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Parliament Monsoon Session 2026: लोकसभा से ध्वनिमत से पारित हुआ एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक, राज्यसभा ने वंदे मातरम् अपमान को अपराध बनाने वाले बिल को दी मंजूरी

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Published On: 29 July 2026
Parliament Monsoon Session 2026 in progress as the Lok Sabha passes the Anti-Paper Leak Amendment Bill by voice vote amid opposition protests, while the Rajya Sabha approves the Vande Mataram Bill during a heated parliamentary debate
— Parliament Monsoon Session 2026 in progress as the Lok Sabha passes the Anti-Paper Leak Amendment Bill by voice vote amid opposition protests, while the Rajya Sabha approves the Vande Mataram Bill during a heated parliamentary debate

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Parliament Monsoon Session 2026: लोकसभा से ध्वनिमत से पारित हुआ एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक, राज्यसभा ने वंदे मातरम् अपमान को अपराध बनाने वाले बिल को दी मंजूरी

नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026

संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में महत्वपूर्ण विधायी कार्यवाही देखने को मिली। लोकसभा ने विपक्ष के भारी हंगामे और तीखी बहस के बीच ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। वहीं, राज्यसभा ने वंदे मातरम् के अपमान को अपराध की श्रेणी में लाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी।

दिनभर संसद में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विशेष रूप से राहुल गांधी के बयान, छात्रों के आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और गृह मंत्री अमित शाह पर लगाए गए आरोपों को लेकर सदन में कई बार हंगामा हुआ, जिसके कारण लोकसभा की कार्यवाही अलग-अलग समय पर स्थगित करनी पड़ी।

सुबह 11 बजे शुरू होते ही हंगामे की भेंट चढ़ी लोकसभा

बुधवार सुबह 11 बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष लगातार छात्रों के आंदोलन, कथित पुलिस कार्रवाई और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहा था। बढ़ते शोर-शराबे के कारण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।

दोपहर में कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद भी विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच टकराव जारी रहा।

नौ घंटे चली बहस के बाद पारित हुआ एंटी पेपर लीक बिल

गौरतलब है कि मंगलवार को इस विधेयक पर लोकसभा में करीब नौ घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई थी। दोपहर 2 बजे से लेकर रात 11 बजे तक चली बहस में कई सांसदों ने अपने विचार रखे, हालांकि समयाभाव के कारण कुछ सदस्यों का वक्तव्य बाकी रह गया था।

बुधवार को चर्चा आगे बढ़ाई गई और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार की ओर से बहस का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।

सरकार का कहना है कि नए संशोधन से परीक्षा माफियाओं, संगठित पेपर लीक गिरोहों और तकनीकी माध्यमों से होने वाली परीक्षा में धांधली पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

चर्चा पूरी होने के बाद विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के बीच लोकसभा ने ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया।

सरकार का दावा – युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए जरूरी कानून

सरकार ने विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। ऐसे में 2024 में बनाए गए कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए संशोधन आवश्यक था।

सरकार के अनुसार संशोधित कानून के लागू होने से—

  • पेपर लीक के मामलों में कड़ी कार्रवाई होगी।
  • संगठित अपराध में शामिल नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
  • डिजिटल माध्यम से होने वाली परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी पर भी सख्ती की जाएगी।
  • अभ्यर्थियों का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास मजबूत होगा।

राहुल गांधी ने परीक्षा व्यवस्था और छात्रों के आंदोलन पर रखी बात

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने परीक्षा व्यवस्था और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि उन्हें परीक्षा प्रणाली पर बोलने का अवसर दिया गया, इसके लिए वे सदन के आभारी हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि देशभर में सड़कों पर उतरे छात्र केवल गुस्से में नहीं थे, बल्कि वे अपने भविष्य और न्याय की मांग कर रहे थे। उनके अनुसार युवाओं का आंदोलन देश की नई पीढ़ी की भावना को दर्शाता है और सभी राजनीतिक दलों को इसका सम्मान करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि भाजपा के नेता अपने बच्चों से भी इस आंदोलन के बारे में पूछेंगे तो उन्हें भी छात्रों के प्रति समर्थन ही मिलेगा।

राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज को सुनना सरकार की जिम्मेदारी है और परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

