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राहुल गांधी का बीजेपी पर हमला: “धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान नहीं, लाखों छात्रों के भविष्य की बर्बादी का जश्न”

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Published On: 28 July 2026
Rahul Gandhi criticises BJP after former Education Minister Dharmendra Pradhan is honoured in Parliament following his resignation, calling it a celebration of the ruined future of millions of students
— Rahul Gandhi criticises BJP after former Education Minister Dharmendra Pradhan is honoured in Parliament following his resignation, calling it a celebration of the ruined future of millions of students

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राहुल गांधी का बीजेपी पर हमला: “धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान नहीं, लाखों छात्रों के भविष्य की बर्बादी का जश्न”

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संसद परिसर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसदों द्वारा किए गए उनके सम्मान को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह किसी व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि “लाखों बच्चों के भविष्य की बर्बादी का जश्न” है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नैतिकता के आधार पर नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों और युवाओं के भारी आक्रोश के दबाव में हुआ।

इस पूरे घटनाक्रम ने संसद से लेकर सोशल मीडिया तक राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। एक ओर भाजपा धर्मेंद्र प्रधान के फैसले को त्याग और जिम्मेदारी का प्रतीक बता रही है, वहीं विपक्ष इसे शिक्षा व्यवस्था की विफलता और सरकार की जवाबदेही से जोड़कर देख रहा है।

संसद में धर्मेंद्र प्रधान का हुआ स्वागत

सोमवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान धर्मेंद्र प्रधान पहली बार इस्तीफे के बाद संसद पहुंचे। संसद भवन के मकर द्वार पर एनडीए के कई सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्हें पारंपरिक पगड़ी पहनाई गई और सम्मानपूर्वक सदन तक ले जाया गया।

भाजपा नेताओं ने इस अवसर पर कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों और देशहित को सर्वोपरि रखते हुए अपना निर्णय लिया है। पार्टी का कहना है कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनते हुए स्वेच्छा से इस्तीफा दिया और भाजपा उनके साथ मजबूती से खड़ी है।

इस सम्मान समारोह की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद विपक्ष ने भाजपा की मंशा पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

राहुल गांधी ने एक्स पर साधा निशाना

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भाजपा पर हमला बोलते हुए लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान देश की खराब होती शिक्षा व्यवस्था और भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुके हैं।

उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में आई गंभीर खामियों के कारण लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ और कई दुखद घटनाएं सामने आईं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नैतिक जिम्मेदारी निभाने के लिए नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं के लगातार बढ़ते आंदोलन के दबाव में देना पड़ा।

राहुल गांधी ने लिखा कि ऐसे व्यक्ति का संसद में माला पहनाकर सम्मान करना उन लाखों छात्रों का अपमान है जिन्होंने न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर संघर्ष किया।

उन्होंने कहा कि देश का हर छात्र यह सब देख रहा है और भविष्य में इसकी राजनीतिक जवाबदेही तय करेगा।

क्या कहा राहुल गांधी ने?

राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि—

“धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार और भारत की बर्बाद होती शिक्षा व्यवस्था के प्रतीक हैं। उसी व्यवस्था ने लाखों युवाओं को आंदोलन करने पर मजबूर किया। उनका इस्तीफा नैतिकता की वजह से नहीं बल्कि युवाओं के गुस्से के कारण हुआ। आज संसद में उनका सम्मान करना लाखों छात्रों के भविष्य की बर्बादी का जश्न मनाने जैसा है।”

राहुल गांधी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर पक्ष और विपक्ष के समर्थकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।

छात्रों के आंदोलन से बढ़ा दबाव

पिछले कई दिनों से देशभर में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्र संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे।

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्रों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज कर दी।

इसी बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने इसे अपनी बड़ी राजनीतिक जीत बताया।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि छात्रों का आंदोलन न होता तो सरकार कभी भी शिक्षा मंत्री को नहीं हटाती।

विपक्ष का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में गड़बड़ियों के आरोप लगे, जिससे करोड़ों छात्रों का भरोसा परीक्षा प्रणाली पर कमजोर हुआ।

विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोर कानून लागू किए जाएं।

भाजपा ने किया धर्मेंद्र प्रधान का बचाव

दूसरी ओर भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान ने हमेशा शिक्षा सुधारों के लिए ईमानदारी से काम किया और देश में नई शिक्षा नीति (NEP) को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भाजपा नेताओं का कहना है कि इस्तीफा व्यक्तिगत नैतिक जिम्मेदारी के तहत दिया गया निर्णय था और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।

सूत्रों के अनुसार, संसद में उनका सम्मान इसी संदेश को देने के लिए किया गया कि पार्टी अपने नेताओं के साथ मजबूती से खड़ी रहती है।

वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने की मुलाकात

इस्तीफे के बाद भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान से उनके आवास पर मुलाकात की।

इन नेताओं में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, निर्मला सीतारमण, जितेंद्र सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे।

बैठक के दौरान नेताओं ने उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका इस्तीफा दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन उन्होंने संगठन और सरकार की गरिमा को सर्वोपरि रखा।

भाजपा नेताओं ने यह भी दोहराया कि धर्मेंद्र प्रधान ने किसी दबाव में नहीं बल्कि अपनी इच्छा से यह फैसला लिया।

शिक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर देश की परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी जैसे मामलों ने युवाओं का विश्वास कमजोर किया है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन यदि परीक्षा प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगें तो उनका मनोबल प्रभावित होता है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मंत्री बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा। परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही, तकनीकी सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और पारदर्शी जांच व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

राहुल गांधी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर #RahulGandhi, #DharmendraPradhan, #EducationSystem और #StudentsProtest जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।

कुछ लोगों ने राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार समय की मांग है।

वहीं भाजपा समर्थकों ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को राजनीतिक निशाना बनाया जा रहा है और उनके कार्यकाल में कई ऐतिहासिक शिक्षा सुधार भी हुए हैं।

सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच लगातार राजनीतिक बहस देखने को मिली।

आगे क्या?

अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि केंद्र सरकार शिक्षा मंत्रालय की कमान किसे सौंपती है और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कौन-कौन से नए कदम उठाए जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का विश्वास दोबारा जीतना है। यदि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित नहीं बनाया गया तो भविष्य में ऐसे आंदोलन फिर देखने को मिल सकते हैं।

निष्कर्ष

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और उसके बाद संसद में हुए सम्मान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर भाजपा इसे त्याग, जिम्मेदारी और नेतृत्व के सम्मान के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे शिक्षा व्यवस्था की विफलता से जोड़ते हुए सरकार को घेर रहे हैं।

राहुल गांधी के तीखे बयान ने इस विवाद को और अधिक राजनीतिक बना दिया है। हालांकि अंतिम निर्णय जनता और विशेष रूप से देश के करोड़ों छात्र-युवाओं की राय पर निर्भर करेगा, जो बेहतर, निष्पक्ष और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था की उम्मीद रखते हैं।

 

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