Sampada 2.0 की ऑनलाइन मैपिंग में गड़बड़ी, गलत लोकेशन से अटकीं रजिस्ट्री; लोगों की बढ़ी परेशानी
कॉलोनियों की गलत लोकेशन दर्ज होने से बदल रही गाइडलाइन दरें, सुधार के लिए पंजीयन कार्यालय पहुंच रहे लोग
भोपाल।
Sampada 2.0 सॉफ्टवेयर में की गई ऑनलाइन मैपिंग की गड़बड़ी अब संपत्ति खरीदारों और रजिस्ट्री कराने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। कई कॉलोनियों की लोकेशन गलत दर्ज होने के कारण संपत्तियों की गाइडलाइन दरों में बदलाव हो रहा है, जिससे रजिस्ट्री प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। लोग अपनी संपत्ति की सही लोकेशन अपडेट कराने के लिए लगातार पंजीयन कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
सर्विस प्रोवाइडर द्वारा रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करने के दौरान पोर्टल पर गलत लोकेशन दिखाई दे रही है। गलत क्षेत्र की जानकारी आने से दस्तावेजों की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है और कई मामलों में रजिस्ट्री अटक रही है। इसके बाद आवेदक सुधार के लिए संबंधित कार्यालयों में आवेदन कर रहे हैं।
जल्दबाजी में हुई मैपिंग बनी समस्या
संपदा 2.0 की शुरुआत से पहले पूरे जिले की ऑनलाइन मैपिंग कराई गई थी। इसके लिए पंजीयन कार्यालयों को प्रतिदिन लक्ष्य निर्धारित किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, काम जल्द पूरा करने के प्रयास में कई क्षेत्रों की सही जानकारी नहीं हो पाने से कुछ कॉलोनियों की लोकेशन गलत दर्ज हो गई।
कई जगहों पर पूरी कॉलोनी को दूसरे क्षेत्र में दिखाया जा रहा है, जबकि कुछ कॉलोनियों का आधा हिस्सा एक क्षेत्र और आधा हिस्सा दूसरे क्षेत्र में दर्ज हो गया है। इस तकनीकी त्रुटि का सीधा असर अब संपत्ति पंजीयन प्रक्रिया पर दिखाई दे रहा है।
गलत लोकेशन से बदल रही गाइडलाइन दर
पोर्टल पर संपत्ति की वास्तविक लोकेशन के स्थान पर दूसरे क्षेत्र का नक्शा खुलने से वहां की गाइडलाइन दर लागू हो रही है। इससे रजिस्ट्री शुल्क में अंतर आ रहा है और दस्तावेजों के सत्यापन में भी परेशानी हो रही है।
बिचौली मर्दाना स्थित कुछ कॉलोनियों में ऐसी समस्या सामने आई है, जहां कॉलोनी का एक हिस्सा सही स्थान पर और दूसरा हिस्सा अन्य क्षेत्र की लोकेशन में दिखाई दे रहा है। जबकि वास्तविकता में पूरी कॉलोनी एक ही क्षेत्र का हिस्सा है।
597 लोकेशन की हुई थी मर्जिंग
जिले में वर्तमान में 4579 लोकेशन पर दस्तावेजों का पंजीयन किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 597 लोकेशन को मर्ज कर नई लोकेशन तैयार की गई थीं। इसके बाद संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर में इन स्थानों की मैपिंग की गई।
हालांकि, कुछ स्थानों पर मैपिंग सही नहीं होने के कारण नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सुधार प्रक्रिया में लग रहा चार से पांच दिन का समय
पंजीयन विभाग के अधिकारियों के अनुसार गलत लोकेशन से जुड़े मामले लगातार सामने आ रहे हैं। आवेदकों से आवेदन लेकर तकनीकी सुधार के लिए भेजे जा रहे हैं। भोपाल स्तर से सुधार प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित संपत्ति की सही लोकेशन सॉफ्टवेयर में अपडेट की जा रही है।
इस पूरी प्रक्रिया में करीब चार से पांच दिन का समय लग रहा है, जिससे रजिस्ट्री कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
अधिकारियों ने जल्द सुधार का दिया भरोसा
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश स्थानों पर तकनीकी सुधार कर दिया गया है। जिन क्षेत्रों में अभी भी समस्या बनी हुई है, वहां आवेदन प्राप्त होने के बाद सुधार किया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि संपदा 2.0 को अधिक पारदर्शी और आसान बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया है। तकनीकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जा रहा है, ताकि नागरिकों को रजिस्ट्री प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
नागरिकों की मांग— जल्द हो स्थायी समाधान
संपत्ति मालिकों और खरीदारों का कहना है कि ऑनलाइन सिस्टम का उद्देश्य प्रक्रिया को आसान बनाना था, लेकिन गलत मैपिंग के कारण उन्हें अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ रही है। लोगों ने मांग की है कि ऐसी तकनीकी खामियों का स्थायी समाधान जल्द किया जाए, जिससे भविष्य में रजिस्ट्री प्रक्रिया सुचारु रूप से संचालित हो सके।
