बालिकाओं का सशक्तिकरण और पठन संस्कृति ही विकसित भारत का आधार: Dr. Vyas
‘मिशन पढ़ो राजस्थान’ के तहत वडली नाडी स्कूल में रीड-ए-थॉन का आयोजन, विद्यार्थियों ने लिया नियमित अध्ययन का संकल्प
भीनमाल (मुकेश सोलंकी)। शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण, आत्मविश्वास बढ़ाने और समाज के विकास की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है। इसी उद्देश्य को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा संचालित ‘मिशन पढ़ो राजस्थान’ अभियान के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, वडली नाडी (नवापुरा चौपावतन) में रीड-ए-थॉन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा पठन संस्कृति को बढ़ावा देने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में नियमित अध्ययन की आदत विकसित करना, पुस्तकों के प्रति रुचि बढ़ाना और शिक्षा को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना रहा। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से पठन गतिविधि में भाग लेकर ज्ञान, अनुशासन और निरंतर सीखने का संकल्प लिया।
पुस्तकें बच्चों के भविष्य निर्माण का सबसे बड़ा साधन
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. घनश्याम कुमार व्यास ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी देश का भविष्य उसकी शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की पढ़ने की आदतों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि हर बच्चे के हाथ में पुस्तक और हर बालिका के जीवन में शिक्षा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।
डॉ. व्यास ने कहा कि आज के समय में केवल पाठ्यक्रम पूरा करना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में सोचने, समझने और नई चीजें सीखने की क्षमता विकसित करना आवश्यक है। नियमित पठन से बच्चों की भाषा क्षमता, कल्पनाशक्ति, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे प्रतिदिन कुछ समय पुस्तकों के अध्ययन के लिए जरूर निकालें। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान का खजाना होता है और विद्यार्थियों को इसका अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। अच्छी पुस्तकें जीवन में सही मार्गदर्शन देने वाली सच्ची मित्र होती हैं।
बालिका शिक्षा पर दिया विशेष जोर
डॉ. व्यास ने बालिकाओं की शिक्षा को समाज और राष्ट्र के विकास से जोड़ते हुए कहा कि शिक्षित बालिका परिवार, समाज और देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को शिक्षा के समान अवसर मिलना आवश्यक है, क्योंकि एक शिक्षित महिला आने वाली पीढ़ियों को भी शिक्षित और संस्कारित बनाती है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक बालक शिक्षित हो और प्रत्येक बालिका आत्मनिर्भर बने। शिक्षा के माध्यम से ही बेटियां अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।

मिशन पढ़ो राजस्थान को बताया जनआंदोलन
विद्यालय के प्रधानाध्यापक त्रिभुवन सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ‘मिशन पढ़ो राजस्थान’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए चलाया जा रहा जनआंदोलन है। उन्होंने कहा कि नियमित पठन से विद्यार्थियों में भाषा कौशल, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास का विकास होता है।
उन्होंने बताया कि विद्यालय में विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए प्रेरित करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। पुस्तक समीक्षा, कहानी लेखन, सामूहिक पठन और पुस्तकालय उपयोग जैसी गतिविधियां बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने में सहायक साबित हो रही हैं।
प्रधानाध्यापक ने कहा कि जब विद्यार्थी नियमित रूप से पढ़ने की आदत विकसित करते हैं तो वे केवल परीक्षा में ही नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए सक्षम बनते हैं।
शिक्षकों ने पुस्तकों को बताया जीवन का सच्चा मित्र
कार्यक्रम में शिक्षक खीमाराम सुथार और मदन कुमार पुरोहित ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पुस्तकें मनुष्य के जीवन को नई दिशा देने का कार्य करती हैं। अच्छी किताबें व्यक्ति को ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक सोच प्रदान करती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि मोबाइल और अन्य डिजिटल माध्यमों के साथ-साथ पुस्तकों के अध्ययन को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। पढ़ने की आदत जितनी जल्दी विकसित होगी, उतना ही बच्चों का मानसिक विकास बेहतर होगा।
विद्यार्थियों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के विद्यार्थियों नीरज चौधरी, शारदा कंवर, प्रियंका और प्रवीण कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों ने कहा कि नियमित अध्ययन से उन्हें नई जानकारियां प्राप्त होती हैं और आत्मविश्वास बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि पुस्तकें पढ़ने से उनकी भाषा में सुधार हुआ है और वे अपने विचारों को बेहतर तरीके से व्यक्त कर पा रहे हैं। विद्यार्थियों ने प्रतिदिन पढ़ाई करने और पुस्तकालय का नियमित उपयोग करने का संकल्प लिया।
रीड-ए-थॉन से विद्यार्थियों में दिखा उत्साह
रीड-ए-थॉन कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से पुस्तकों का अध्ययन किया। कार्यक्रम में बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। विद्यार्थियों ने विभिन्न पुस्तकों का अध्ययन कर ज्ञानवर्धक जानकारियां प्राप्त कीं।
शिक्षकों ने बताया कि इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों में पढ़ने के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करती हैं। इससे विद्यार्थियों में सीखने की इच्छा बढ़ती है और वे स्वयं नई चीजों को जानने के लिए प्रेरित होते हैं।

शिक्षा और संस्कार से बनेगा मजबूत समाज
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के चरित्र निर्माण और समाज को बेहतर बनाने का साधन है। जब बच्चे शिक्षित और संस्कारित होंगे, तभी एक मजबूत और विकसित समाज का निर्माण संभव होगा।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि प्रत्येक परिवार बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करे और घर में भी अध्ययन का वातावरण तैयार करे। बच्चों में छोटी उम्र से ही पुस्तक पढ़ने की आदत विकसित करना उनके भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों ने पर्यावरण, शिक्षा और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया। सभी ने एक स्वर में कहा—
“हर दिन पढ़ेंगे – हर दिन बढ़ेंगे, हर बालक शिक्षित, हर बालिका सशक्त।”
इस संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। रीड-ए-थॉन कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि नियमित पठन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बालिका सशक्तिकरण ही विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार कर सकते हैं।
