क्षेमंकरी माता मंदिर भीनमाल में चौदस-पूर्णिमा 2026 पर हजारों श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन किए। जानिए विशेष श्रृंगार, छप्पन भोग, महाप्रसाद, सुरक्षा व्यवस्था और पूरे आयोजन की विस्तृत रिपोर्ट।
क्षेमंकरी माता मंदिर भीनमाल में चौदस-पूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का महासैलाब
भीनमाल (जालोर)। क्षेमंकरी माता मंदिर भीनमाल में चौदस और पूर्णिमा के पावन अवसर पर इस वर्ष आस्था का अद्भुत और ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला। लगभग 150 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ में सुबह से लेकर देर रात तक हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर परिसर “जय श्री क्षेमंकरी माता” और “जय माता दी” के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान रहा।
राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ-साथ गुजरात और महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां भगवती के दर्शन करने पहुंचे। भक्तों ने माता के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की।
क्षेमंकरी माता मंदिर का धार्मिक महत्व
राजस्थान के जालोर जिले के ऐतिहासिक नगर भीनमाल में स्थित क्षेमंकरी माता मंदिर भीनमाल क्षेत्र की प्रमुख शक्ति पीठों में शामिल है। लगभग डेढ़ सौ फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर वर्षों से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।विशेष रूप से चौदस, पूर्णिमा और नवरात्रि के दौरान यहां विशाल संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
सुबह तड़के से लगी लंबी कतारें
क्षेमंकरी माता मंदिर के वरिष्ठ पुजारी रूपराम राजपुरोहित ने बताया कि चौदस की संध्या से ही दर्शन का क्रम शुरू हो गया था, जो पूर्णिमा के दिन अपने चरम पर पहुंच गया।महाआरती के बाद सुबह तड़के ही भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। मंदिर परिसर में दर्शन के लिए सुव्यवस्थित लाइनें बनाई गई थीं ताकि किसी श्रद्धालु को परेशानी का सामना न करना पड़े।राजस्थान के अलावा गुजरात एवं महाराष्ट्र से आए श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की।
विशेष श्रृंगार और छप्पन भोग बना आकर्षण
क्षेमंकरी माताजी ट्रस्ट के अध्यक्ष कोलचंद सोनी ने बताया कि पूर्णिमा के अवसर पर मां क्षेमंकरी की चतुर्भुज प्रतिमा का भव्य एवं आकर्षक श्रृंगार किया गया।माता रानी को छप्पन भोग अर्पित किया गया।पूरे मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी, पुष्प सज्जा एवं धार्मिक ध्वजों से सजाया गया, जिससे वातावरण अत्यंत मनोहारी दिखाई दिया।
दिनभर चलता रहा भजन-कीर्तन
पूरे दिन मंदिर परिसर में ढोल-नगाड़ों की थाप पर भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ।श्रद्धालु माता के जयकारे लगाते हुए भक्ति में लीन नजर आए।संध्या आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर दीपों और श्रद्धा की रोशनी से जगमगा उठा।
महाप्रसाद में उमड़ी भक्तों की भीड़
पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर ट्रस्ट एवं स्थानीय भक्तों द्वारा विशाल महाप्रसाद का आयोजन किया गया।भामाशाह परबत प्रागाराम राजपुरोहित (उनडी) की ओर से भी महाप्रसाद वितरण कराया गया।हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
सुरक्षा एवं यातायात के पुख्ता इंतजाम
क्षेमंकरी माताजी ट्रस्ट के मैनेजर प्रदीप नगर ने बताया कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने विशेष व्यवस्थाएं की थीं।मुख्य व्यवस्थाएं—
- पहाड़ी पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात
- सीढ़ियों पर छाया की व्यवस्था
- पेयजल की व्यवस्था
- चिकित्सा सहायता
- पार्किंग व्यवस्था
- यातायात नियंत्रण
- महिला एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सहायता
इन व्यवस्थाओं के कारण पूरे आयोजन में कहीं भी अव्यवस्था देखने को नहीं मिली।
ट्रस्ट और स्थानीय श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग
इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में क्षेमंकरी माताजी ट्रस्ट के अध्यक्ष कोलचंद सोनी, वरिष्ठ पुजारी रूपराम राजपुरोहित, ट्रस्ट मैनेजर प्रदीप नगर, तथा भामाशाह परबत प्रागाराम राजपुरोहित (उनडी) सहित अनेक स्थानीय श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।पूरे आयोजन के दौरान सेवा कार्यों में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक भी सक्रिय रहे।
श्रद्धालुओं ने जताई अटूट आस्था
दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि क्षेमंकरी माता मंदिर भीनमाल में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है।भक्तों का कहना था कि चौदस और पूर्णिमा पर माता के दर्शन से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।कई श्रद्धालु हर माह पूर्णिमा पर यहां दर्शन करने आते हैं।
निष्कर्ष
क्षेमंकरी माता मंदिर भीनमाल में आयोजित चौदस-पूर्णिमा महोत्सव एक बार फिर आस्था, सेवा और धार्मिक एकता का अनुपम उदाहरण बनकर सामने आया।भव्य श्रृंगार, छप्पन भोग, विशाल महाप्रसाद, उत्कृष्ट सुरक्षा व्यवस्था और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।

