Public Examinations Amendment Bill 2026: पेपर लीक कानून होगा और सख्त, बढ़ेगी सजा और जुर्माने का प्रावधान
छात्रों के देशव्यापी प्रदर्शन के बाद संसद में पेश हुआ संशोधन बिल, जांच और कार्रवाई के लिए तय होगी समय सीमा
नई दिल्ली। पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने Public Examinations (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल 2026 संसद में पेश किया है। मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को इस बिल पर सदन में चर्चा शुरू हुई। यह बिल छात्रों के देशव्यापी प्रदर्शनों के बाद सदन में लाया गया है।
इस संशोधन बिल का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। सरकार ने इसमें पेपर लीक, परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल और इससे जुड़े संगठित नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया है।
केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बिल को विचार के लिए पेश करते हुए कहा कि यह कदम छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए कानून को और मजबूत बनाया जा रहा है।
पेपर लीक रोकने के लिए कानून में किए जाएंगे बड़े बदलाव
सरकार जिस कानून में संशोधन कर रही है, उसका नाम पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट 2024 है। यह कानून कई पेपर लीक मामलों के बाद लागू किया गया था।
इस कानून में करीब 15 तरह के अपराधों को शामिल किया गया था। इनमें प्रमुख रूप से:
- प्रश्न पत्र लीक करना
- आंसर शीट से जुड़ी गड़बड़ी
- पेपर लीक से संबंधित वेबसाइट या प्लेटफॉर्म चलाना
- परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं में अनियमितता
- अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत
शामिल हैं।
कानून में बिना वारंट गिरफ्तारी, गैर-जमानती अपराध और गैर-समझौता योग्य अपराध जैसी व्यवस्थाएं भी पहले से मौजूद हैं।
संशोधित बिल में बढ़ाई जाएगी सजा
नए संशोधन बिल में पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल के दोषियों के लिए सजा को और कठोर करने का प्रस्ताव रखा गया है।
संशोधित प्रावधानों के अनुसार:
- न्यूनतम जेल की सजा 3 साल से बढ़ाकर 5 साल की जाएगी।
- अधिकतम जेल की सजा 5 साल से बढ़ाकर 10 साल की जाएगी।
- जुर्माने की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की जाएगी।
सरकार का मानना है कि कड़ी सजा से पेपर लीक माफिया और संगठित गिरोहों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों पर भी बढ़ेगी कार्रवाई
परीक्षा से जुड़ी सेवाएं देने वाली कंपनियों और संस्थाओं के लिए भी नए नियम प्रस्तावित किए गए हैं।
संशोधन के तहत:
- सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों पर जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये किया जाएगा।
- ऐसी कंपनियों को सार्वजनिक परीक्षा से जुड़े कामों से प्रतिबंधित करने की अवधि 4 साल से बढ़ाकर 8 साल की जाएगी।
वहीं, पेपर लीक मामले में शामिल व्यक्ति, समूह या संस्थानों के लिए:
- न्यूनतम सजा 5 साल से बढ़ाकर 7 साल करने का प्रस्ताव है।
- अधिकतम जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक किया जा सकता है।
जांच के लिए तय होगी दो महीने की समय सीमा
संशोधन बिल में जांच प्रक्रिया को तेज करने के लिए समय सीमा भी निर्धारित की गई है।
इसके लिए नई धाराएं 12A और 12B जोड़ी जा रही हैं। इनके तहत केंद्र सरकार द्वारा मामला सौंपे जाने के बाद जांच को दो महीने के भीतर पूरा करने का प्रावधान किया गया है।
जांच की जिम्मेदारी:
- केंद्रीय जांच एजेंसी
- या विशेष जांच दल (Special Task Force)
को दी जा सकती है।
सरकार का उद्देश्य है कि पेपर लीक मामलों में लंबी जांच प्रक्रिया के कारण कार्रवाई में देरी न हो।
फास्ट ट्रैक कोर्ट को मिलेगी कानूनी मान्यता
संशोधन बिल में फास्ट ट्रैक कोर्ट को भी कानूनी मान्यता देने का प्रावधान किया गया है।
इसके तहत:
- राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हाईकोर्ट की सलाह से विशेष सेशन कोर्ट बनाएंगे।
- मामलों की सुनवाई रोजाना होगी।
- चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
- अपील हाईकोर्ट में की जा सकेगी।
- अपील की सुनवाई दो जजों की बेंच करेगी।
- अपील का निपटारा भी तीन महीने के भीतर करने का प्रावधान है।
छात्रों के हितों की सुरक्षा पर सरकार का जोर
सरकार का कहना है कि यह संशोधन ईमानदार छात्रों के हितों को सुरक्षित रखने और परीक्षा प्रणाली में भरोसा कायम करने के लिए लाया गया है।
लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों के कारण छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ी है। ऐसे में सरकार सख्त कानून, तेज जांच और कड़ी सजा के माध्यम से परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
अब यह बिल संसद की आगे की प्रक्रिया से गुजरने के बाद कानून का रूप लेगा।
