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गुरु पूर्णिमा पर शासकीय उमावि मोहना में गुरु पर्व का भव्य आयोजन, सेवानिवृत्त शिक्षक भेरूलाल जामलिया का हुआ सम्मान

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Published On: 29 July 2026
Retired teacher Bherulal Jamliya being felicitated with a flower garland during the Guru Purnima celebration at Government Higher Secondary School Mohana, where students presented Guru Vandana and teachers paid tribute to the Guru-Shishya tradition
— Retired teacher Bherulal Jamliya being felicitated with a flower garland during the Guru Purnima celebration at Government Higher Secondary School Mohana, where students presented Guru Vandana and teachers paid tribute to the Guru-Shishya tradition

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गुरु पूर्णिमा पर शासकीय उमावि मोहना में गुरु पर्व का भव्य आयोजन, सेवानिवृत्त शिक्षक भेरूलाल जामलिया का हुआ सम्मान

मोहन बड़ोदिया | रिपोर्टर: राजेश जामलिया

गुरु-शिष्य परंपरा और भारतीय संस्कृति के महान आदर्शों को समर्पित गुरु पूर्णिमा का पर्व शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मोहना में श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित गुरु पर्व कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों ने गुरुजनों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए भारतीय संस्कृति के इस पावन पर्व को गरिमामय वातावरण में मनाया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त शिक्षक भेरूलाल जामलिया रहे, जिनका विद्यालय परिवार ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार तिलक लगाकर, पुष्पमाला पहनाकर और आत्मीय स्वागत करते हुए सम्मान किया। समारोह में गुरु के महत्व, शिक्षा के संस्कार और भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा पर विस्तृत विचार रखे गए। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर रहा।

गुरु पूर्णिमा पर गुरुजनों को किया नमन

गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जो गुरु के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। इसी भावना को केंद्र में रखते हुए विद्यालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्हें जीवन का मार्गदर्शक बताया। विद्यालय के शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को गुरु पूर्णिमा का महत्व समझाते हुए शिक्षा के साथ संस्कारों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।

विद्यालय परिसर में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। विद्यार्थियों ने अनुशासित ढंग से कार्यक्रम में भाग लिया और पूरे आयोजन को यादगार बनाया।

मां सरस्वती के पूजन और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ

गुरु पर्व कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय परंपरा के अनुरूप मां सरस्वती के पूजन-अर्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

मुख्य अतिथि भेरूलाल जामलिया, प्राचार्य अक्षय चंद्रवंशी एवं विद्यालय परिवार के शिक्षकों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर विद्या, ज्ञान और विवेक की कामना की गई।

पूरे कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी और विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ इसमें सहभागिता निभाई।

सेवानिवृत्त शिक्षक भेरूलाल जामलिया का किया गया सम्मान

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विद्यालय परिवार द्वारा सेवानिवृत्त शिक्षक भेरूलाल जामलिया का विशेष सम्मान किया गया।

विद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने उन्हें तिलक लगाकर, पुष्पमाला पहनाकर और सम्मान स्वरूप अभिनंदन किया। उपस्थित लोगों ने उनके लंबे शिक्षकीय जीवन, विद्यार्थियों के निर्माण में दिए गए योगदान और समाज के प्रति उनकी सेवाओं की सराहना की।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि एक शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, बल्कि वह जीवनभर समाज को ज्ञान और संस्कार देने का कार्य करता रहता है। ऐसे शिक्षकों का अनुभव नई पीढ़ी के लिए सदैव प्रेरणादायक होता है।

छात्र-छात्राओं ने प्रस्तुत की सामूहिक गुरु वंदना

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सामूहिक रूप से गुरु वंदना प्रस्तुत की।

विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने उपस्थित सभी लोगों को भाव-विभोर कर दिया। गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने वाली इस प्रस्तुति को सभी ने सराहा।

गुरु वंदना के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि जीवन को सही दिशा और उद्देश्य भी प्रदान करते हैं।

