MP Moong Price: मध्य प्रदेश में मूंग के दामों में 500 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी, किसानों को राहत लेकिन सरकार पर बढ़ा आर्थिक दबाव
MP Moong Price: मध्य प्रदेश में मूंग किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश की मंडियों में मूंग के भाव में अचानक तेजी देखने को मिली है। समर्थन मूल्य पर खरीदी की सीमा बढ़ाए जाने के बाद मूंग के दाम में करीब 300 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, जहां एक ओर किसानों को बढ़े हुए भाव से फायदा मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर सरकार के सामने मूंग खरीदी का संकट और गहरा गया है।
मूंग खरीदी को लेकर प्रदेश में पिछले कई वर्षों से विवाद की स्थिति बनी हुई है। केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए कोटे से अधिक मूंग खरीदने के कारण राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि पिछले दो वर्षों में सरकार को करीब 2 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है, जबकि हाल की खरीदी से लगभग 1200 करोड़ रुपये के अतिरिक्त नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
केंद्र के तय कोटे से ज्यादा खरीदी बनी सरकार की परेशानी
हर साल केंद्र सरकार समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए राज्यों का कोटा तय करती है। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों से उत्पादन अधिक होने के कारण सरकार केंद्र द्वारा निर्धारित सीमा से ज्यादा मूंग खरीद रही है।
समस्या यह है कि केंद्र सरकार तय सीमा से अधिक खरीदी गई मूंग को अपने स्तर पर नहीं उठाती। ऐसे में राज्य सरकार को अतिरिक्त स्टॉक खुले बाजार में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है। टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से बिक्री करने पर व्यापारियों द्वारा समर्थन मूल्य से काफी कम कीमत की पेशकश की जाती है, जिससे सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
दो वर्षों में 5.33 लाख टन अतिरिक्त मूंग खरीदी
आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों से लगभग 5.60 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी थी। इसमें करीब 2.84 लाख मीट्रिक टन मूंग केंद्र सरकार द्वारा तय कोटे से अधिक थी।
इसी तरह वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 5.80 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी गई, जिसमें लगभग 2.49 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त थी। इस तरह दो वर्षों में राज्य सरकार ने केंद्र के कोटे से करीब 5.33 लाख मीट्रिक टन अधिक मूंग खरीदी।
यह खरीदी किसानों से लगभग 8682 से 8768 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर की गई थी। लेकिन जब सरकार ने इस अतिरिक्त मूंग को बेचने का प्रयास किया तो बाजार में अपेक्षित कीमत नहीं मिली।
टेंडर में कम दाम मिलने से बढ़ा नुकसान
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, अतिरिक्त मूंग बेचने के लिए कई बार टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन व्यापारियों ने समर्थन मूल्य से 1500 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक कम कीमत लगाई।
कम कीमत के कारण कई टेंडर निरस्त करने पड़े। लेकिन लगातार प्रयासों के बाद भी खरीदी मूल्य के बराबर कीमत नहीं मिल सकी। इसके चलते सरकार को करीब 2 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाकर मूंग बेचनी पड़ी।
2025-26 में भी बढ़ा खरीदी का दबाव
वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश ने करीब 7.72 लाख मीट्रिक टन मूंग की खरीदी की है। यह केंद्र सरकार द्वारा तय लक्ष्य 4.19 लाख मीट्रिक टन से करीब 3.53 लाख मीट्रिक टन अधिक है।
अधिकारियों के अनुसार, इस अतिरिक्त स्टॉक को बेचने के लिए अब तक तीन बार टेंडर किए जा चुके हैं, लेकिन व्यापारियों द्वारा कम कीमत लगाए जाने के कारण बिक्री नहीं हो पा रही है। यदि समय पर उचित दाम नहीं मिले तो सरकार को 1200 से 1500 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त नुकसान होने की संभावना है।
खरीदी सीमा बढ़ने से मंडियों में घट गई आवक
किसानों के आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने मूंग खरीदी की सीमा बढ़ाने का फैसला किया था। पहले प्रति एकड़ 120 किलो यानी करीब सवा क्विंटल तक खरीदी का नियम था, जिसे बढ़ाकर 300 किलो यानी करीब 3 क्विंटल प्रति एकड़ कर दिया गया।
सरकार के इस फैसले के बाद मंडियों में मूंग की आवक अचानक कम हो गई। व्यापारियों के अनुसार, पहले जहां रोजाना करीब 25 हजार क्विंटल मूंग मंडियों में पहुंच रही थी, वहीं बाद में यह घटकर करीब 20 हजार क्विंटल रह गई।
आवक कम होने से बाजार में मूंग के भाव में तेजी आई। वर्तमान में प्रदेश की मंडियों में मूंग का अधिकतम भाव करीब 7605 रुपये प्रति क्विंटल और मॉडल भाव लगभग 6900 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।
भाव बढ़ने के बावजूद किसान पूरी तरह संतुष्ट नहीं
Moong के बढ़े हुए भाव के बावजूद किसान पूरी तरह खुश नहीं हैं। किसानों का कहना है कि मंडियों में बिक्री करने पर अभी भी गुणवत्ता के आधार पर उन्हें 1500 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों की मांग है कि सरकार उनकी पूरी उपज खरीदे और उन्हें उचित मूल्य मिले, ताकि उत्पादन लागत और मेहनत का सही लाभ मिल सके।
Moong विवाद खत्म करने के लिए स्थायी समाधान की जरूरत
Moong खरीदी को लेकर हर साल बनने वाली स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ स्थायी समाधान की जरूरत बता रहे हैं। कुछ अधिकारियों का कहना है कि मूंग उत्पादन, गुणवत्ता और बाजार व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।
किसानों द्वारा कीटनाशकों के अधिक उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सुझाव दिया गया है कि सरकार मूंग की गुणवत्ता की जांच कराए और यदि कोई समस्या सामने आती है तो उसके समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
सरकार और किसानों के बीच संतुलन बड़ी चुनौती
Moong खरीदी का मुद्दा अब सरकार के लिए आर्थिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चुनौती बन गया है। केंद्र द्वारा तय सीमा के अनुसार खरीदी करने पर किसानों की नाराजगी बढ़ सकती है, जबकि ज्यादा खरीदी करने पर सरकार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
मार्कफेड से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि किसान आंदोलन के जरिए अपनी मांगें मनवा लेते हैं, लेकिन अतिरिक्त खरीदी से होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी अधिकारियों पर आती है।
ऐसे में आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि किसानों को उचित मूल्य भी मिले और सरकारी खजाने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी न पड़े।
