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रिटायरमेंट से एक दिन पहले रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया नगर निगम का इंजीनियर, 6 हजार की घूस लेते लोकायुक्त ने दबोचा

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Published On: 30 July 2026
Lokayukta officials arrest Gwalior Municipal Corporation Executive Engineer Sushil Katare while accepting a ₹6,000 bribe, just one day before his retirement, in a major anti-corruption operation in Madhya Pradesh
— Lokayukta officials arrest Gwalior Municipal Corporation Executive Engineer Sushil Katare while accepting a ₹6,000 bribe, just one day before his retirement, in a major anti-corruption operation in Madhya Pradesh

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रिटायरमेंट से एक दिन पहले रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया नगर निगम का इंजीनियर, 6 हजार की घूस लेते लोकायुक्त ने दबोचा

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। ग्वालियर नगर निगम में कार्यरत कार्यपालन यंत्री (Executive Engineer) सुशील कटारे को लोकायुक्त पुलिस ने 6 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई ने इसलिए भी सबका ध्यान खींचा क्योंकि आरोपी अधिकारी अपनी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।

जानकारी के अनुसार अगले ही दिन कार्यालय में उनकी विदाई समारोह की तैयारी चल रही थी। उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद लगभग 60 लाख रुपये के सेवानिवृत्ति लाभ मिलने थे, लेकिन उससे पहले ही लोकायुक्त की टीम ने उन्हें रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। इस घटना ने सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

36 लाख रुपये के भुगतान के बदले मांगा गया था कमीशन

प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला नगर निगम के एक निर्माण कार्य के भुगतान से जुड़ा है।

शिकायतकर्ता सचिन पचौरी, जो एक ठेकेदार हैं, ने लोकायुक्त पुलिस को शिकायत दी थी कि उनके लगभग 36 लाख रुपये के भुगतान की फाइल पास करने के लिए कार्यपालन यंत्री सुशील कटारे द्वारा एक प्रतिशत कमीशन मांगा जा रहा है।

बताया गया कि आरोपी अधिकारी ने कुल 36 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। शिकायत के अनुसार 30 हजार रुपये पहले ही लिए जा चुके थे, जबकि शेष 6 हजार रुपये लेने के दौरान लोकायुक्त ने जाल बिछाकर कार्रवाई की।

लोकायुक्त ने बिछाया जाल, रंगे हाथ हुई गिरफ्तारी

शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने पूरे मामले का सत्यापन किया।

जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद लोकायुक्त की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप की कार्रवाई की। जैसे ही आरोपी अधिकारी ने शिकायतकर्ता से 6 हजार रुपये लिए, टीम ने तत्काल दबिश देकर उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया।

कार्रवाई के दौरान रिश्वत की राशि भी बरामद कर ली गई और आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

विदाई समारोह की चल रही थी तैयारी

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी अधिकारी अगले दिन सेवानिवृत्त होने वाले थे।

नगर निगम कार्यालय में उनके सम्मान में विदाई समारोह आयोजित किया जाना था। सहकर्मी विदाई कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे थे और उन्हें सम्मानित करने की योजना बनाई जा रही थी।

लेकिन विदाई से मात्र 24 घंटे पहले हुई लोकायुक्त की कार्रवाई ने पूरे कार्यालय को स्तब्ध कर दिया। जिस अधिकारी के सम्मान की तैयारी चल रही थी, वह रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार हो गया।

सेवानिवृत्ति पर मिलने थे लगभग 60 लाख रुपये

सूत्रों के अनुसार सुशील कटारे को सेवानिवृत्ति के बाद विभिन्न मदों में लगभग 60 लाख रुपये का भुगतान मिलने वाला था।

इनमें—

  • ग्रेच्युटी
  • भविष्य निधि (PF)
  • अवकाश नकदीकरण
  • अन्य सेवानिवृत्ति लाभ

शामिल थे।

लेकिन रिश्वत के मामले में गिरफ्तारी के बाद अब उनके सेवानिवृत्ति लाभों और विभागीय कार्रवाई पर भी असर पड़ सकता है। संबंधित विभाग नियमानुसार आगे की प्रक्रिया तय करेगा।

