वासुपूज्य दिगंबर जैन मंदिर में इंद्रध्वज तेरह दीप महामंडल विधान की भक्ति से गूंजा ग्वालियर, श्रद्धालुओं ने किया अभिषेक एवं ध्वजारोहण
दस दिवसीय धार्मिक आयोजन के सातवें दिन उमड़ी श्रद्धा, आज विश्वशांति महायज्ञ और कल होगा विधान का भव्य समापन
रिपोर्ट: सचिन जैन, ग्वालियर
ग्वालियर। धर्म, आस्था और आध्यात्मिक साधना का अद्भुत संगम इन दिनों ग्वालियर स्थित वासुपूज्य दिगंबर जैन मंदिर में देखने को मिल रहा है। वासुपूज्य दिगंबर जैन मंदिर कमेटी, ग्वालियर एवं दिगंबर जैन महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्री इंद्रध्वज तेरह दीप महामंडल विधान के सातवें दिन सोमवार को मंदिर परिसर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र की आराधना, अभिषेक, पूजन और ध्वजारोहण कर धर्मलाभ अर्जित किया।
दस दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में समाजजन शामिल होकर जैन धर्म की प्राचीन परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना कर रहे हैं। सातवें दिन आयोजित कार्यक्रम में भक्तों ने भगवान महावीर स्वामी एवं भगवान आदिनाथ के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हुए मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक, पूजन और भक्ति नृत्य में सहभागिता निभाई। पूरे मंदिर परिसर में “णमोकार मंत्र” और भगवान जिनेंद्र के जयघोष गूंजते रहे, जिससे वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो गया।
नंदीश्वर द्वीप की आराधना का मिला आध्यात्मिक सौभाग्य
कार्यक्रम के दौरान विधानाचार्यों के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक रूप से नंदीश्वर द्वीप में स्थित अनादि-अनंत जिनालयों की भावनात्मक यात्रा का पुण्य अर्जित किया। जैन दर्शन के अनुसार नंदीश्वर द्वीप अत्यंत पवित्र और दिव्य क्षेत्र माना जाता है, जहां देवगण भगवान तीर्थंकरों की अनवरत आराधना करते हैं।
विधान के माध्यम से श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र की स्तुति, पूजन और भक्ति कर आत्मशुद्धि तथा आत्मकल्याण की भावना से धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। विधानाचार्यों ने श्रद्धालुओं को बताया कि ऐसे धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मसंयम, सदाचार, अहिंसा और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करना भी है।
मंत्रोच्चार के बीच हुआ भगवान महावीर और आदिनाथ का भव्य अभिषेक
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि विधानाचार्य पंडित अनुभव जैन एवं पंडित अमन जैन के सान्निध्य में भगवान महावीर स्वामी एवं भगवान आदिनाथ का भव्य जलाभिषेक संपन्न हुआ।
विधिवत मंत्रोच्चार के बीच समाज के प्रमुख श्रद्धालुओं ने पीले वस्त्र धारण कर हाथों में कलश लेकर भगवान का अभिषेक किया। धार्मिक वातावरण में श्रद्धालुओं द्वारा लगाए गए जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।
अभिषेक में प्रमुख रूप से सौधर्म इंद्र महेशचंद्र जैन, कुबेर यश जैन, महायज्ञनायक देव जैन, ईशान इंद्र हरीश जैन, सनत इंद्र दिलीप जैन, महेंद्र इंद्र नेमीचंद्र जैन सहित अन्य इंद्रों ने सहभागिता निभाई।
इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष सतीशचंद्र जैन (ठेकेदार), मंत्री नेमीचंद्र जैन, सुरेंद्र जैन, राजेंद्र जैन, अभिषेक जैन, देव जैन सहित अनेक गणमान्य समाजजन उपस्थित रहे।
इंद्र-इंद्राणियों ने विधिपूर्वक किया पूजन और ध्वजारोहण
धार्मिक आयोजन का एक विशेष आकर्षण इंद्र-इंद्राणियों द्वारा किया गया पूजन और ध्वजारोहण रहा।
प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि दस दिवसीय विधान में श्रद्धालुओं ने विधानाचार्य अंकुर शास्त्री के निर्देशन में जम्बूद्वीप स्थित सुदर्शन मेरु की सोलह चैत्यालयों का पूजन तथा विजय मेरु की सोलह चैत्यालयों की पूजा भी विधिपूर्वक संपन्न की।
पूजन के उपरांत नंदीश्वर द्वीप के चैत्यालयों पर समाज के श्रद्धालुओं एवं इंद्र-इंद्राणियों द्वारा श्रद्धापूर्वक ध्वजाएं अर्पित की गईं।
