आत्म साधना पावन वर्षायोग चातुर्मास की तैयारियां पूर्ण, आज होगी चातुर्मास कलश स्थापना
युवा पीढ़ी को धर्म और संस्कृति से जोड़ने की जरूरत: आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज
ग्वालियर। आत्म साधना पावन वर्षायोग चातुर्मास के अवसर पर जैन समाज में उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है। आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज ससंघ के चातुर्मास कलश स्थापना समारोह का आयोजन आज किया जाएगा। इससे पूर्व नई सड़क स्थित चंपाबाग धर्मशाला में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज ने धर्म, संस्कार और युवा पीढ़ी के मार्गदर्शन को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज ने कहा कि जिस घर में साधु-संतों का आगमन नहीं होता, वह घर आध्यात्मिक दृष्टि से सूना हो जाता है। प्रत्येक व्यक्ति को साधु-संतों का सम्मान करते हुए उन्हें अपने घर पर धर्म भावना और नवधाभक्ति के साथ आमंत्रित करना चाहिए। इससे परिवार में धार्मिक वातावरण बनता है और आने वाली पीढ़ी भी संस्कारों से जुड़ती है।
धर्म और संस्कारों से जुड़ना आवश्यक
आचार्य श्री ने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी धीरे-धीरे धर्म और संस्कारों से दूर होती जा रही है। आधुनिक जीवनशैली के कारण कई युवा अपनी संस्कृति और परंपराओं से कटते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को सही दिशा देने के लिए परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि माता-पिता यदि बच्चों को बचपन से ही धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों का ज्ञान देंगे तो वे जीवन में सही निर्णय लेने में सक्षम होंगे। परिवार ही बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की पहली पाठशाला होता है।
इस अवसर पर आत्म साधना पावन वर्षायोग चातुर्मास के अध्यक्ष वीरेंद्र गंगवाल, सचिव निर्मल पाटनी, मुख्य संयोजक विनय कासलीवाल, विकास गंगवाल, संजय गोधा सहित अन्य समाजजनों ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

माता-पिता बच्चों को दें सही मार्गदर्शन: मुनिश्री अनुमान सागर महाराज
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ने कहा कि आज कई अभिभावक अपने कार्यों में इतने व्यस्त हो गए हैं कि बच्चों के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते। उन्होंने कहा कि मां गृह कार्य और अन्य जिम्मेदारियों में व्यस्त रहती हैं, वहीं पिता व्यवसाय और सामाजिक गतिविधियों में लगे रहते हैं। ऐसे में कई बार बच्चे स्वयं को अकेला महसूस करने लगते हैं।
मुनिश्री ने कहा कि बच्चों को केवल भौतिक सुविधाएं देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार, नैतिक शिक्षा और सही मार्गदर्शन देना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को धर्म, परिवार और समाज से जोड़ें।
उन्होंने संस्कृति के महत्व को बताते हुए कहा कि संस्कृति केवल पहनावे में नहीं बल्कि व्यक्ति की वाणी और व्यवहार में दिखाई देती है। सभी को मधुर भाषा का प्रयोग करना चाहिए, विनम्र रहना चाहिए और बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। यही वास्तविक संस्कार हैं।
आज होगी चातुर्मास कलश स्थापना
चातुर्मास संयोजक विकास गंगवाल एवं मुख्य संयोजक विनय कासलीवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ससंघ की आत्म साधना पावन वर्षायोग चातुर्मास कलश स्थापना 28 जुलाई को दोपहर 4:30 बजे से सकल जैन समाज द्वारा आयोजित की जाएगी।

कार्यक्रम में ध्वजारोहण, आचार्य श्री के मंगल प्रवचन और शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना का आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
गुरु पूर्णिमा पर विशेष धार्मिक आयोजन
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि 29 जुलाई को सुबह 9 बजे से चंपाबाग बगीची में गुरु पूर्णिमा एवं मंगल कलश कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम में चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, शास्त्र भेंट, गुरु पूजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। इसके बाद आचार्य श्री का मंगल आशीर्वाद एवं प्रवचन होगा।

धर्म और संस्कारों के संरक्षण का संदेश
चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं होता, बल्कि आत्म चिंतन, साधना और संस्कारों को मजबूत करने का अवसर भी होता है। आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज ने श्रद्धालुओं से धर्म मार्ग पर चलने, परिवार में संस्कारों का वातावरण बनाने और समाज में सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया।
जैन समाज द्वारा आयोजित यह चातुर्मास कार्यक्रम आध्यात्मिक चेतना, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता को मजबूत करने का माध्यम बनेगा। श्रद्धालुओं में कलश स्थापना समारोह को लेकर विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है।
