गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव में कृष्णा मां का संदेश — माता-पिता और गुरु बच्चों के जीवन के तीन आधार स्तंभ
संवाददाता : अनीस कुमार , खाचरोद
आष्टा में पांच दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन, देशभर से पहुंचे श्रद्धालु
आष्टा। ब्रह्मानंद जन सेवा संघ माँ कृष्णा धाम मालीपुरा आष्टा के पावन तत्वावधान में श्रद्धेय माँ कृष्णा जी के सानिध्य में आयोजित पांच दिवसीय श्री गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव एवं दिव्य सत्संग श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। महोत्सव के तृतीय दिवस पर देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने सत्संग का लाभ लिया और आध्यात्मिक संदेशों को आत्मसात किया।
कार्यक्रम स्थल पर भक्तों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। पूरे परिसर में भक्ति और आस्था का वातावरण दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए सत्संग में भाग लिया और जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाले विचारों को सुना।
इस अवसर पर हिंदू उत्सव समिति आष्टा के अध्यक्ष भुरू जी मुकाती, सकल हिंदू समाज अध्यक्ष आष्टा नरेंद्र जी कुशवाह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष सीहोर जीवन सिंह जी मंडलोई सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
महिला मंडल ने भगवान को लगाया 56 व्यंजनों का भोग
गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव के तृतीय दिवस पर आश्रम महिला मंडल की साधिकाओं द्वारा भगवान को 56 व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। धार्मिक विधि-विधान और श्रद्धा के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में भक्तों ने हिस्सा लिया।
आश्रम परिसर में भजन, सत्संग और धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हुआ। आयोजन के दौरान सेवा और समर्पण की भावना भी देखने को मिली।
बच्चों के जीवन में माता-पिता और गुरु का विशेष महत्व
दिव्य सत्संग को संबोधित करते हुए परम पूज्य कृष्णा मां ने कहा कि बच्चों के जीवन में तीन प्रमुख आधार स्तंभ होते हैं — माता, पिता और गुरु। उन्होंने कहा कि माता बच्चे के जीवन का पहला विद्यालय होती है। वह बच्चे का पालन-पोषण करती है, संस्कार देती है और जीवन के प्रारंभिक चरण में उसका मार्गदर्शन करती है।
उन्होंने कहा कि पिता बच्चे को शिक्षा, अनुशासन और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। वहीं गुरु व्यक्ति को जीवन जीने की सही कला सिखाते हैं और उसे आध्यात्मिक तथा नैतिक मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं।
कृष्णा मां ने कहा कि माता-पिता बच्चे को जीवन की शुरुआत में संभालते हैं, जबकि गुरु अपने ज्ञान और आशीर्वाद से शिष्य को जीवनभर सही दिशा दिखाते हैं।
गुरु की वाणी शिष्य के जीवन को निखारती है
कृष्णा मां ने गुरु के महत्व को समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार एक मूर्तिकार छेनी और हथौड़ी से पत्थर को तराशकर सुंदर मूर्ति का निर्माण करता है, उसी प्रकार गुरु अपनी ज्ञान रूपी वाणी से शिष्य के व्यक्तित्व को निखारते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह जीवन में संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है। गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति देता है।
भगवान और भक्त के संबंध पर दिया संदेश
सत्संग के दौरान कृष्णा मां ने भगवान और भक्त के संबंध पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान सभी जीवों का पालन करते हैं, लेकिन भगवान को भी भक्तों की श्रद्धा और प्रेम संभालते हैं।
उन्होंने अनेक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि सच्ची भक्ति व्यक्ति को आंतरिक शक्ति प्रदान करती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है।
नारी शक्ति का बताया महत्व
नारी शक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कृष्णा मां ने कहा कि मानव के दो हाथ होते हैं, देवताओं के चार हाथ और देवी शक्ति की आठ भुजाएं शक्ति और सामर्थ्य का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि नारी में अनेक जिम्मेदारियों को निभाने की अद्भुत क्षमता होती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से समाज में महिलाओं के सम्मान और उनकी शक्ति को पहचानने का संदेश दिया।
29 जुलाई को निकलेगी भव्य शोभायात्रा
आयोजन समिति के अनुसार 29 जुलाई को माँ कृष्णा जी के जन्मदिवस के अवसर पर आष्टा नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह शोभायात्रा गायत्री मंदिर बस स्टैंड आष्टा से प्रारंभ होकर मुकाती पेट्रोल पंप पर पहुंचकर संपन्न होगी।
गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव के आगामी कार्यक्रमों को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है। आयोजन में बड़ी संख्या में भक्तों के शामिल होने की संभावना है।
श्रद्धा और भक्ति से सराबोर हुआ आयोजन
गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं को गुरु, संस्कार और आध्यात्मिक जीवन के महत्व का संदेश मिल रहा है। आयोजन स्थल पर भक्ति, सेवा और समर्पण का वातावरण बना हुआ है।
श्रद्धालुओं ने गुरु के बताए मार्ग पर चलने और जीवन में संस्कारों को अपनाने का संकल्प लिया। पांच दिवसीय यह महोत्सव आष्टा क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक उत्साह का केंद्र बना हुआ है।
