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संसद का मानसून सत्र: एंटी पेपर लीक बिल राज्यसभा से पास, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून

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Published On: 31 July 2026
संसद का मानसून सत्र: एंटी पेपर लीक बिल राज्यसभा से पास, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून

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एंटी पेपर लीक बिल राज्यसभा से भी पास, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून

संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को एंटी पेपर लीक बिल राज्यसभा से भी ध्वनिमत से पारित हो गया। अब इस विधेयक को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा।

यह कानून भर्ती परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों, पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे परीक्षा माफियाओं पर लगाम लगाने और युवाओं के हितों की रक्षा करने का उद्देश्य रखा गया है।

राज्यसभा में बिल पर चर्चा के दौरान हुआ हंगामा

एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्षी सांसद दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में जवाब देने की मांग कर रहे थे।

विपक्षी सांसदों ने सदन के वेल में पहुंचकर नारेबाजी की। इस दौरान “अमित शाह सदन में आओ” और “पैलेट गन पर जवाब दो” जैसे नारे लगाए गए। हालांकि हंगामे के बीच भी राज्यसभा की कार्यवाही जारी रही और बिल पर चर्चा पूरी की गई।

खड़गे ने सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार पर हमला बोला।

उन्होंने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकार से भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और सभी पेपर लीक मामलों की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की।

खड़गे ने यह भी मांग रखी कि सरकार एक निश्चित वार्षिक परीक्षा कैलेंडर लागू करे, जिससे युवाओं को परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर स्पष्टता मिल सके। उन्होंने इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से जवाबदेही तय करने की मांग भी दोहराई।

सागरिका घोष ने उठाया छात्रों का मुद्दा

तृणमूल कांग्रेस सांसद सागरिका घोष ने भी चर्चा के दौरान छात्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द होना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं होता, बल्कि इससे लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर असर पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया और सरकार को इस मामले पर संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

खड़गे के बयान पर सत्ता पक्ष ने जताई आपत्ति

राज्यसभा में उस समय माहौल गर्म हो गया जब मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री अमित शाह को लेकर टिप्पणी की।

खड़गे ने कहा कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई पर सरकार को जवाब देना होगा। उनके बयान पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने विरोध जताया।

नेता सदन जेपी नड्डा ने खड़गे के बयान पर आपत्ति जताते हुए इसे असंसदीय बताया और सभापति से टिप्पणी को कार्यवाही से हटाने की मांग की। हालांकि खड़गे ने कहा कि उन्होंने कोई असंसदीय शब्द नहीं कहा और उनका उद्देश्य सरकार से जवाब मांगना था।

विपक्ष ने किया राज्यसभा से वॉकआउट

छात्रों के मुद्दे पर सरकार से जवाब की मांग को लेकर कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया।

विपक्ष का कहना था कि छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री को सदन में आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं सरकार ने कहा कि वह हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।

जेपी नड्डा ने विपक्ष पर साधा निशाना

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष के वॉकआउट पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने का प्रयास करता है।

उन्होंने कहा कि एंटी पेपर लीक बिल देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण कानून है और इस पर गंभीर चर्चा आवश्यक है। सरकार ने युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है।

वंदे मातरम् बिल लोकसभा से भी पारित

मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में भी हंगामे के बीच वंदे मातरम् बिल पारित किया गया। विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

वहीं लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ समय बाद ही विपक्ष के हंगामे के कारण इसे दोपहर तक के लिए स्थगित किया गया था।

युवाओं और परीक्षा व्यवस्था पर केंद्रित कानून

एंटी पेपर लीक बिल को परीक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के हितों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस कानून के लागू होने से पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

वहीं विपक्ष लगातार परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है। संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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