जैन परंपरा में ध्वजारोहण धर्म विजय, आत्मविजय और सदाचार के प्रतीक के रूप में किया जाता है। श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए ध्वजाएं चढ़ाईं और मंगलकामनाएं कीं।
भक्ति नृत्य से भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर
पूजन के बाद इंद्र एवं इंद्राणियों ने धार्मिक भजनों पर भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया।
श्रद्धालुओं ने तालियों और जयकारों के बीच भगवान की स्तुति करते हुए धार्मिक उल्लास का प्रदर्शन किया। महिलाओं, युवाओं एवं वरिष्ठ श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।
भक्ति संगीत, मंगलाचरण और धार्मिक स्तुतियों के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत दिखाई दिया।
महामंडल विधान का धार्मिक महत्व
इंद्रध्वज तेरह दीप महामंडल विधान जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। यह विधान श्रद्धालुओं को भगवान जिनेंद्र के प्रति श्रद्धा, भक्ति और आत्मकल्याण की भावना से जोड़ता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस विधान के माध्यम से श्रद्धालु आत्मशुद्धि, पुण्य संचय और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्राप्त करते हैं। साथ ही यह आयोजन समाज में अहिंसा, संयम, सद्भावना और विश्वकल्याण का संदेश भी देता है।
विधानाचार्यों ने श्रद्धालुओं को बताया कि धर्म केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में सत्य, करुणा, क्षमा और आत्मसंयम को अपनाना ही वास्तविक धर्म है।
समाज में बढ़ रही धार्मिक आयोजनों की सहभागिता


हाल के वर्षों में जैन समाज के धार्मिक आयोजनों में युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। ग्वालियर में आयोजित इस विधान में भी बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए।
आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक परंपराओं, संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं।
इसी कारण समाज के विभिन्न परिवार पूरे दस दिनों तक नियमित रूप से विधान में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित कर रहे हैं।
आज आयोजित होगा विश्वशांति महायज्ञ
दस दिवसीय आयोजन के अंतर्गत 28 जुलाई को विशेष रूप से विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा।
प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि प्रातःकालीन पूजन के पश्चात महायज्ञ संपन्न होगा, जिसमें देश, समाज और समस्त विश्व में शांति, सद्भावना, मानव कल्याण एवं सुख-समृद्धि की मंगलकामना की जाएगी।
समाज के सभी श्रद्धालुओं से इस महायज्ञ में अधिकाधिक संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।
29 जुलाई को होगा इंद्रध्वज महामंडल विधान का समापन
आयोजन का समापन 29 जुलाई को धार्मिक अनुष्ठानों एवं विशेष पूजन के साथ होगा।
समापन दिवस पर भगवान जिनेंद्र की विशेष आराधना, पूर्णाहुति, मंगल आरती तथा धर्मसभा आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही दस दिनों से चल रहे इस भव्य धार्मिक आयोजन का विधिवत समापन होगा।
आयोजकों ने बताया कि समापन समारोह में बड़ी संख्या में समाजबंधुओं की उपस्थिति रहने की संभावना है।
धर्म, संस्कृति और समाज को जोड़ने वाला आयोजन
ग्वालियर में आयोजित श्री इंद्रध्वज तेरह दीप महामंडल विधान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को एक सूत्र में जोड़ने का माध्यम भी बन गया है। इस आयोजन के माध्यम से श्रद्धालु धर्म साधना के साथ-साथ सामाजिक समरसता, पारिवारिक एकता और आध्यात्मिक मूल्यों को भी सुदृढ़ कर रहे हैं।
आयोजन ने यह संदेश दिया कि धार्मिक परंपराएं केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज में नैतिकता, अनुशासन, सेवा, करुणा और विश्वशांति की भावना को भी मजबूत बनाती हैं।
दस दिवसीय इस विधान में प्रतिदिन बढ़ती श्रद्धालुओं की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि जैन समाज अपनी धार्मिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर सक्रिय है।
