विदेशों में भारतीय कामगारों की बढ़ती मौतें: खाड़ी देशों में आखिर क्यों जा रही हैं इतनी जानें? जानिए पूरी रिपोर्ट
नई दिल्ली। बेहतर रोजगार, अधिक आय और परिवार का भविष्य संवारने की उम्मीद लेकर हर साल लाखों भारतीय खाड़ी (गल्फ) देशों का रुख करते हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन जैसे देशों में भारतीय प्रवासी बड़ी संख्या में निर्माण, तेल एवं गैस, परिवहन, घरेलू सेवाओं और अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों में कार्यरत हैं। लेकिन हाल के वर्षों में सामने आए सरकारी आंकड़ों ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है।
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच कार्यस्थल पर हुए हादसों में 800 से अधिक भारतीय कामगारों की मौत हुई, जिनमें से करीब 55 प्रतिशत मौतें केवल खाड़ी देशों में दर्ज की गईं। वहीं यदि बीमारी, सड़क दुर्घटना, प्राकृतिक कारण, आत्महत्या और अन्य सभी कारणों को शामिल किया जाए तो 2021 से 2025 के बीच विदेशों में कुल 37,740 भारतीय नागरिकों की मौत हुई, जिनमें 86 प्रतिशत से अधिक मौतें खाड़ी देशों में हुईं।
ये आंकड़े केवल संख्याएं नहीं हैं, बल्कि उन हजारों परिवारों की पीड़ा को दर्शाते हैं, जिनके सदस्य रोजी-रोटी कमाने विदेश गए और फिर कभी वापस नहीं लौट सके।
हर साल लाखों भारतीय जाते हैं खाड़ी देशों में
भारत दुनिया के सबसे बड़े प्रवासी समुदायों में शामिल है। खाड़ी देशों में करोड़ों भारतीय विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे श्रमिकों की है जो निर्माण कार्य, सड़क निर्माण, तेल एवं गैस परियोजनाओं, फैक्ट्रियों, सफाई सेवाओं, होटल उद्योग और घरेलू कार्यों से जुड़े हैं।
इनमें से अधिकांश लोग बेहतर वेतन और रोजगार के अवसरों की तलाश में गांव और छोटे शहरों से विदेश जाते हैं। कई लोग कर्ज लेकर एजेंटों के माध्यम से विदेश पहुंचते हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना देखते हैं।
2023 से 2025 के बीच 800 से अधिक कामगारों की कार्यस्थल पर मौत
विदेश मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के बीच कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं के कारण 800 से ज्यादा भारतीय प्रवासी कामगारों की जान गई।
इनमें से लगभग 55 प्रतिशत मौतें खाड़ी देशों में हुईं। इसका अर्थ है कि इस अवधि के दौरान औसतन हर सप्ताह तीन भारतीय कामगार खाड़ी देशों में कार्यस्थल दुर्घटनाओं के कारण अपनी जान गंवा रहे थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन दुर्घटनाओं के पीछे कई कारण हैं, जिनमें सुरक्षा मानकों का पालन न होना, अत्यधिक गर्मी, लंबे समय तक काम और जोखिमपूर्ण कार्य शामिल हैं।
सऊदी अरब में सबसे अधिक मौतें
आंकड़ों के अनुसार, खाड़ी देशों में सऊदी अरब भारतीय कामगारों की कार्यस्थल पर मौत के मामलों में सबसे ऊपर है।
प्रमुख आंकड़े
- सऊदी अरब – 182 मौतें
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE) – 128 मौतें
- अन्य मौतें कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन सहित अन्य देशों में दर्ज हुईं।
रिपोर्ट में कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए गैस विस्फोट का भी उल्लेख है, जिसमें 12 भारतीय कामगारों की जान चली गई थी।
पांच वर्षों में विदेशों में 37 हजार से अधिक भारतीयों की मौत
यदि केवल कार्यस्थल दुर्घटनाओं की बात न करें बल्कि सभी कारणों से हुई मौतों को देखें तो तस्वीर और भी गंभीर दिखाई देती है।
2021 से 2025 के बीच विदेशों में कुल 37,740 भारतीय नागरिकों की मौत हुई।
इनमें शामिल हैं—
- बीमारी
- प्राकृतिक मृत्यु
- सड़क दुर्घटनाएं
- कार्यस्थल हादसे
- आत्महत्या
- अन्य दुर्घटनाएं
इसका अर्थ है कि विदेशों में औसतन हर दिन 20 से अधिक भारतीय नागरिकों की मौत हुई।
इन मौतों में 86 प्रतिशत से अधिक मामले खाड़ी देशों से जुड़े हुए हैं।
आखिर इतनी मौतें क्यों हो रही हैं?
