E20 पेट्रोल पर संसद में नितिन गडकरी का बड़ा बयान: 2-6% तक घट सकता है माइलेज, इंजन पर भी दिया बड़ा अपडेट
नई दिल्ली।
देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों के मन में लंबे समय से कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कार का माइलेज कम हो जाएगा? क्या इससे इंजन को नुकसान पहुंचेगा? क्या पुरानी गाड़ियों में इसके कारण महंगे पार्ट्स बदलने पड़ेंगे?
इन सभी सवालों पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में विस्तार से जवाब दिया है। लोकसभा में दिए गए लिखित उत्तर में उन्होंने स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों का माइलेज 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है, लेकिन अब तक हुए परीक्षणों में इंजन फेल होने जैसी कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई है।
सरकार का कहना है कि E20 ईंधन को व्यापक परीक्षणों और वैज्ञानिक अध्ययन के बाद लागू किया गया है। वहीं वाहन निर्माता कंपनियां भी इसे नई पीढ़ी के वाहनों के लिए सुरक्षित बता रही हैं।
क्या है E20 पेट्रोल?
E20 पेट्रोल वह ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल (Ethanol) और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है।
इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का, टूटे हुए चावल और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसका उद्देश्य पेट्रोल पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और प्रदूषण घटाना है।
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से चरणबद्ध तरीके से E20 पेट्रोल लागू कर रही है ताकि देश में स्वच्छ ईंधन का उपयोग बढ़ाया जा सके।
संसद में नितिन गडकरी ने क्या कहा?
लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि E20 पेट्रोल के उपयोग से कुछ वाहनों की फ्यूल इकोनॉमी (Mileage) में 2 से 6 प्रतिशत तक की कमी देखी जा सकती है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कमी सभी वाहनों में समान नहीं होगी।
उन्होंने बताया कि माइलेज पर प्रभाव कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे—
- वाहन का मॉडल
- इंजन की तकनीक
- वाहन की उम्र
- BS (भारत स्टेज) उत्सर्जन मानक
- निर्माता कंपनी द्वारा अपनाई गई तकनीक
यानी किसी वाहन में माइलेज पर बहुत कम असर होगा, जबकि कुछ पुराने मॉडलों में यह थोड़ा अधिक महसूस किया जा सकता है।
क्या E20 से इंजन खराब हो सकता है?
E20 पेट्रोल को लेकर सबसे बड़ी चिंता इंजन की सुरक्षा को लेकर रही है।
इस सवाल पर नितिन गडकरी ने संसद में साफ कहा कि अब तक किए गए ऑन-रोड व्हीकल टेस्ट में E20 पेट्रोल के कारण इंजन फेल होने का कोई मामला सामने नहीं आया है।
सरकार के अनुसार परीक्षणों में यह नहीं पाया गया कि E20 ईंधन के उपयोग से इंजन की कार्यक्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होती है।
इसका मतलब यह है कि यदि वाहन निर्माता द्वारा E20 के उपयोग की अनुमति दी गई है तो सामान्य परिस्थितियों में इंजन को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है।
माइलेज क्यों कम हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है।
यही कारण है कि E20 मिश्रण वाले ईंधन से कुछ वाहनों में माइलेज थोड़ा कम हो सकता है।
हालांकि यह अंतर बहुत अधिक नहीं होता और सामान्य उपयोग में कई बार चालक को इसका विशेष अंतर महसूस भी नहीं होता।
यदि कोई वाहन पहले 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देता था तो E20 पर वही वाहन लगभग 19 से 19.5 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज दे सकता है।
क्या E20 से वाहन की परफॉर्मेंस बेहतर होगी?
सरकार ने संसद में बताया कि E20 पेट्रोल के उपयोग से केवल माइलेज ही नहीं देखा जाना चाहिए।
सरकार का दावा है कि इस ईंधन से—
- इंजन की एक्सीलरेशन बेहतर हो सकती है।
- वाहन की राइड क्वालिटी में सुधार देखा गया है।
- इंजन की स्मूदनेस बढ़ सकती है।
- दहन प्रक्रिया अधिक स्वच्छ होती है।
यानी माइलेज में मामूली कमी के बावजूद वाहन की ड्राइविंग क्वालिटी बेहतर हो सकती है।
कार्बन उत्सर्जन में आएगी कमी
E20 पेट्रोल लागू करने के पीछे सबसे बड़ा उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण भी है।
सरकार के अनुसार E20 ईंधन के उपयोग से E10 पेट्रोल की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में लगभग 30 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।
इससे—
- वायु प्रदूषण कम होगा।
- ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटेगा।
- जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी।
- भारत के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।
किन संस्थानों ने की E20 पर रिसर्च?