प्राचार्य अक्षय चंद्रवंशी ने बताया गुरु का महत्व

विद्यालय के प्राचार्य अक्षय चंद्रवंशी ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में गुरु पूर्णिमा के धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि गुरु ही व्यक्ति के जीवन को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास और नैतिक मूल्यों की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने गुरुजनों के बताए मार्ग पर चलें, अनुशासन का पालन करें और शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कारों को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

प्राचार्य ने कहा कि सफलता केवल अच्छे अंक प्राप्त करने से नहीं मिलती, बल्कि अच्छे संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक सोच ही व्यक्ति को समाज में सम्मान दिलाते हैं।

मुख्य अतिथि भेरूलाल जामलिया ने सुनाया गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सेवानिवृत्त शिक्षक भेरूलाल जामलिया ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति की गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने महर्षि सांदीपनि के जीवन, उनके आश्रम और भगवान श्रीकृष्ण सहित उनके शिष्यों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्राचीन भारत में शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं थी, बल्कि जीवन निर्माण की प्रक्रिया थी।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है, क्योंकि गुरु ही व्यक्ति को ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने गुरुजनों का सम्मान करें, उनके अनुभवों से सीखें और जीवन में सदैव सत्य, अनुशासन और परिश्रम का मार्ग अपनाएं।

महर्षि सांदीपनि के जीवन से सीखने का संदेश

अपने संबोधन के दौरान भेरूलाल जामलिया ने महर्षि सांदीपनि के जीवन पर विशेष प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि महर्षि सांदीपनि का आश्रम भारतीय शिक्षा व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण था, जहां शिक्षा के साथ-साथ नैतिकता, सेवा, अनुशासन और आत्मनिर्भरता का भी प्रशिक्षण दिया जाता था।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को अपनाना चाहिए, तभी वे जीवन में वास्तविक सफलता प्राप्त कर सकेंगे।

शिक्षा के साथ संस्कारों पर दिया गया विशेष जोर

कार्यक्रम में सभी वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि एक अच्छा नागरिक बनना भी उतना ही आवश्यक है।

विद्यार्थियों से कहा गया कि वे अपने माता-पिता, गुरुजनों और समाज के प्रति सम्मान की भावना रखें तथा अपने व्यवहार से परिवार और विद्यालय का नाम रोशन करें।

वक्ताओं ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में तकनीकी ज्ञान जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक नैतिक शिक्षा और मानवीय मूल्य भी हैं।

विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक निभाई सहभागिता

गुरु पर्व कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने गुरु वंदना के अलावा विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भी गुरु के महत्व को प्रदर्शित किया। विद्यालय परिसर तालियों की गूंज और प्रेरणादायक संदेशों से जीवंत बना रहा।

विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों का आशीर्वाद लेकर जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प भी व्यक्त किया।

विद्यालय परिवार की रही सक्रिय भूमिका

कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं और कर्मचारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

पूरे कार्यक्रम की व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रहीं। मंच संचालन भगवान कलमोदिया ने प्रभावशाली ढंग से किया, जबकि सरिता तिवारी ने आभार प्रदर्शन करते हुए मुख्य अतिथि, शिक्षकों, विद्यार्थियों और उपस्थित सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

विद्यालय परिवार ने सभी के सहयोग से कार्यक्रम को सफल और प्रेरणादायक बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

गुरु पूर्णिमा ने दिया ज्ञान और संस्कार का संदेश

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मोहना में आयोजित गुरु पूर्णिमा समारोह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा, ज्ञान और संस्कारों का जीवंत पाठ भी बना।

इस अवसर पर गुरु के महत्व, भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और शिक्षा की गरिमा को जिस प्रकार प्रस्तुत किया गया, उसने विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने की नई प्रेरणा दी।

कार्यक्रम का समापन गुरुजनों के सम्मान, विद्यार्थियों के उत्साह और भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी आस्था के साथ हुआ। उपस्थित सभी लोगों ने गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर ज्ञान, अनुशासन, सेवा और संस्कारों के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया तथा गुरुजनों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

 

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