प्रकृति संरक्षण का महाअभियान: आज मंडलेश्वर में होगा 200 आम के पौधों का विशाल वृक्षारोपण, गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की अनूठी पहल
मंडलेश्वर | दैनिक स्वराज वाणी | संवाददाता: गौतम साल्वे
पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और गौसेवा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से माँ रेवा योग सेवा समिति (गुड मॉर्निंग क्लब), मंडलेश्वर के तत्वावधान में रविवार, 26 जुलाई को ग्राम लाड़वी स्थित श्री मण्डन मिश्र गौशाला में विशाल वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम सुबह 9:00 बजे प्रारंभ होगा, जिसमें 200 आम के पौधों का रोपण किया जाएगा। इस अभियान की विशेषता यह है कि भविष्य में इन पौधों से प्राप्त होने वाले फलों की आय का उपयोग गौशाला के संचालन और उसे आत्मनिर्भर बनाने में किया जाएगा।
समिति का मानना है कि यह केवल पौधारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, गौसेवा और सामाजिक सहभागिता का एक प्रेरणादायी अभियान है। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और बड़ी संख्या में नागरिकों की भागीदारी प्रस्तावित है।
प्रकृति संरक्षण और गौसेवा का अनूठा संगम
माँ रेवा योग सेवा समिति द्वारा आयोजित यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ गौशाला के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। समिति ने वृक्षारोपण को केवल हरियाली बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे गौसेवा से जोड़ते हुए एक दीर्घकालिक योजना तैयार की है।
समिति के अनुसार लगाए जाने वाले आम के पौधे आने वाले वर्षों में फल देना शुरू करेंगे। इन फलों की बिक्री से प्राप्त आय गौशाला के रखरखाव, पशुओं के चारे, चिकित्सा व्यवस्था और अन्य आवश्यक कार्यों में उपयोग की जाएगी। इससे गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी और समाज के सहयोग से संचालित यह सेवा कार्य लंबे समय तक प्रभावी रूप से जारी रह सकेगा।
200 आम के पौधों का होगा रोपण
समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि कार्यक्रम के अंतर्गत गौशाला परिसर में लगभग 200 आम के पौधे लगाए जाएंगे। इन पौधों का चयन इस दृष्टि से किया गया है कि वे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भविष्य में आर्थिक उपयोगिता भी प्रदान करें।
उन्होंने कहा कि वृक्ष केवल ऑक्सीजन का स्रोत नहीं हैं, बल्कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने, वर्षा चक्र को मजबूत करने, भूजल स्तर बढ़ाने और जैव विविधता को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि समाज सामूहिक रूप से वृक्षारोपण को अपनाए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की दूरदर्शी योजना
समिति द्वारा शुरू की गई यह पहल सामाजिक सेवा और आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है। आम के पौधों से भविष्य में मिलने वाले फलों की आय का उपयोग गौशाला के नियमित संचालन में किया जाएगा।
समिति का कहना है कि गौशाला के संचालन के लिए समाज के सहयोग के साथ-साथ स्थायी आय के स्रोत भी आवश्यक हैं। इसी उद्देश्य से फलदार पौधों का चयन किया गया है ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता का लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सके।
यह मॉडल अन्य सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकता है कि वे पौधारोपण को केवल औपचारिक कार्यक्रम न मानकर दीर्घकालिक सामाजिक उपयोग से जोड़ें।
प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि होंगे शामिल
इस कार्यक्रम में जिले के कई प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
मुख्य अतिथियों में—
- प्रभारी कलेक्टर रेखा राठौड़
- खरगोन पुलिस अधीक्षक रविंद्र वर्मा
- महेश्वर विधायक राजकुमार मेव
- नगर परिषद मंडलेश्वर के अध्यक्ष विश्वदीप संतोष मोयदे
- ग्राम लाड़वी के सरपंच रतनसिंह रंधावा
उपस्थित रहेंगे।
समिति के पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों को आमंत्रित कर कार्यक्रम में सहभागिता का अनुरोध किया है। उनकी उपस्थिति से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता को और अधिक बल मिलने की उम्मीद है।
नागरिकों से परिवार सहित शामिल होने की अपील
माँ रेवा योग सेवा समिति ने नगर एवं आसपास के क्षेत्र के सभी नागरिकों से परिवार सहित कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की है। समिति का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामाजिक दायित्व है।
समिति ने विशेष रूप से युवाओं, विद्यार्थियों, महिलाओं और सामाजिक संगठनों से आग्रह किया है कि वे पौधारोपण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल का संकल्प लें।
प्रियजनों की स्मृति में पौधा लगाने का अनूठा संदेश
कार्यक्रम की सबसे विशेष पहल यह है कि समिति ने नागरिकों से अपने दिवंगत अथवा पूजनीय परिजनों की स्मृति में एक पौधा लगाने का आग्रह किया है।
समिति का मानना है कि किसी प्रियजन की याद में लगाया गया पौधा केवल श्रद्धांजलि नहीं होता, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन, हरियाली और प्रकृति संरक्षण का प्रतीक बन जाता है।
यह पहल समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति भावनात्मक जुड़ाव भी बढ़ाएगी और अधिक लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करेगी।
पर्यावरण संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और तेजी से घटते हरित क्षेत्र के बीच वृक्षारोपण सबसे प्रभावी उपायों में से एक है।
वृक्ष वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। साथ ही वे तापमान नियंत्रित रखने, वर्षा चक्र को संतुलित करने, मिट्टी के कटाव को रोकने और जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसी कारण सरकार, सामाजिक संगठन और स्वयंसेवी संस्थाएं लगातार अधिक से अधिक पौधारोपण के लिए लोगों को प्रेरित कर रही हैं।
सामूहिक सहभागिता से सफल होगा अभियान
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी पर्यावरणीय अभियान की सफलता तभी संभव है जब उसमें समाज की व्यापक भागीदारी हो। केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण और नियमित देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है।
समिति ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी नागरिकों से पौधारोपण के बाद पौधों की सुरक्षा और सिंचाई की जिम्मेदारी निभाने का भी आग्रह किया है।
हरित भविष्य की ओर बढ़ता मंडलेश्वर
मंडलेश्वर और आसपास के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से पर्यावरण संरक्षण को लेकर जनजागरूकता बढ़ी है। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और स्वयंसेवी संस्थाएं समय-समय पर पौधारोपण अभियान आयोजित कर रही हैं।
माँ रेवा योग सेवा समिति का यह अभियान भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसमें पर्यावरण संरक्षण, गौसेवा और आत्मनिर्भरता जैसे तीन महत्वपूर्ण उद्देश्यों को एक साथ जोड़कर समाज के सामने एक प्रेरणादायी मॉडल प्रस्तुत किया गया है।
प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का प्रयास
समिति का उद्देश्य केवल एक दिन का वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है, बल्कि लोगों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।
आयोजकों का कहना है कि यदि प्रत्येक परिवार हर वर्ष कम से कम एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र की हरियाली कई गुना बढ़ सकती है। इससे न केवल पर्यावरण सुरक्षित होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी स्वच्छ हवा, शुद्ध वातावरण और बेहतर जीवन मिलेगा।
रविवार को आयोजित होने वाला यह विशाल वृक्षारोपण कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सेवा और गौसेवा के समन्वय का एक प्रेरक उदाहरण बनने जा रहा है। समिति को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में नागरिक इसमें भाग लेकर प्रकृति संरक्षण के इस महाअभियान को सफल बनाएंगे और हरित, स्वच्छ एवं समृद्ध भविष्य के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
