करौंदी गांव में 20 महिलाओं का ग्यारस उद्यापन सम्पन्न, हवन-यज्ञ, शोभायात्रा और विशाल भंडारे के साथ सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का हुआ भव्य समापन
वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठानों और भक्तिमय वातावरण के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने लिया पुण्य लाभ
संवाददाता: मनोज पुष्पद
पड़ाना। क्षेत्र के समीपस्थ ग्राम करौंदी में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का रविवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ समापन हुआ। समापन अवसर पर गांव की लगभग 20 महिलाओं द्वारा ग्यारस उद्यापन का विशेष धार्मिक आयोजन किया गया। इसके साथ ही वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार हवन-यज्ञ, पूर्णाहुति, श्रीमद्भागवत महापुराण की भव्य शोभायात्रा एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ अर्जित किया।
पूरे सप्ताह चले इस धार्मिक आयोजन ने करौंदी गांव सहित आसपास के क्षेत्रों को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। कथा स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा श्रवण करते रहे और समापन दिवस पर श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिली।
20 महिलाओं ने किया ग्यारस उद्यापन
समापन दिवस का सबसे प्रमुख आकर्षण गांव की लगभग 20 महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से किया गया ग्यारस उद्यापन रहा। महिलाओं ने पूरे विधि-विधान एवं धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए अपने व्रत का उद्यापन किया।
इस अवसर पर वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में पूजा-अर्चना, संकल्प, हवन एवं पूर्णाहुति संपन्न कराई गई। महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, समाज की खुशहाली तथा विश्व कल्याण की कामना करते हुए यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं।
गांव की महिलाओं की इस धार्मिक सहभागिता ने पूरे आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ हवन-यज्ञ
हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित हवन-यज्ञ में कथा व्यास पंडित प्रदीप नागर (लसूडिया गौरी, कालापीपल) सहित विद्वान आचार्य पंडित पियूष नागर, पंडित मुकेश व्यास, पंडित गोपाल नागर एवं पंडित राजेश नागर ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न कराया।
पूरे वातावरण में वेद मंत्रों की गूंज सुनाई दे रही थी। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं आस्था के साथ यज्ञ कुंड में आहुतियां अर्पित कर अपने परिवार एवं समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।
पूर्णाहुति के पश्चात धार्मिक अनुष्ठान विधिवत संपन्न हुए।
भव्य शोभायात्रा ने बनाया भक्तिमय माहौल
कथा समापन के अवसर पर रविवार सुबह लगभग 10 बजे श्रीमद्भागवत महापुराण की भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
शोभायात्रा कथा पंडाल से प्रारंभ होकर गांव के प्रमुख मार्गों से होती हुई हनुमान मंदिर परिसर पहुंची। शोभायात्रा में ढोल-नगाड़ों, धार्मिक ध्वजों एवं जयघोषों के बीच श्रद्धालु भक्ति में लीन दिखाई दिए।
रास्ते भर ग्रामीणों ने अपने-अपने घरों के सामने भगवान श्रीमद्भागवत महापुराण की पूजा-अर्चना की तथा पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
धार्मिक जयघोषों से पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में रंग गया।
मुख्य यजमान ने सिर पर धारण की श्रीमद्भागवत महापुराण
शोभायात्रा के दौरान कथा के मुख्य यजमान विक्रम सिंह पंवार ने अपने सिर पर श्रीमद्भागवत महापुराण धारण कर यात्रा का नेतृत्व किया।
उनके साथ कथा व्यास पंडित प्रदीप नागर, हनुमान मंदिर के महंत लक्ष्मण दास जी महाराज, हीरापुर के महंत विष्णुदास जी महाराज सहित बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भजन-कीर्तन करती हुई यात्रा में शामिल हुईं, जिससे आयोजन का धार्मिक स्वरूप और अधिक आकर्षक बन गया।
सात दिनों तक चला संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ
करौंदी गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन गांव की ग्यारस उद्यापन करने वाली महिलाओं तथा समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से किया गया।
कथा व्यास पंडित प्रदीप नागर ने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का सरल एवं प्रभावशाली शैली में वर्णन किया।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्त प्रह्लाद, ध्रुव, सुदामा, गोवर्धन पूजा, रासलीला, उद्धव संदेश तथा भगवान की भक्ति के महत्व को विस्तार से बताया।
कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का श्रवण करते रहे।
‘भक्ति से ही जीवन का वास्तविक कल्याण संभव’
कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कथा व्यास पंडित प्रदीप नागर ने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसका उद्देश्य केवल सांसारिक सुख प्राप्त करना नहीं, बल्कि ईश्वर की भक्ति के माध्यम से आत्मिक उन्नति करना भी है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में व्यक्ति अनेक प्रकार की मानसिक परेशानियों, तनाव और अशांति से घिरा हुआ है। ऐसे समय में श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक सोच और जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करती है।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से नियमित रूप से भगवान का स्मरण करने, सत्संग में भाग लेने और सदैव सत्य एवं धर्म के मार्ग पर चलने का आग्रह किया।
हवन-यज्ञ का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व बताया
पंडित प्रदीप नागर ने अपने प्रवचन में हवन-यज्ञ के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि हवन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है। यज्ञ में प्रयुक्त औषधीय सामग्री वातावरण को शुद्ध करती है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
उन्होंने कहा कि यज्ञ से व्यक्ति में आत्मविश्वास, आध्यात्मिक शक्ति और धार्मिक आस्था का विकास होता है। यज्ञ के माध्यम से मनुष्य के भीतर मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियां समाप्त होती हैं तथा सद्गुणों का विकास होता है।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार देवताओं को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम माध्यम यज्ञ है और श्रद्धा से किया गया यज्ञ मनुष्य की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है।
भागवत कथा के श्रवण का बताया महत्व
कथावाचक ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला आध्यात्मिक मार्गदर्शक है।
उन्होंने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति के भीतर भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का विकास होता है। कथा मनुष्य के विचारों को सकारात्मक बनाती है और उसके आचरण में स्वतः परिवर्तन आने लगता है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धा एवं विश्वास के साथ भागवत कथा सुनने से मनुष्य पापों से मुक्त होकर मोक्ष की ओर अग्रसर होता है।
विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
हवन-यज्ञ एवं पूर्णाहुति के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
भंडारे में गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।
भंडारे की व्यवस्था ग्रामवासियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों द्वारा अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से की गई। सभी श्रद्धालुओं को सम्मानपूर्वक प्रसादी वितरित की गई।
ग्रामीणों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन
आयोजन समिति ने बताया कि सात दिवसीय कथा एवं समापन कार्यक्रम गांव की ग्यारस उद्यापन करने वाली महिलाओं तथा समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित किया गया।
गांव के युवाओं, महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कथा पंडाल की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के बैठने की सुविधा, जलपान, शोभायात्रा एवं भंडारे के संचालन में सभी ने सक्रिय सहयोग दिया।
इन श्रद्धालुओं की रही विशेष सहभागिता
समापन समारोह एवं भंडारे में राजेश परमार, दीपेंद्र परमार, राजेश गोस्वामी, श्रवण कुमार परमार, डॉ. ओम परमार, भगवत सिंह परमार, सुरेंद्र परमार, दिनेश सेन, धर्मेंद्र परमार, वकील परमार, रघुराम परमार, बाबूलाल पटेल, सरपंच राकेश परमार, पूर्व सरपंच लक्ष्मीनारायण परमार, महेश टेलर, महेश परमार, सुनील परमार, राजेंद्र सिंह परमार, देवी सिंह भिलाला, रोशन गुप्ता, प्रेम परमार सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
धार्मिक आयोजनों से मजबूत होती है सामाजिक एकता
करौंदी गांव में आयोजित इस सात दिवसीय धार्मिक आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धार्मिक कार्यक्रम केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज को एकजुट करने, पारस्परिक सहयोग बढ़ाने और सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
गांव की महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को यादगार बना दिया। पूरे गांव में सात दिनों तक भक्ति, सेवा और सामाजिक समरसता का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
