Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की खबर मिलते ही जंतर-मंतर पर जश्न, छात्रों बोले- ‘यह सिर्फ शुरुआत है’
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की खबर सामने आते ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई। छात्रों ने एक-दूसरे को बधाई दी, नारे लगाए और नाच-गाकर अपनी खुशी का इजहार किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह उनकी एकजुटता और लंबे संघर्ष की बड़ी जीत है।
‘सरकार ने जवाबदेही तय की’
छात्रों का कहना है कि सरकार ने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेकर जवाबदेही तय की है। उनके अनुसार, यह आंदोलन का पहला बड़ा पड़ाव है, लेकिन अभी कई अहम मांगें पूरी होना बाकी हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब सरकार उनकी तीनों प्रमुख मांगों को पूरी तरह लागू कर देगी, तब वे अपना आंदोलन समाप्त कर अपने घर लौट जाएंगे।
‘यह सिर्फ शुरुआत है’
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इस बात का संकेत है कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई आवाज सुनी जा सकती है। उनका कहना है कि यदि भविष्य में किसी भी मुद्दे पर सरकार से जवाबदेही की जरूरत होगी, तो छात्र फिर इसी तरह एकजुट होकर अपनी बात रखेंगे।
छात्रों ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, ईंधन की गुणवत्ता और बढ़ती कीमतों, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी सरकार को जवाब देना होगा। उनका कहना है कि लोकतंत्र में जनता को सवाल पूछने का अधिकार है और वे आगे भी इसका उपयोग करेंगे।
‘सिर्फ घोषणा नहीं, जमीन पर काम चाहिए’
जब छात्रों से पूछा गया कि क्या अब आंदोलन खत्म हो जाएगा, तो उन्होंने कहा कि उनकी तीनों मांगों पर सरकार ने सहमति जताई है, लेकिन दो मांगों पर अभी केवल घोषणा हुई है।
छात्रों का कहना है कि NEET विवाद से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों को मुआवजा दिया जाना चाहिए और परीक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार लागू किए जाने चाहिए। उनका कहना है कि जब तक ये फैसले धरातल पर नहीं उतरते, तब तक आंदोलन की भावना पूरी नहीं मानी जाएगी।
‘अब विश्वास हुआ कि हमारी आवाज सुनी जा सकती है’
जंतर-मंतर पर मौजूद कई छात्रों ने कहा कि इस आंदोलन ने उन्हें यह भरोसा दिलाया है कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई आवाज बदलाव ला सकती है। छात्रों का कहना है कि लंबे समय तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन और एकजुटता के बाद उनकी मांगों को गंभीरता से सुना गया, जिससे उनका लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत हुआ है।
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा या एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग का प्रतीक बन गया है। उनका मानना है कि यदि युवा संगठित होकर संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत अपनी बात रखते हैं, तो सरकार तक उनकी आवाज पहुंच सकती है और सकारात्मक बदलाव संभव है।
छात्रों ने कहा कि भविष्य में भी यदि किसी जनहित के मुद्दे पर सवाल उठाने की आवश्यकता पड़ी, तो वे पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि शिक्षा, रोजगार, महिला सुरक्षा, महंगाई और अन्य सार्वजनिक मुद्दों पर भी युवाओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों का शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखना उनका अधिकार है, और वे आगे भी जिम्मेदारी के साथ अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
सोनम वांगचुक का जताया आभार
प्रदर्शनकारी छात्रों ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने आंदोलन के शुरुआती दिनों से ही छात्रों का समर्थन किया और उनकी मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया। छात्रों का कहना है कि वांगचुक के समर्थन ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि उनकी आवाज देशभर तक पहुंच सकती है और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जा सकता है।
छात्रों के अनुसार, सोनम वांगचुक का संघर्ष और आंदोलन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बनी। उनका कहना है कि जब एक प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता और नवोन्मेषक छात्रों के अधिकारों के लिए खुलकर सामने आए, तो इससे देशभर के युवाओं में भी आंदोलन से जुड़ने का उत्साह बढ़ा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह आंदोलन केवल NEET परीक्षा या एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की व्यापक मांग का प्रतीक बन चुका है। छात्रों ने उम्मीद जताई कि सरकार भविष्य में परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय और छात्र हितैषी बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।
