Strait of Hormuz Crisis: ईरान संघर्ष के बीच दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग पर बढ़ा खतरा
वैश्विक तेल व्यापार का 20 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित, भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र में उठाई आवाज
नई दिल्ली।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर दिखाई देने लगा है। फरवरी 2026 से शुरू हुआ संघर्ष कई महीनों बाद भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, जिसके कारण इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ गई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजार, तेल कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने उठाया जहाजों पर हमलों का मुद्दा
29 जुलाई 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंदब स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि नागरिक और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग की।
भारत ने बताया कि हाल के दिनों में भारतीय क्रू वाले कई जहाजों पर हमले हुए हैं, जिनमें भारतीय नागरिक प्रभावित हुए हैं। इन घटनाओं में कुछ नाविकों की मौत हुई, कई घायल हुए और कुछ के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
भारतीय जहाजों की स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण
तनावपूर्ण हालात के बावजूद कुछ भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने में सफल रहे हैं। इनमें लीला वाडिनार और महा रूस जैसे टैंकर शामिल हैं।
हालांकि, कई भारतीय ध्वजांकित जहाज अभी भी इस क्षेत्र से गुजरने की प्रतीक्षा में हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 मार्च 2026 से 17 जुलाई 2026 के बीच कुल 59 जहाजों ने होर्मुज मार्ग पार किया। इनमें 23 भारतीय ध्वजांकित जहाज और 36 विदेशी ध्वजांकित जहाज शामिल थे, जो भारत के लिए सामान लेकर जा रहे थे।
यह स्थिति बताती है कि क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियां जारी हैं, लेकिन सुरक्षा जोखिम अभी भी बना हुआ है।
भारतीय नाविकों की तैनाती पर रोक
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
जारी निर्देशों के अनुसार, अगले आदेश तक होर्मुज क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती नहीं करने को कहा गया है।
अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला भारतीय नाविकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एहतियाती कदम के रूप में लिया गया है। समुद्री क्षेत्र में जोखिम कम होने तक इस नीति को जारी रखा जा सकता है।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते संकट की मुख्य वजह ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य और राजनीतिक तनाव है।
ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों के जवाब में क्षेत्र में नियंत्रण बढ़ाने के संकेत दिए हैं, जबकि अमेरिका का कहना है कि उसकी समुद्री निगरानी और कार्रवाई जारी है।
हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाओं को लेकर चर्चा चल रही है, लेकिन अभी तक किसी ठोस समाधान या समयसीमा की घोषणा नहीं हुई है।
वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज केवल तेल व्यापार के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। यहां किसी भी प्रकार की रुकावट से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और इसका असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर काफी निर्भर है। इसलिए इस मार्ग की सुरक्षा भारत के आर्थिक हितों से सीधे जुड़ी हुई है।
भारत ने की सुरक्षित समुद्री आवाजाही की अपील
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है।
भारत ने मांग की है कि नागरिक जहाजों और उनके कर्मचारियों को संघर्ष का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। साथ ही समुद्री व्यापार को बिना बाधा जारी रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट ने एक बार फिर यह दिखाया है कि दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार व्यवस्था कितनी हद तक सुरक्षित समुद्री मार्गों पर निर्भर करती है।
