Sarangpur में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा पर्व, ब्रह्माकुमारीज ने दिया आत्मज्ञान और राजयोग का संदेश
मनोज कुमार पुष्पद की रिपोर्ट
Sarangpur , 29 जुलाई। गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, सारंगपुर सेवा केन्द्र पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाई-बहनों, नगरवासियों, समाजसेवियों, युवाओं और महिलाओं ने भाग लेकर परमात्म स्मृति, राजयोग साधना और आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ प्राप्त किया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का वातावरण बना रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया।
गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व बताया
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मजागृति, आत्मपरिवर्तन और जीवन को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा देने वाला महापर्व है। उन्होंने कहा कि परमसद्गुरु परमात्मा ही समस्त मानवता के सच्चे मार्गदर्शक और सद्गतिदाता हैं। परमात्मा मनुष्य को अज्ञान, भय, अशांति और विकारों से मुक्त कर ज्ञान, प्रेम, शांति और आनंद के मार्ग पर चलना सिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में परमपिता परमात्मा शिव संपूर्ण मानवता के सद्गुरु बनकर राजयोग और ईश्वरीय ज्ञान के माध्यम से प्रत्येक आत्मा को उसके वास्तविक स्वरूप का बोध करा रहे हैं। जब मनुष्य स्वयं को आत्मा और परमात्मा को अपना पिता मानकर जीवन जीता है, तब उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आने लगते हैं।
परमात्मा ही सच्चे सद्गुरु
भाग्यलक्ष्मी दीदी ने कहा कि संसार में अनेक गुरु ज्ञान प्रदान करते हैं, लेकिन परमात्मा ही ऐसे सद्गुरु हैं जो जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का मार्ग बताते हैं। परमात्मा का ज्ञान मनुष्य के भीतर छिपी दिव्यता को जागृत करता है और उसे श्रेष्ठ कर्म करने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि आज का समय मानसिक तनाव, अशांति, प्रतिस्पर्धा और भौतिक दौड़ का समय है। ऐसे समय में यदि मनुष्य राजयोग के माध्यम से स्वयं को परमात्मा से जोड़ ले, तो उसके भीतर आत्मविश्वास, धैर्य, करुणा और सकारात्मक सोच का विकास होता है। यही आध्यात्मिक शक्ति जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति को संतुलित बनाए रखती है।
राजयोग से मिलता है आत्मिक सुख
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को राजयोग का अभ्यास भी कराया गया। ब्रह्माकुमारी बहनों ने बताया कि राजयोग केवल ध्यान की एक विधि नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ कला है। यह मनुष्य को स्वयं से जोड़ने के साथ-साथ परमात्मा से भी जोड़ता है।
राजयोग के नियमित अभ्यास से मन शांत होता है, नकारात्मक विचार कम होते हैं और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। इससे व्यक्ति अपने परिवार, समाज और कार्यक्षेत्र में भी बेहतर भूमिका निभा सकता है। इसी कारण आज दुनिया के अनेक देशों में राजयोग को मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवनशैली के प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाया जा रहा है।
विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए विशेष प्रार्थना
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से परमात्म स्मृति में योगाभ्यास किया। इसके बाद विश्व शांति, सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और समस्त मानवता के कल्याण के लिए विशेष प्रार्थना की गई।
कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में प्रेम, सहयोग, सहनशीलता, सत्य और अहिंसा जैसे मानवीय मूल्यों को अपनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करेंगे।
बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने बांधा समां
गुरु पूर्णिमा समारोह का आकर्षण नन्हे बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे। बच्चों ने गुरु महिमा पर आधारित मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया।
उनकी प्रस्तुति में गुरु के प्रति श्रद्धा, भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का सुंदर संदेश दिखाई दिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ बच्चों का उत्साहवर्धन किया। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनते हैं।
समाज के विभिन्न वर्गों की रही सहभागिता
गुरु पूर्णिमा के इस विशेष आयोजन में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। राज्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र वर्मा, वरिष्ठ व्यापारी नरेंद्र मकोड़िया सहित अनेक गणमान्य नागरिक कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
सभी अतिथियों ने ब्रह्माकुमारी बहनों का सम्मान करते हुए उनके आध्यात्मिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार में किए जा रहे योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को आध्यात्मिक जागरूकता और नैतिक शिक्षा की सबसे अधिक आवश्यकता है और ब्रह्माकुमारी संस्था इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।
ईश्वरीय प्रसाद के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को ईश्वरीय प्रसाद वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं और गुरु के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
आयोजन के अंत में उपस्थित लोगों ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का अवसर है। यदि मनुष्य गुरु के बताए मार्ग पर ईमानदारी से चले तो वह स्वयं का, अपने परिवार का और समाज का जीवन बेहतर बना सकता है।
गुरु परंपरा का संदेश
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च माना गया है। गुरु केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह जीवन का पथप्रदर्शक होता है। गुरु शिष्य के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानकर उसे सही दिशा देता है और उसके व्यक्तित्व का निर्माण करता है।
आज भी गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी धरोहरों में से एक है। गुरु पूर्णिमा हमें अपने गुरु, माता-पिता, शिक्षकों और उन सभी व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देती है जिन्होंने हमारे जीवन को सही दिशा दी है।
आध्यात्मिक चेतना का संदेश
सारंगपुर सेवा केन्द्र पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मिक जागृति और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला प्रेरणादायी आयोजन भी रहा। पूरे कार्यक्रम में श्रद्धा, अनुशासन, सेवा, प्रेम और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने परमात्मा की स्मृति में जीवन व्यतीत करने, राजयोग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने और समाज में शांति, प्रेम तथा मानवीय मूल्यों के प्रसार का संकल्प लिया। संस्था के पदाधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे आयोजन समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने और लोगों को सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