अमित शाह पर राहुल गांधी के आरोप से बढ़ा विवाद

संसद में राहुल गांधी के भाषण के दौरान उस समय माहौल और अधिक गरमा गया जब उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर छात्रों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर गृह मंत्री को सदन में आकर जवाब देना चाहिए।

बाद में संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यदि गृह मंत्री ने कोई आदेश नहीं दिया था तो उन्हें स्वयं सदन में आकर स्पष्ट करना चाहिए कि पुलिस कार्रवाई उनके निर्देश पर नहीं हुई।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को संसद में अपनी बात रखने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए।

किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान पर जताई आपत्ति

राहुल गांधी के बयान पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि बिना किसी प्रमाण के किसी केंद्रीय मंत्री पर गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी की भाषा पर भी आपत्ति जताई और कहा कि संसद की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।

रिजिजू ने अध्यक्ष से राहुल गांधी के कुछ शब्दों को कार्यवाही से हटाने की मांग भी की।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहस हो सकती है, लेकिन बिना साक्ष्य किसी व्यक्ति पर आरोप लगाना उचित नहीं माना जा सकता।

स्पीकर ओम बिरला ने दी मर्यादा बनाए रखने की नसीहत

सदन में बढ़ते विवाद के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी सहित सभी सांसदों से संसदीय परंपराओं और मर्यादा का पालन करने की अपील की।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी सदस्य अपनी बात पूरी स्वतंत्रता से रखें, लेकिन भाषा और व्यवहार संसद की गरिमा के अनुरूप होना चाहिए।

स्पीकर के हस्तक्षेप के बावजूद सदन में हंगामा जारी रहा और कार्यवाही को दोपहर 2:30 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

खड़गे ने उठाया छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा

कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया।

उन्होंने सरकार से पूछा कि प्रदर्शन स्थल पर बिना अनुमति पहुंचे लोगों की भूमिका की जांच क्यों नहीं कराई गई।

खड़गे ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वहां कौन लोग पहुंचे, उन्हें किसने भेजा और पूरे घटनाक्रम के पीछे किसकी भूमिका थी।

उन्होंने छात्रों के आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की।

जेपी नड्डा ने पुलिस कार्रवाई का किया बचाव

खड़गे के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कानून अपने हाथ में लेता है तो पुलिस को कार्रवाई करनी ही पड़ती है।

उन्होंने कहा कि वे स्वयं छात्र राजनीति से जुड़े रहे हैं और आपातकाल के दौरान कई बार आंदोलन करते हुए गिरफ्तार हुए थे।

नड्डा ने कहा कि आंदोलन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून व्यवस्था बनाए रखना भी सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की।

डिंपल यादव का संसद परिसर में अनोखा प्रदर्शन

समाजवादी पार्टी के सांसदों ने अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में कथित चढ़ावा और चंदा गबन मामले को लेकर संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

सपा सांसद डिंपल यादव हाथ में दान पेटी लेकर संसद पहुंचीं और सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया।

उन्होंने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।

डिंपल यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल एसआईटी गठित कर देना पर्याप्त नहीं है और इस मुद्दे को समाजवादी पार्टी संसद में लगातार उठाती रहेगी।

राज्यसभा में वंदे मातरम् अपमान को अपराध बनाने वाला विधेयक पारित

लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पारित होने के साथ ही राज्यसभा में भी एक महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी मिली।

राज्यसभा ने वंदे मातरम् के अपमान को अपराध की श्रेणी में शामिल करने वाले विधेयक को पारित कर दिया।

सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सम्मान और राष्ट्रगान तथा राष्ट्रगीत से जुड़े प्रतीकों के सम्मान को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।


संसद में दिनभर रहा राजनीतिक तनाव

बुधवार का दिन संसद में लगातार राजनीतिक टकराव और महत्वपूर्ण विधायी गतिविधियों के नाम रहा। एक ओर सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक को लोकसभा से पारित कराया, वहीं विपक्ष ने छात्रों के आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की।

बार-बार कार्यवाही स्थगित होने के बावजूद दोनों सदनों में महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और मतदान पूरा हुआ। आने वाले दिनों में इन विधेयकों के लागू होने की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि इनका सीधा प्रभाव देश की परीक्षा प्रणाली, कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मामलों पर पड़ने वाला है।

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