जावरा में धर्म-ध्यान, त्याग और तपस्या के साथ चातुर्मास का शुभारंभ, जैन दिवाकर भवन में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
जावरा (निप्र)। नगर के जैन दिवाकर भवन में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में चातुर्मास का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। वर्षाकाल के चार पवित्र महीनों में आत्मशुद्धि, धर्म आराधना, त्याग, तपस्या और संयमपूर्ण जीवन का संदेश देने वाले इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता कर धर्म लाभ प्राप्त किया।
चातुर्मास जैन धर्म की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक माना जाता है। इस दौरान साधु-साध्वी एक स्थान पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को धर्म, संयम, अहिंसा और आत्मकल्याण का मार्ग बताते हैं। इसी उद्देश्य के साथ जैन दिवाकर भवन में चातुर्मास की शुरुआत हुई, जहां प्रथम दिवस पर भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक सामायिक से हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके बाद सभी ने नवकार महामंत्र का सामूहिक जाप कर आत्मिक शांति और कल्याण की कामना की। पूरे परिसर में मंत्रोच्चार और धर्म आराधना से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
धर्म आराधना चातुर्मास समिति प्रमुख एवं नवयुवक मंडल के पूर्व अध्यक्ष नितिन कोलन तथा श्रीसंघ के पूर्व कोषाध्यक्ष अजय चपडोद ने बताया कि चातुर्मास का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को आत्मचिंतन, संयम, तपस्या और आध्यात्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करना है। इन चार महीनों में श्रद्धालु नियमित रूप से सामायिक, स्वाध्याय, प्रवचन, तप, त्याग और विभिन्न धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से अपने जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करते हैं।
उन्होंने बताया कि चातुर्मास के प्रथम दिवस पर बाहर से पधारे श्रद्धालुओं एवं अतिथियों के स्वागत एवं आतिथ्य का लाभ सुजानमल-नीलेश कुमार औरा परिवार ने प्राप्त किया। वहीं प्रथम दिवस की प्रभावना का लाभ लाभचंद-अजय कुमार चपडोद परिवार द्वारा श्रद्धापूर्वक लिया गया।
आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। समाज के वरिष्ठजनों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर धर्म आराधना में सहभागिता की तथा चातुर्मास के दौरान नियमित रूप से धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने का संकल्प लिया।
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि आगामी दिनों में प्रवचन, सामायिक, स्वाध्याय, तप, त्याग, धार्मिक प्रतियोगिताएं एवं विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य समाज में नैतिक मूल्यों, अहिंसा, सदाचार और आत्मकल्याण की भावना को सुदृढ़ करना है।
चातुर्मास के शुभारंभ के साथ ही जैन दिवाकर भवन धर्म, ध्यान और साधना का केंद्र बन गया है, जहां आगामी चार माह तक श्रद्धालु आध्यात्मिक साधना और धर्म आराधना के माध्यम से आत्मिक उन्नति का प्रयास करेंगे।