सरकार ने बताया कि E20 पेट्रोल को लागू करने से पहले कई प्रतिष्ठित संस्थानों ने संयुक्त अध्ययन किया।
इनमें शामिल हैं—
- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL)
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (देहरादून)
- सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM)
- ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI)
इन संस्थानों ने BS-3, BS-4 और BS-6 मानक वाले वाहनों पर E20 ईंधन के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया।
पुरानी गाड़ियों के लिए क्या है स्थिति?
E20 पेट्रोल को लेकर सबसे अधिक चिंता पुराने वाहन मालिकों में देखी जा रही है।
इससे पहले भी सरकार संसद में बता चुकी है कि कुछ BS-3 वाहनों में E20 ईंधन के उपयोग के लिए—
- रबर पाइप
- फ्यूल लाइन
- गैसकेट
- कुछ सीलिंग पार्ट्स
को बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है।
हालांकि यह सभी वाहनों पर लागू नहीं होता। यह वाहन के मॉडल और निर्माता की डिजाइन पर निर्भर करता है।
इसलिए पुराने वाहन मालिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर से जानकारी अवश्य लें।
नई गाड़ियों के लिए क्या कहती हैं ऑटो कंपनियां?
देश की अधिकांश ऑटोमोबाइल कंपनियां अब E20-रेडी इंजन के साथ वाहन लॉन्च कर रही हैं।
कंपनियों का कहना है कि—
- नई गाड़ियों में E20 पूरी तरह सुरक्षित है।
- वाहन की वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
- इंजन के प्रदर्शन में कोई गंभीर समस्या नहीं आएगी।
- ग्राहकों को पहले की तरह सर्विस और वारंटी मिलती रहेगी।
यानी यदि आपने हाल के वर्षों में नई कार खरीदी है तो संभावना है कि वह पहले से ही E20 फ्यूल के अनुरूप डिजाइन की गई हो।
E20 लागू करने का सरकार का उद्देश्य
भारत हर वर्ष बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है।
सरकार इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा देकर—
- तेल आयात कम करना चाहती है।
- विदेशी मुद्रा की बचत करना चाहती है।
- किसानों की आय बढ़ाना चाहती है।
- गन्ना और मक्का उत्पादकों को नया बाजार उपलब्ध कराना चाहती है।
- पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना चाहती है।
इसी वजह से E20 कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से लागू किया जा रहा है।
वाहन मालिकों को क्या करना चाहिए?
यदि आपकी कार नई है और निर्माता ने E20 की अनुमति दी है, तो सामान्य रूप से E20 पेट्रोल का उपयोग किया जा सकता है।
यदि आपके पास पुराना BS-3 या शुरुआती BS-4 वाहन है, तो बेहतर होगा कि—
- वाहन निर्माता की सलाह लें।
- अधिकृत सर्विस सेंटर से जानकारी प्राप्त करें।
- आवश्यकता होने पर फ्यूल सिस्टम के कुछ पार्ट्स की जांच कराएं।
इससे भविष्य में किसी भी तकनीकी समस्या से बचा जा सकता है।
लोगों के मन में अब भी क्यों हैं सवाल?
E20 लागू होने के बाद सोशल मीडिया पर इसके बारे में कई तरह की जानकारियां और दावे सामने आए।
कुछ लोगों ने माइलेज कम होने की शिकायत की, जबकि कुछ ने इंजन खराब होने की आशंका जताई।
हालांकि सरकार का कहना है कि व्यापक परीक्षणों में ऐसी कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि E20 को लेकर जागरूकता बढ़ने के साथ लोगों की शंकाएं भी धीरे-धीरे दूर होंगी।
निष्कर्ष
संसद में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बयान से E20 पेट्रोल को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट हुई हैं। सरकार ने स्वीकार किया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों का माइलेज 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है, लेकिन इसके बदले बेहतर एक्सीलरेशन, कम कार्बन उत्सर्जन और स्वच्छ ईंधन जैसे कई लाभ भी सामने आते हैं।
सरकार का दावा है कि अब तक किए गए परीक्षणों में इंजन फेल होने जैसी कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई है। हालांकि पुराने वाहनों के मालिकों को अपने वाहन की तकनीकी स्थिति और निर्माता की सलाह के अनुसार ही E20 का उपयोग करना चाहिए।
आने वाले समय में E20 पेट्रोल भारत की ईंधन नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है। ऐसे में वाहन मालिकों के लिए इसके फायदे, सीमाएं और तकनीकी पहलुओं को समझना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।