विशेषज्ञों और श्रमिक संगठनों के अनुसार, इसके पीछे केवल एक कारण नहीं बल्कि कई जटिल परिस्थितियां जिम्मेदार हैं।
1. भीषण गर्मी में काम
खाड़ी देशों में गर्मियों के दौरान तापमान कई बार 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।
निर्माण स्थलों, सड़क परियोजनाओं और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को लंबे समय तक धूप में रहना पड़ता है।
इससे—
- हीट स्ट्रोक
- डिहाइड्रेशन
- हार्ट संबंधी समस्याएं
- थकावट
- बेहोशी
जैसी गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं।
2. अत्यधिक शारीरिक मेहनत
निर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को रोजाना भारी मशीनों, लोहे, सीमेंट और अन्य भारी सामान के साथ काम करना पड़ता है।
लगातार कई घंटे कठिन श्रम करने से शरीर पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं।
3. सुरक्षा प्रशिक्षण की कमी
कई मामलों में श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा प्रशिक्षण नहीं मिलता।
समस्याएं शामिल हैं—
- सुरक्षा उपकरणों का अभाव
- हेलमेट और हार्नेस का सही उपयोग न होना
- मशीनों के संचालन का अपर्याप्त प्रशिक्षण
- ऊंचाई पर कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी
इन कारणों से दुर्घटनाओं का खतरा काफी बढ़ जाता है।
4. लंबे कार्य घंटे
कई प्रवासी श्रमिकों को प्रतिदिन 10 से 12 घंटे या उससे भी अधिक समय तक काम करना पड़ता है।
लगातार काम करने से—
- थकान
- एकाग्रता में कमी
- निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होना
जैसी समस्याएं पैदा होती हैं, जिससे दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है।
5. खराब रहने की व्यवस्था
कई श्रमिक साझा श्रमिक शिविरों में रहते हैं, जहां—
- अत्यधिक भीड़
- सीमित सुविधाएं
- स्वच्छता की कमी
- स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव
जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
इन परिस्थितियों का सीधा असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।
6. मानसिक तनाव और आत्महत्या
विदेश मंत्रालय के अनुसार, खाड़ी देशों में भारतीय प्रवासी कामगारों के बीच आत्महत्या के कई मामले भी सामने आए हैं।
इसके पीछे प्रमुख कारण माने जाते हैं—
- परिवार से लंबी दूरी
- आर्थिक दबाव
- कर्ज
- नौकरी का तनाव
- वेतन में देरी
- सामाजिक अलगाव
- मानसिक स्वास्थ्य सहायता की कमी
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और परामर्श सेवाओं की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
वेतन में देरी और श्रमिकों की परेशानियां
कई श्रमिकों की शिकायत रहती है कि—
- समय पर वेतन नहीं मिलता
- कई महीनों तक भुगतान रुका रहता है
- अनुबंध के अनुसार सुविधाएं नहीं मिलतीं
- ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता
इन परिस्थितियों में आर्थिक संकट और मानसिक तनाव दोनों बढ़ जाते हैं।
दुर्घटनाओं को प्राकृतिक मौत बताने के आरोप
कुछ मामलों में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि कार्यस्थल पर हुई दुर्घटनाओं को प्राकृतिक मृत्यु या हार्ट अटैक बताकर दर्ज किया जाता है।
यदि ऐसा होता है तो—
- बीमा दावों पर असर पड़ सकता है।
- मुआवजा मिलने में कठिनाई आती है।
- दुर्घटना के वास्तविक कारण सामने नहीं आ पाते।
इसी वजह से पारदर्शी जांच और उचित दस्तावेजीकरण की मांग लगातार उठती रही है।
सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
विदेश मंत्रालय का कहना है कि विदेशों में भारतीय कामगारों की सुरक्षा और सहायता के लिए कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं की गई हैं।
