राघौगढ़ में महासंग्राम का शंखनाद: 3 अगस्त को ‘जयस’ का तहसील महाघेराव, थमेगी प्रशासनिक व्यवस्था!
ग्वालियर संभाग से उमड़ेगा आदिवासियों का ऐतिहासिक सैलाब; जयस का खुला अल्टीमेटम—’कागजी छलावा बंद करे प्रशासन, वरना भुगतने होंगे नतीजे’
राघौगढ़ / ग्वालियर:
संवाददाता : हेमराज सहरिया
दशकों से जल, जंगल, जमीन और अपने मूलभूत अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे आदिवासी समाज ने अब प्रशासनिक उपेक्षा और समस्याओं के समाधान में हो रही देरी के खिलाफ आवाज बुलंद करने का निर्णय लिया है। आदिवासी संगठन जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) के नेतृत्व में आगामी 3 अगस्त को राघौगढ़ तहसील कार्यालय का महाघेराव किया जाएगा। इस आंदोलन में ग्वालियर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आदिवासी युवा, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल होंगे।
जयस पदाधिकारियों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों में आज भी कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। ग्रामीण इलाकों में सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। संगठन का आरोप है कि लंबे समय से मांगों और समस्याओं को प्रशासन के समक्ष रखने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिससे समाज में नाराजगी बढ़ रही है।
जयस ग्वालियर संभाग अध्यक्ष राकेश कुमार भील एवं संभाग सचिव हेमराज सहरिया ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि आदिवासी समाज अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेगा। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि महाघेराव के माध्यम से क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं, स्थानीय मुद्दों और आदिवासी समाज की मांगों को प्रशासन के सामने मजबूती से रखा जाएगा। संगठन ने युवाओं, महिलाओं और ग्रामीणों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
जयस पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी विरोध मात्र तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों के समग्र विकास, अधिकारों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग को लेकर किया जा रहा है।
“यह आंदोलन सिर्फ एक मांग पत्र सौंपने का जरिया नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के वजूद और स्वाभिमान की अंतिम लड़ाई है। यदि प्रशासन सोच रहा है कि वह हमें पुराने खोखले आश्वासनों से बहला देगा, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल होगी। प्रदर्शन लोकतांत्रिक होगा, लेकिन अगर मौके पर पहुंचकर आला अधिकारियों ने मांगों पर ठोस और त्वरित समयबद्ध फैसला नहीं लिया, तो तहसील परिसर से उठने वाली यह चिंगारी पूरे क्षेत्र में आंदोलन की ज्वाला बनकर फैलेगी!”
— मर्दन भील (संरक्षक, जयस) एवं नरेंद्र भील (प्रभारी, जयस)
प्रशासन के नाम ‘जयस’ की 3 ‘रेड लाइन’ मांगें:
1. जमीनी बुनियादी सुविधाएं तत्काल चालू हों: हर आदिवासी बस्ती को तुरंत पक्की सड़क, 24 घंटे निर्बाध बिजली, शुद्ध पेयजल और क्रियाशील स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ा जाए। हवा-हवाई फाइलों से काम नहीं चलेगा।
2. वनाधिकार पट्टों का तत्काल मालिकाना हक: वर्षों से लंबित वनाधिकार पट्टों के आवेदनों पर तुरंत मुहर लगाकर आदिवासियों को उनकी पैतृक जमीन का वास्तविक अधिकार दिया जाए।
3. स्थानीय रोजगार एवं जवाबदेही: स्थानीय उद्योगों व सरकारी योजनाओं में आदिवासी युवाओं को रोज़गार की गारंटी मिले और आदिवासी मामलों में हीलाहवाली करने वाले अफ़सरों पर सख्त कार्रवाई हो।
जयस अशोक सहरिया और राघौगढ़ ब्लॉक अध्यक्ष अशोक कुमार भील ने हुंकार भरते हुए कहा कि 3 अगस्त को राघौगढ़ की धरती पर जनसैलाब इतिहास रचेगा। उन्होंने हर आदिवासी युवा और अन्याय के खिलाफ खड़े होने वाले नागरिक से आह्वान किया है कि 3 अगस्त को राघौगढ़ पहुंचकर अपनी ताकत और हुंकार से सत्ता और प्रशासन की नींव हिला दें।
जारीकर्ता (जय आदिवासी युवा शक्ति):
राकेश कुमार भील (संभाग अध्यक्ष, जयस ग्वालियर)
हेमराज सहरिया (संभाग सचिव, जयस ग्वालियर)
मर्दन भील (संरक्षक, जयस)
नरेंद्र भील (प्रभारी, जयस)
अशोक सहरिया (जयस)
अशोक कुमार भील (ब्लॉक अध्यक्ष, राघौगढ़)
