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लोड मैनेजमेंट के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों बिजली कटौती, 113 से अधिक गांवों के हजारों उपभोक्ता परेशान

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Published On: 27 July 2026
Residents of rural villages in the Sarangpur subdivision face repeated nighttime power outages under load management, with electricity supply being interrupted across more than 113 villages, causing hardship for households and farmers
— Residents of rural villages in the Sarangpur subdivision face repeated nighttime power outages under load management, with electricity supply being interrupted across more than 113 villages, causing hardship for households and farmers

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लोड मैनेजमेंट के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों बिजली कटौती, 113 से अधिक गांवों के हजारों उपभोक्ता परेशान

रातभर बार-बार बिजली गुल होने से ग्रामीणों में आक्रोश, बच्चों-बुजुर्गों की नींद हराम, आंदोलन की चेतावनी

संवाददाता: मनोज पुष्पद
पड़ाना।
मध्य प्रदेश मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (मप्रमक्षेविवि) के सारंगपुर सब डिवीजन अंतर्गत आने वाले 113 से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों लोड मैनेजमेंट के नाम पर की जा रही लगातार बिजली कटौती से आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय हर एक से डेढ़ घंटे के अंतराल में बिजली सप्लाई बंद कर दी जाती है और कुछ समय बाद फिर चालू कर दी जाती है। पूरी रात यही क्रम चलता रहता है, जिससे लोगों की नींद हराम हो गई है और भीषण गर्मी एवं उमस के बीच जीवन मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह कटौती बिना किसी पूर्व सूचना के की जा रही है। सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों, बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों तथा किसानों को उठानी पड़ रही है। वहीं बार-बार बिजली आने-जाने से घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के खराब होने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं

लोड मैनेजमेंट बना ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कंपनी द्वारा लागू किए जा रहे लोड मैनेजमेंट ने लोगों की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। क्षेत्र के घरेलू एवं मिक्स फीडरों से जुड़े एक सैकड़ा से अधिक गांवों के हजारों उपभोक्ता इस अघोषित बिजली कटौती से परेशान हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिजली की कमी है तो उसका एक निश्चित समय तय किया जाना चाहिए, ताकि लोग अपने दैनिक कार्य उसी के अनुसार कर सकें। लेकिन वर्तमान व्यवस्था में बिना किसी निश्चित समय के बिजली काटी जा रही है, जिससे लोगों को पूरी रात जागकर बितानी पड़ रही है।

शाम से सुबह तक चलता रहा बिजली बंद-चालू होने का सिलसिला

ग्रामीणों के अनुसार शनिवार रात बिजली कटौती का सिलसिला शाम होते ही शुरू हो गया।

बिजली कंपनी के नियंत्रण कक्ष से जारी निर्देशों के अनुसार शाम 6:45 बजे पहली बार ग्रामीण क्षेत्रों के घरेलू एवं मिक्स फीडरों की बिजली बंद कर दी गई। लगभग सवा घंटे बाद रात 8:00 बजे बिजली सप्लाई बहाल हुई।

ग्रामीणों ने राहत की सांस ली ही थी कि करीब सवा घंटे बाद रात 9:15 बजे फिर से बिजली काट दी गई। इसके बाद रात 10:30 बजे सप्लाई दोबारा शुरू हुई।

जब लोग सोने की तैयारी कर रहे थे, तभी रात 11:30 बजे एक बार फिर बिजली बंद कर दी गई। देर रात करीब 12:48 बजे जाकर बिजली आपूर्ति पुनः शुरू हुई।

इतना ही नहीं, तड़के सुबह 5:00 बजे फिर से बिजली काट दी गई और लगभग 6:15 बजे सप्लाई बहाल की गई। इसके बाद भी दिनभर स्थानीय स्तर पर ट्रिपिंग और बिजली के बार-बार आने-जाने का सिलसिला जारी रहा।

113 से अधिक गांव प्रभावित

इस लोड मैनेजमेंट का असर सारंगपुर सब डिवीजन के अंतर्गत आने वाले 113 से अधिक गांवों पर पड़ रहा है।

प्रमुख प्रभावित गांवों में पड़ाना, मऊ, बरूखेड़ी, नारायणपुर, मल्हारगंज, काकरिया, कचरिया, मंगराना, रामपुरिया खेड़ा, साधनखेड़ी, आसारेटा, पवारखेड़ा, नारायणगंज खेड़ा, हीरापुर, करौंदी, टीकोद सहित अनेक ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं।

इन गांवों के हजारों परिवार लगातार हो रही बिजली कटौती के कारण परेशान हैं।

उमस और गर्मी में बढ़ी लोगों की मुश्किलें

इन दिनों क्षेत्र में उमस और गर्मी का असर बना हुआ है। ऐसे में रातभर बिजली बंद रहने से लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है।