प्रमुख पहल
- दुबई में प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र
- रियाद में सहायता केंद्र
- जेद्दा में सहायता केंद्र
- नई दिल्ली में सहायता व्यवस्था
- भारतीय दूतावासों के माध्यम से आपातकालीन सहायता
- शिकायत निवारण तंत्र
इन केंद्रों का उद्देश्य संकट में फंसे भारतीय नागरिकों को सहायता उपलब्ध कराना है।
ई-माइग्रेट पोर्टल से सुरक्षित भर्ती
भारत सरकार ने ई-माइग्रेट (e-Migrate) पोर्टल की व्यवस्था लागू की है।
इसका उद्देश्य—
- अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से भर्ती सुनिश्चित करना
- फर्जी एजेंटों पर रोक लगाना
- रोजगार अनुबंध का रिकॉर्ड रखना
- प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ाना
विशेष रूप से महिला घरेलू कामगारों की सुरक्षा के लिए इस व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जाता है।
खाड़ी देशों के श्रम कानून क्या कहते हैं?
हाल के वर्षों में कई खाड़ी देशों ने अपने श्रम कानूनों में सुधार किए हैं।
इनमें कुछ प्रमुख प्रावधान शामिल हैं—
पासपोर्ट जब्त करने पर रोक
कतर सहित कई देशों में नियोक्ता द्वारा कर्मचारियों का पासपोर्ट अपने पास रखना नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
वार्षिक अवकाश
सऊदी अरब के श्रम कानून के अनुसार निर्धारित अवधि तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को सवेतन वार्षिक अवकाश का अधिकार मिलता है।
चिकित्सा अवकाश
बीमारी की स्थिति में मेडिकल लीव की व्यवस्था भी कई देशों के श्रम कानूनों में शामिल है।
दोपहर में काम पर प्रतिबंध
गर्मी के मौसम में कई खाड़ी देश दोपहर के सबसे गर्म समय में खुले में काम करने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाते हैं ताकि श्रमिकों को हीट स्ट्रोक और अन्य गर्मी संबंधी बीमारियों से बचाया जा सके।
विदेश जाने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश जाने वाले श्रमिकों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अवश्य बरतनी चाहिए।
- केवल अधिकृत भर्ती एजेंसी के माध्यम से विदेश जाएं।
- रोजगार अनुबंध को ध्यान से पढ़ें।
- पासपोर्ट और दस्तावेजों की प्रतियां सुरक्षित रखें।
- भारतीय दूतावास के संपर्क नंबर अपने पास रखें।
- परिवार को नौकरी और कंपनी की पूरी जानकारी दें।
- स्वास्थ्य बीमा और सुरक्षा सुविधाओं की जानकारी पहले ही प्राप्त करें।
- किसी भी समस्या की स्थिति में भारतीय मिशन से तुरंत संपर्क करें।
निष्कर्ष
खाड़ी देशों में रोजगार भारतीय युवाओं के लिए आज भी एक बड़ा अवसर है, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। हालिया आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि कार्यस्थल सुरक्षा, बेहतर आवास, समय पर वेतन, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और श्रमिक अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
भारत सरकार ने प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं, वहीं खाड़ी देशों ने भी श्रम कानूनों में सुधार किए हैं। फिर भी वास्तविक बदलाव तभी संभव होगा जब भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो, सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाए और हर प्रवासी कामगार को उसके अधिकारों की पूरी जानकारी हो।
विदेश जाकर मेहनत करने वाले लाखों भारतीय देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा, सम्मान और अधिकार सुनिश्चित करना केवल सरकारों ही नहीं, बल्कि नियोक्ताओं और समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।
