विद्योदय महाविद्यालय में गुरु पूर्णिमा महोत्सव संपन्न
‘महर्षि संदीपनी श्रद्धा पर्व’ के माध्यम से विद्यार्थियों को गुरु के महत्व और भारतीय संस्कृति का दिया संदेश
कौशिक पण्डित ,मनावर जिला धार मध्य प्रदेश
मनावर/धार।
स्थानीय विद्योदय महाविद्यालय, मनावर में भारतीय सनातन संस्कृति के महान पर्व गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धा और उत्साह के साथ “महर्षि संदीपनी श्रद्धा पर्व” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम संस्था प्राचार्य डॉ. अजय वाघे की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों, प्राध्यापकों एवं महाविद्यालय परिवार के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय संस्कृति और जीवन में गुरु के महत्व से अवगत कराना रहा।
गुरु का स्थान जीवन में सर्वोच्च: डॉ. अजय वाघे
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संस्था प्राचार्य डॉ. अजय वाघे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को विशेष स्थान दिया गया है। गुरु केवल शिक्षा प्रदान करने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे जीवन को सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु के मार्गदर्शन से व्यक्ति ज्ञान, संस्कार और अनुशासन के रास्ते पर आगे बढ़ता है। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए गुरु के बताए मार्ग और उनके अनुभवों का अनुसरण करना आवश्यक है।
डॉ. वाघे ने विद्यार्थियों से अपने शिक्षकों का सम्मान करने और उनके मार्गदर्शन को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
विद्यार्थियों ने व्यक्त किए अपने विचार
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विद्यार्थियों ने गुरु के प्रति अपने विचार प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने अपने वक्तव्यों में गुरु के योगदान, शिक्षा के महत्व और जीवन में शिक्षक की भूमिका पर प्रकाश डाला।
विद्यार्थियों ने कहा कि गुरु हमें केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं देते, बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता भी प्रदान करते हैं। उन्होंने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया।
प्राध्यापकों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकों ने भी गुरु-शिष्य संबंध और अपने अनुभवों को विद्यार्थियों के साथ साझा किया।
इस अवसर पर प्रो. आर. एस. मुकाती, प्रो. चेतन शर्मा, प्रो. संतोष शर्मा, डॉ. बालाजी अवसरकर एवं डॉ. सुनीता पाटीदार ने अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल विद्यार्थियों को विषय का ज्ञान देना नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व निर्माण में सहयोग करना भी है। एक अच्छा गुरु अपने शिष्य को सही दिशा देकर उसके भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारतीय संस्कृति और गुरु परंपरा का किया स्मरण
कार्यक्रम के दौरान भारतीय सनातन परंपरा में गुरु के महत्व और गुरु-शिष्य संबंधों की महानता पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और जीवन में सही मार्गदर्शन देने वाले गुरुओं के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर है।
उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर के समान स्थान दिया गया है, क्योंकि गुरु अपने शिष्य को अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाने का कार्य करते हैं। गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण और सफलता की नींव रखता है।
कार्यक्रम में महर्षि संदीपनी जैसे महान गुरुओं की परंपरा को याद करते हुए विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और संस्कारों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने शिक्षकों का सम्मान करें और उनके बताए मार्ग पर चलते हुए समाज एवं राष्ट्र के विकास में योगदान दें।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करते हुए ज्ञान एवं संस्कारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ आयोजन
गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन श्रद्धा, अनुशासन और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों, प्राध्यापकों एवं महाविद्यालय परिवार के सदस्यों ने गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की।
विद्योदय महाविद्यालय द्वारा आयोजित यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों की जानकारी मिली। वक्ताओं ने बताया कि गुरु जीवन में सही मार्गदर्शन देकर व्यक्ति के व्यक्तित्व और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपने विचार साझा किए और शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट किया। प्राध्यापकों ने भी अपने अनुभवों के माध्यम से विद्यार्थियों को ज्ञान, संस्कार और अनुशासन के महत्व से अवगत कराया।
महाविद्यालय में आयोजित यह गुरु पूर्णिमा उत्सव ज्ञान, संस्कार और परंपराओं का सुंदर संगम रहा, जिसने सभी को गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान का संदेश दिया।
