कि वर्तमान स्थिति में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।

जननी एक्सप्रेस पर बढ़ा अतिरिक्त दबाव

स्थानीय लोगों के अनुसार 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण अब जननी एक्सप्रेस, जो मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए संचालित की जाती है, उसका उपयोग अन्य गंभीर मरीजों के लिए भी किया जा रहा है।

बताया गया कि दुर्घटना, विषाक्त पदार्थ सेवन (पॉइजनिंग) तथा अन्य गंभीर मरीजों को भी इसी वाहन से अस्पताल ले जाना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि जननी वाहन में केवल एक चालक होने के कारण चौबीसों घंटे सेवा देना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासन की सबसे महत्वपूर्ण आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में से एक 108 एंबुलेंस लंबे समय तक बंद रहती है, तो गरीब और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को समय पर उपचार कैसे मिलेगा?

क्षेत्रवासियों ने सवाल उठाया कि यदि कागजों में सेवाएं संचालित दिखाई जा रही हैं लेकिन जमीन पर वाहन उपलब्ध नहीं है, तो इसका सबसे अधिक नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल

ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और क्षेत्र के राजनीतिक नेताओं से भी नाराजगी जताई।

लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित प्रयास दिखाई नहीं दे रहे हैं।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को केवल समाचार प्रकाशित होने के बाद ही नहीं बल्कि नियमित रूप से ऐसी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।

जिला प्रशासन से की गई मांग

ग्रामीणों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि—

  • डही ब्लॉक में स्थायी रूप से 108 एंबुलेंस की व्यवस्था की जाए।
  • बंद पड़े वाहन की तकनीकी खराबी तत्काल दूर कर सेवा शुरू की जाए।
  • आवश्यकता होने पर अतिरिक्त एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाए।
  • इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
  • भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित की जाए।

जिला प्रबंधक से संपर्क नहीं होने का दावा

स्थानीय संवाददाता के अनुसार पिछले तीन दिनों से 108 एंबुलेंस सेवा के जिला प्रबंधक से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ।

हालांकि इस संबंध में स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

सीएमएचओ ने क्या कहा?

धार की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अनीता सिंगारे ने बताया कि उन्होंने जिले के सभी ब्लॉक मेडिकल अधिकारियों (BMO) से 108 एंबुलेंस की स्थिति संबंधी रिपोर्ट मांगी है।

उन्होंने कहा कि अभी तक डही ब्लॉक से रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

सीएमएचओ ने यह भी कहा कि वे संबंधित बीएमओ को पुनः निर्देश देकर जल्द जानकारी मंगवाएंगी।

बीएमओ ने तकनीकी खराबी बताई

डही के बीएमओ डॉ. जगदीश पटेरिया ने बताया कि अभी तक जिले को विस्तृत रिपोर्ट नहीं भेजी गई है।

उन्होंने कहा कि 108 एंबुलेंस का संचालन भोपाल स्तर से होता है और संबंधित जिला प्रबंधक ने उन्हें जानकारी दी है कि वाहन में तकनीकी खराबी थी, जिसे ठीक किया जा रहा है।

बीएमओ के अनुसार यदि सब कुछ ठीक रहा तो एक-दो दिन में वाहन पुनः सेवा में उपलब्ध कराया जा सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि वे सीएमएचओ कार्यालय को भी आवश्यक रिपोर्ट भेज देंगे।

ग्रामीण क्षेत्रों में 108 सेवा का महत्व

108 एंबुलेंस सेवा ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए जीवन रक्षक सेवा मानी जाती है। सड़क दुर्घटना, प्रसव, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, विषाक्त पदार्थ सेवन और अन्य गंभीर आपात स्थितियों में यह सेवा मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सेवाओं में लंबे समय तक व्यवधान आने से मरीजों के जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए संबंधित विभागों को ऐसी शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।

निष्कर्ष

डही विकासखंड में 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर सामने आई शिकायतों ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले डेढ़ से दो महीने से सेवा प्रभावित है, जिसके कारण मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वाहन की तकनीकी खराबी दूर की जा रही है और जल्द ही सेवा बहाल होने की उम्मीद है। अब क्षेत्रवासियों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान कितनी जल्दी सुनिश्चित करता है।

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