बिजली कटते ही कूलर, पंखे और अन्य आवश्यक उपकरण बंद हो जाते हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि रातभर बार-बार बिजली जाने से न तो ठीक से नींद पूरी हो रही है और न ही सुबह काम करने की ऊर्जा बचती है।

किसानों और ग्रामीणों की दिनचर्या भी प्रभावित

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश लोग खेती-किसानी पर निर्भर हैं। सुबह जल्दी उठकर खेतों में जाने वाले किसानों की दिनचर्या भी इस बिजली कटौती से प्रभावित हो रही है।

मिक्स फीडर बंद होने के कारण कई स्थानों पर पानी की मोटरें भी बंद रहती हैं, जिससे घरेलू जलापूर्ति प्रभावित होती है।

किसानों का कहना है कि बिजली की अनिश्चित आपूर्ति से सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है, जिससे कृषि कार्यों पर भी असर पड़ने की आशंका है।

बार-बार ट्रिपिंग से खराब हो रहे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

ग्रामीणों ने बताया कि लगातार ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज की समस्या के कारण घरों में लगे कई महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब हो रहे हैं।

बार-बार बिजली आने-जाने से टीवी, फ्रिज, कूलर, इन्वर्टर, पानी की मोटर, पंखे तथा अन्य घरेलू उपकरणों को नुकसान पहुंच रहा है।

लोगों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ेगा।

ग्रामीणों में बढ़ता जा रहा आक्रोश

लगातार बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सरकार 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में लोड मैनेजमेंट के नाम पर बार-बार बिजली काटी जा रही है।

लोगों का आरोप है कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

‘रातभर हर घंटे बिजली जाती है’ – ग्रामीण उपभोक्ता

ग्रामीण उपभोक्ता रमेश चंद्र का कहना है कि—

“एक तरफ सरकार चौबीस घंटे बिजली देने का दावा करती है, लेकिन दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में हर एक घंटे बाद बिजली काट दी जाती है। बच्चे और बुजुर्ग पूरी रात सो नहीं पा रहे हैं।”

वहीं ग्रामीण मुकेश मालवीय ने कहा—

“मिक्स फीडर बंद होने से लोगों की पूरी दिनचर्या प्रभावित हो गई है। जैसे ही बिजली आती है, कुछ ही देर बाद फिर चली जाती है। इससे पूरी रात इंतजार में गुजरती है।”

ग्रामीण कमल सिंह राणा ने चेतावनी देते हुए कहा—

“यदि बिजली कंपनी ने लोड मैनेजमेंट के नाम पर हो रही यह मनमानी बंद नहीं की और बिजली आपूर्ति का निश्चित समय तय नहीं किया, तो ग्रामीण तहसील मुख्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।”

बिजली कंपनी ने क्या कहा?

मध्य प्रदेश मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, सारंगपुर के सहायक यंत्री विद्यासागर सिंह ने बताया कि—

“स्थानीय स्तर पर केवल परमिट के समय ही बिजली सप्लाई बंद की जाती है। रात्रि के समय ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही लोड मैनेजमेंट की कार्रवाई सिस्टम प्रबंधन एवं संचालन कार्यालय भोपाल द्वारा एनडीसीसी को दिए गए निर्देशों के अनुसार की जाती है।”

इस बयान से स्पष्ट होता है कि रात में होने वाली बिजली कटौती के निर्देश उच्च स्तर से जारी किए जा रहे हैं।

ग्रामीणों ने की बिजली आपूर्ति का समय तय करने की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिजली कटौती अपरिहार्य है तो उसका निश्चित समय पहले से घोषित किया जाए।

इससे लोग अपने घरेलू कार्य, बच्चों की पढ़ाई, किसानों के कृषि कार्य तथा अन्य आवश्यक गतिविधियों की योजना बना सकेंगे।

उन्होंने यह भी मांग की कि रात के समय लगातार बिजली काटने की बजाय दिन के समय निर्धारित अवधि में लोड मैनेजमेंट किया जाए।

जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग

क्षेत्र के लोगों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो लोगों का आक्रोश और बढ़ सकता है।

समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली कटौती की समस्या का समाधान नहीं किया गया, लोड मैनेजमेंट की व्यवस्था पारदर्शी नहीं बनाई गई और बिजली आपूर्ति का निश्चित समय घोषित नहीं किया गया, तो क्षेत्र के ग्रामीण सामूहिक रूप से बिजली कंपनी के खिलाफ आंदोलन करेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि वे पहले प्रशासन और बिजली कंपनी को ज्ञापन देंगे। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो तहसील मुख्यालय का घेराव, धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलन किया जाएगा।

लगातार हो रही बिजली कटौती ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिजली कंपनी और प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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