चातुर्मास साधना का सर्वोत्तम काल, आत्मकल्याण का सुनहरा अवसर: डॉ. अमृतरसा श्री जी म.सा.
नागदा से जीवनलाल जैन की रिपोर्ट।
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महिदपुर रोड। चातुर्मास के पावन अवसर पर महिदपुर रोड में विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब के मंगल प्रवचनों का शुभारंभ मंगलवार को भक्ति और श्रद्धा के वातावरण में हुआ। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर जिनवाणी का श्रवण किया और आत्मकल्याण का संदेश ग्रहण किया। साध्वीश्री ने अपने ओजस्वी प्रवचन में कहा कि चातुर्मास साधकों के लिए साधना का सर्वश्रेष्ठ सीजन है, क्योंकि यही वह समय है जब व्यक्ति अपने जीवन को आध्यात्मिक दिशा देकर आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण की ओर अग्रसर हो सकता है।
उन्होंने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने, बुराइयों का त्याग करने और सद्गुणों को अपनाने का श्रेष्ठ अवसर है। यदि व्यक्ति इन चार महीनों का सदुपयोग कर ले तो उसका जीवन सकारात्मक परिवर्तन की ओर बढ़ सकता है।
पांच प्रकार के त्याग का दिया संदेश
प्रवचन के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी ने भगवान महावीर के बताए पांच प्रमुख त्यागों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में पाप का त्याग, परनिंदा का त्याग, प्रमाद का त्याग, छल-कपट और प्रपंच का त्याग तथा परिग्रह का त्याग करना चाहिए। इन त्यागों को अपनाने से आत्मा शुद्ध होती है और मोक्षमार्ग की ओर बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य का वास्तविक विकास तभी संभव है जब वह अपने भीतर मौजूद अहंकार, लोभ, क्रोध और मोह जैसी कमजोरियों पर विजय प्राप्त करे। चातुर्मास इन्हीं विकारों को दूर कर आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
विराधना से आराधना की ओर बढ़ने का समय
साध्वीश्री ने कहा कि चातुर्मास हमें विराधना से आराधना की ओर ले जाने वाला पर्व है। जीवन की व्यस्तताओं के बीच व्यक्ति अक्सर धर्म और आत्मचिंतन से दूर हो जाता है, लेकिन चातुर्मास उसे पुनः आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से नियमित रूप से प्रवचन, स्वाध्याय, जाप, तप और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने का आग्रह किया।
चार माह तक होगा शास्त्र वाचन
जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया कि चातुर्मास के दौरान पूज्य साध्वीश्री के मुखारविंद से ‘शांत सुधा रस’ एवं ‘भीमसेन चरित्र’ जैसे महत्वपूर्ण जैन ग्रंथों का नियमित वाचन किया जाएगा। श्रद्धालुओं को चार महीनों तक इन धार्मिक ग्रंथों के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
कई परिवारों ने लिया धार्मिक लाभ
प्रथम दिवस पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में विभिन्न परिवारों ने पूजन एवं प्रवचन प्रभावना का लाभ प्राप्त किया। अजय कुमार-आशीष कुमार चौरड़िया परिवार ने प्रवचन प्रभावना का लाभ लिया। वहीं पारसमल-अनोखीलाल भंडारी परिवार, समरथमल-शुभम कुमार-संकेश कुमार चौरड़िया परिवार सहित अनेक श्रद्धालुओं ने विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता निभाई।
इसी प्रकार सुरेशचंद, रमेशचंद, मुकेश कुमार राज कोचर परिवार, राजेंद्र कुमार-ऋषभ कुमार बरड़िया परिवार तथा विजय कुमार-पीयूष कुमार बरड़िया परिवार ने अष्टप्रकारी पूजा, ज्ञान पूजा और आरती का लाभ लेकर धर्माराधना की।

चार माह तक होगा वर्धमान शक्रस्तव अभिषेक
चातुर्मास के प्रथम दिन भगवान महावीर का वर्धमान शक्रस्तव अभिषेक संपन्न हुआ। यह अभिषेक आगामी चार महीनों तक प्रतिदिन आयोजित किया जाएगा। समाज के प्रत्येक परिवार को इस धार्मिक आयोजन में भाग लेकर अभिषेक करने का अवसर प्रदान किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक श्रद्धालु धर्मलाभ प्राप्त कर सकें।
प्रतिदिन होंगे धार्मिक आयोजन
चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह 6:30 बजे भक्तामर स्तोत्र एवं गुरु गुण इक्कीसा पाठ का आयोजन किया जाएगा। इसके पश्चात सुबह 9:15 बजे से 10:15 बजे तक साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब के प्रवचन होंगे, जिनमें धर्म, संयम, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।
समाजजनों से अधिकाधिक सहभागिता की अपील
जैन श्रीसंघ अध्यक्ष अजय चौरड़िया एवं चातुर्मास समिति अध्यक्ष परेश चतर ने समाज के सभी सदस्यों से अनुरोध किया कि वे चातुर्मास के दौरान आयोजित सभी धार्मिक कार्यक्रमों में सपरिवार शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि यह चार माह आत्मिक उन्नति और संस्कारों को मजबूत करने का श्रेष्ठ अवसर है, जिसका लाभ प्रत्येक परिवार को उठाना चाहिए।
चातुर्मास के शुभारंभ के साथ महिदपुर रोड में धार्मिक उल्लास का वातावरण दिखाई दे रहा है। श्रद्धालुओं में प्रवचनों और धार्मिक आयोजनों को लेकर विशेष उत्साह है। आने वाले चार महीनों में नियमित रूप से होने वाले प्रवचन, शास्त्र वाचन, पूजा-अर्चना और आध्यात्मिक कार्यक्रम निश्चित रूप से समाज को धर्म, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
