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Parliament Monsoon Session 2026: राहुल गांधी के ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ वाले बयान पर लोकसभा में हंगामा, स्पीकर ने रिकॉर्ड से हटवाया शब्द

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Published On: 29 July 2026
Leader of Opposition Rahul Gandhi speaks during the Lok Sabha debate on the Anti-Paper Leak Bill in Parliament's Monsoon Session 2026, as his 'Idiot' and 'Andhbhakt' remarks trigger protests from treasury bench members
— Leader of Opposition Rahul Gandhi speaks during the Lok Sabha debate on the Anti-Paper Leak Bill in Parliament's Monsoon Session 2026, as his 'Idiot' and 'Andhbhakt' remarks trigger protests from treasury bench members

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Parliament Monsoon Session 2026: राहुल गांधी के ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ वाले बयान पर लोकसभा में हंगामा, स्पीकर ने रिकॉर्ड से हटवाया शब्द

नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026

संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ (एंटी पेपर लीक बिल) पर चर्चा के दौरान उस समय जोरदार हंगामा हो गया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण में “इडियट” (Idiot) और “अंधभक्त” जैसे शब्दों का उल्लेख किया। सत्ता पक्ष ने इसे असंसदीय बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया और इन शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की। बाद में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने “इडियट” शब्द को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया।

राहुल गांधी ने अपने पूरे भाषण में परीक्षा प्रणाली, छात्रों के आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर सरकार को घेरने का प्रयास किया। उन्होंने दावा किया कि देश के छात्र केवल परीक्षा प्रणाली में सुधार नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव चाहते हैं।

एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान गरमाया सदन

बुधवार को लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा जारी थी। सरकार की ओर से इस विधेयक को प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण बताया गया।

इसी चर्चा में हिस्सा लेते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपना भाषण शुरू किया। हालांकि उनके कुछ शब्दों पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके कारण सदन में कई बार शोर-शराबा हुआ और अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा।

राहुल गांधी ने छात्रा से बातचीत का किया जिक्र

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे हाल ही में कुछ छात्राओं और युवाओं से मिले थे। उन्होंने कहा कि उन छात्रों के साथ हुई बातचीत ने उन्हें यह समझने में मदद की कि आज की युवा पीढ़ी शिक्षा और परीक्षा प्रणाली को किस नजरिए से देखती है।

राहुल गांधी ने कहा कि वे उसी बातचीत के आधार पर यह समझाना चाहते हैं कि “स्टूडेंट” यानी विद्यार्थी का वास्तविक अर्थ क्या होता है।

उन्होंने कहा कि उनके अनुसार एक सच्चा विद्यार्थी वह होता है जो सीखने के लिए हमेशा तैयार रहता है, जिसका मन खुला होता है और जो दूसरों की बात सुनने तथा समझने की क्षमता रखता है।

‘स्टूडेंट’ की अपनी परिभाषा बताई

राहुल गांधी ने कहा कि विद्यार्थी केवल स्कूल या कॉलेज में पढ़ने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि जीवन में सीखने की इच्छा रखने वाला हर व्यक्ति विद्यार्थी होता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि—

  • एक किसान भी विद्यार्थी हो सकता है।
  • एक पिता भी विद्यार्थी हो सकता है।
  • डॉक्टर, वकील और अन्य पेशों से जुड़े लोग भी विद्यार्थी हो सकते हैं।
  • जो व्यक्ति लगातार सीखने की कोशिश करता है, वही वास्तविक विद्यार्थी कहलाता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे लोग दूसरों का सम्मान करते हैं, नई बातों को स्वीकार करते हैं और सच्चाई को समझने का प्रयास करते हैं।

‘इडियट’ शब्द के इस्तेमाल पर मचा बवाल

अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने एक छात्रा के साथ हुई कथित बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा कि उस छात्रा ने लोगों के एक ऐसे वर्ग का जिक्र किया, जिन्हें यह विश्वास होता है कि उन्हें सब कुछ पता है।

राहुल गांधी ने कहा कि छात्रा के अनुसार ऐसे लोग स्वयं को सर्वज्ञ मानते हैं, दूसरों की बात नहीं सुनते और उन्हें लगता है कि ज्ञान केवल उन्हीं के पास है।

उन्होंने आगे कहा कि जब उन्होंने छात्रा से पूछा कि वह ऐसे लोगों को क्या कहती है, तो छात्रा ने जवाब दिया— “मैं उन्हें Idiots कहती हूं।”

राहुल गांधी ने यह बात जैसे ही सदन में कही, सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। भाजपा सांसदों ने इसे असंसदीय भाषा बताते हुए तुरंत आपत्ति दर्ज कराई।

सत्ता पक्ष ने जताई कड़ी आपत्ति

राहुल गांधी के बयान के बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को संसद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए और ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए जिन्हें असंसदीय माना जा सकता है।

सत्ता पक्ष के कई सांसद अपनी सीटों से खड़े हो गए और राहुल गांधी से यह शब्द वापस लेने की मांग करने लगे।