शिकायतकर्ता भी नगर निगम से जुड़े परिवार का सदस्य

इस मामले में एक दिलचस्प तथ्य यह भी सामने आया है कि शिकायतकर्ता सचिन पचौरी नगर निगम के पूर्व अधिकारी एवं इंजीनियर प्रेम पचौरी के पुत्र हैं।

बताया जा रहा है कि नगर निगम के कार्यों से जुड़े होने के कारण उन्हें भुगतान प्रक्रिया की जानकारी थी। जब कथित रूप से कमीशन मांगा गया तो उन्होंने इसकी शिकायत लोकायुक्त से कर दी।

लोकायुक्त ने शिकायत की पुष्टि होने के बाद पूरी योजना बनाकर आरोपी को गिरफ्तार किया।

एक प्रतिशत कमीशन की मांग बनी गिरफ्तारी की वजह

शिकायत के अनुसार अधिकारी ने भुगतान जारी करने के एवज में कुल बिल राशि का एक प्रतिशत कमीशन मांगा था।

सरकारी विभागों में भुगतान के बदले कमीशन मांगने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि निर्माण कार्यों और ठेकेदारों के भुगतान में पारदर्शिता की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है।

लोकायुक्त एसपी ने क्या कहा

लोकायुक्त ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक निरंजन शर्मा ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि विभागीय भुगतान के बदले रिश्वत मांगने की शिकायत प्राप्त हुई थी।

उन्होंने कहा कि शिकायत का सत्यापन कराने के बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप की कार्रवाई की और आरोपी अधिकारी को 6 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

एसपी ने कहा कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘रिटायरमेंट के आखिरी दिन भी रिश्वत लेना चिंता का विषय’

लोकायुक्त एसपी निरंजन शर्मा ने कहा कि यह मामला केवल एक ट्रैप कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह सरकारी व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर भी प्रस्तुत करता है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी अपने सेवा जीवन के अंतिम दिन भी रिश्वत लेने से नहीं रुकता, तो यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार किस स्तर तक जड़ें जमा चुका है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोकायुक्त का अभियान भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार जारी रहेगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

नगर निगम में मचा हड़कंप

जैसे ही कार्यपालन यंत्री की गिरफ्तारी की खबर नगर निगम कार्यालय पहुंची, कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

कार्यालय में जहां एक ओर विदाई कार्यक्रम की तैयारियां चल रही थीं, वहीं दूसरी ओर लोकायुक्त की कार्रवाई ने पूरे माहौल को बदल दिया।

कई अधिकारी इस कार्रवाई से हैरान दिखाई दिए।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा

इस कार्रवाई के बाद ग्वालियर के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

सूत्रों के अनुसार आरोपी अधिकारी का विभिन्न स्तरों पर प्रभाव माना जाता था और विभाग में उनका अच्छा खासा दबदबा था। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन गिरफ्तारी के बाद मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए भी बड़ा संदेश है जो सेवानिवृत्ति के अंतिम समय तक भ्रष्टाचार में लिप्त रहते हैं।

लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सेवा समाप्ति के अंतिम दिन भी यदि कोई अधिकारी रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

आगे क्या होगी कार्रवाई?

लोकायुक्त पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर रही है। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि—

  • क्या आरोपी ने पहले भी इसी प्रकार रिश्वत ली थी?
  • क्या इस मामले में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल हैं?
  • भुगतान प्रक्रिया में और किन लोगों की भूमिका रही?
  • क्या अन्य ठेकेदारों से भी इसी प्रकार कमीशन लिया गया?

यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।

भ्रष्टाचार पर फिर उठे सवाल

ग्वालियर नगर निगम में हुई यह कार्रवाई केवल एक अधिकारी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को भी उजागर करती है। सेवानिवृत्ति से महज एक दिन पहले रिश्वत लेते पकड़े गए कार्यपालन यंत्री का मामला इस बात का संकेत है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई कितनी जरूरी है।

लोकायुक्त की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि जांच में और कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं तथा आरोपी अधिकारी के खिलाफ विभागीय और कानूनी स्तर पर क्या कार्रवाई होती है।

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