कुछ सांसदों ने कहा कि इस प्रकार की भाषा लोकतांत्रिक चर्चा के स्तर को कमजोर करती है और संसद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

राहुल गांधी ने दी सफाई

विरोध बढ़ने पर राहुल गांधी ने तुरंत स्पष्ट किया कि उन्होंने सत्ता पक्ष के किसी सांसद को “इडियट” नहीं कहा है।

उन्होंने कहा कि वे केवल एक छात्रा के साथ हुई बातचीत का उदाहरण दे रहे थे और उसी संदर्भ में यह शब्द आया।

राहुल गांधी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या दल का अपमान करना नहीं था, बल्कि यह समझाना था कि सीखने की प्रवृत्ति और अहंकार में क्या अंतर होता है।

‘अंधभक्त’ शब्द का भी किया उल्लेख

अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने “अंधभक्त” शब्द का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि छात्रा से बातचीत के दौरान उन्होंने उससे पूछा कि यदि एक श्रेणी विद्यार्थी की है और दूसरी उन लोगों की है जो स्वयं को सर्वज्ञ मानते हैं, तो तीसरी श्रेणी किसकी होगी।

राहुल गांधी के अनुसार छात्रा ने जवाब दिया कि तीसरी श्रेणी “अंधभक्त” की होती है, जो बिना सवाल किए किसी व्यक्ति या विचार का अनुसरण करते हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि समाज में हर व्यक्ति को प्रश्न पूछने और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

इस टिप्पणी पर भी सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया और इसे राजनीतिक टिप्पणी करार दिया।

स्पीकर ओम बिरला ने किया हस्तक्षेप

लगातार बढ़ते हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी को बीच में रोकते हुए कहा कि वे विधेयक पर केंद्रित रहकर अपनी बात रखें।

स्पीकर ने कहा कि सदन में चर्चा का विषय एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक है और सभी सदस्यों को उसी विषय पर अपनी बात रखनी चाहिए।

राहुल गांधी ने जवाब देते हुए कहा कि वे परीक्षा प्रणाली और विद्यार्थियों की सोच के संदर्भ में ही यह उदाहरण दे रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने रिकॉर्ड से शब्द हटाने का सुझाव दिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस विवाद के दौरान हस्तक्षेप किया।

उन्होंने सत्ता पक्ष के सांसदों से आग्रह किया कि राहुल गांधी को अपनी बात पूरी करने दी जाए।

साथ ही उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि “इडियट” शब्द को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा दिया जाए।

लोकसभा अध्यक्ष ने इस सुझाव को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि संबंधित टिप्पणी को कार्यवाही से हटा दिया जाए।

बाद में अध्यक्ष ने सदन को जानकारी दी कि “इडियट” शब्द रिकॉर्ड से हटा दिया गया है।

शिक्षा मंत्रालय और RSS पर भी साधा निशाना

अपने भाषण के दूसरे हिस्से में राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला जारी रखा।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में शिक्षा मंत्रालय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का प्रभाव रहा।

राहुल गांधी ने कहा कि कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों में ऐसे कुलपतियों की नियुक्ति की गई, जिनकी वैचारिक पृष्ठभूमि संघ से जुड़ी हुई थी।

उन्होंने दावा किया कि इससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित हुई और शिक्षा व्यवस्था पर वैचारिक प्रभाव बढ़ा।

छात्रों के आंदोलन का किया समर्थन

राहुल गांधी ने हाल के छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभर में छात्र केवल परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे शिक्षा व्यवस्था में निष्पक्षता और पारदर्शिता चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों को अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक अधिकार है और सरकार को उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।

राहुल गांधी के अनुसार युवाओं का आंदोलन भविष्य की पीढ़ी की आवाज है और इसे केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

एंटी पेपर लीक बिल पर जारी रही बहस

राहुल गांधी के भाषण के दौरान हुए हंगामे के बावजूद लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा जारी रही।

सरकार ने कहा कि संशोधित कानून प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली, पेपर लीक और संगठित परीक्षा अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद करेगा।

विपक्ष ने हालांकि विधेयक के कई प्रावधानों पर सवाल उठाए और सरकार से परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग दोहराई।

संसद में राजनीतिक टकराव के बीच आगे बढ़ी कार्यवाही

बुधवार का दिन संसद में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहस के नाम रहा। एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी के “इडियट” और “अंधभक्त” शब्दों के उल्लेख ने माहौल को और अधिक गरमा दिया। सत्ता पक्ष ने इसे असंसदीय बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया, जबकि राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनका बयान किसी सांसद या राजनीतिक दल के लिए नहीं था, बल्कि छात्रों के साथ हुई बातचीत का एक उदाहरण था।

अंततः लोकसभा अध्यक्ष के निर्देश पर विवादित शब्द को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा दिया गया और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में भाषा की मर्यादा, राजनीतिक संवाद की शैली और लोकतांत्रिक बहस की सीमाओं को लेकर नई चर्चा छेड़ दी।

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