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दिल्ली पुलिस का दावा: FRS से जंतर-मंतर प्रदर्शन में 2,500 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान, CJP ने दिया पलटवार

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Published On: 25 July 2026
Delhi Police personnel monitor crowds at the Jantar Mantar protest using Facial Recognition System (FRS) cameras, as demonstrations over the alleged NEET paper leak continue in New Delhi
— Delhi Police personnel monitor crowds at the Jantar Mantar protest using Facial Recognition System (FRS) cameras, as demonstrations over the alleged NEET paper leak continue in New Delhi

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दिल्ली पुलिस का दावा: FRS से जंतर-मंतर प्रदर्शन में 2,500 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान, CJP ने दिया पलटवार

नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच दिल्ली पुलिस ने बड़ा दावा किया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन स्थल पर फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) की मदद से अब तक 2,500 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस के अनुसार, इनमें से कई लोग प्रदर्शन की भीड़ का फायदा उठाकर कानून-व्यवस्था प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे।

वहीं, इस दावे पर आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि यदि पुलिस संदिग्ध लोगों की सूची जारी करती है, तो उनकी पार्टी भी उन पुलिसकर्मियों की सूची सार्वजनिक करेगी जिन पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज करने का आरोप है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन लगातार जारी है और राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक कड़ी कर दी गई है।

जंतर-मंतर पर जारी है आंदोलन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से छात्र और विभिन्न संगठनों के लोग NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। सप्ताहांत में प्रदर्शन और अधिक व्यापक होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन पहले ही अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू कर चुका है।

FRS से 2,500 से अधिक लोगों की पहचान का दावा

दिल्ली पुलिस के अनुसार प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास Facial Recognition System (FRS) तैनात किया गया है। पुलिस का कहना है कि इस तकनीक के माध्यम से अब तक 2,500 से अधिक ऐसे व्यक्तियों की पहचान की गई है जिनका पहले से आपराधिक इतिहास दर्ज है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार इन लोगों की पहचान पुलिस के उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर की गई है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ लोग प्रदर्शन की भीड़ का फायदा उठाकर सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे थे।

हालांकि पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पहचाने गए सभी व्यक्तियों के खिलाफ वर्तमान प्रदर्शन से संबंधित कोई नया मामला दर्ज किया गया है या नहीं।

अब तक 15 एफआईआर दर्ज

दिल्ली पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान हुई विभिन्न घटनाओं के संबंध में अब तक 15 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।

पुलिस का कहना है कि दर्ज मामलों की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

क्या है Facial Recognition System (FRS)?

Facial Recognition System (FRS) एक आधुनिक डिजिटल तकनीक है, जिसकी मदद से कैमरे में कैद किसी व्यक्ति के चेहरे का मिलान पहले से उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड से किया जाता है।

पुलिस के अनुसार यह प्रणाली—

  • हाई-रेजोल्यूशन कैमरों की सहायता से चेहरों की पहचान करती है।
  • कुछ ही सेकंड में चेहरे का मिलान पुलिस डेटाबेस से करती है।
  • यदि कोई वांछित, फरार या रिकॉर्डेड आरोपी मिलता है तो संबंधित पुलिस इकाई को तत्काल सूचना भेजी जाती है।
  • सुरक्षा एजेंसियों को भीड़ में मौजूद संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने में सहायता मिलती है।

पुलिस का कहना है कि यह तकनीक सामान्य प्रदर्शनकारियों की निगरानी के लिए नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और वांछित अपराधियों की पहचान के उद्देश्य से उपयोग की जाती है।

चार स्थानों पर लगाए गए FRS यूनिट

पुलिस सूत्रों के अनुसार जंतर-मंतर क्षेत्र के प्रमुख प्रवेश और निकास मार्गों पर चार FRS यूनिट स्थापित की गई हैं।

ये सभी यूनिट दिल्ली पुलिस के केंद्रीय डेटाबेस से जुड़ी हुई हैं। नियंत्रण कक्ष में तैनात अधिकारी लगातार इन कैमरों से प्राप्त सूचनाओं की निगरानी कर रहे हैं।

यदि किसी ऐसे व्यक्ति की पहचान होती है जिसका रिकॉर्ड पहले से पुलिस के पास उपलब्ध है, तो संबंधित पुलिस टीम को तुरंत सूचना भेजी जाती है ताकि आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके।

पुलिस का दावा—रोकथाम और जांच दोनों में मदद

दिल्ली पुलिस का कहना है कि FRS केवल अपराधियों की पहचान करने का उपकरण नहीं है, बल्कि यह अपराध की रोकथाम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अधिकारियों के अनुसार इस तकनीक से—

  • भीड़ में छिपे वांछित आरोपियों की पहचान आसान होती है।
  • आदतन अपराधियों पर नजर रखी जा सकती है।
  • कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की संभावनाओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है।
  • जांच एजेंसियों को घटनाओं के विश्लेषण में सहायता मिलती है।

पुलिस का कहना है कि तकनीक का उद्देश्य आम नागरिकों या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को परेशान करना नहीं है।

CJP का पलटवार

दिल्ली पुलिस के दावों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है।

पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि पुलिस आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की सूची सार्वजनिक करती है, तो उनकी पार्टी भी उन पुलिसकर्मियों की सूची जारी करेगी जिन पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर बल प्रयोग करने का आरोप है।

उन्होंने कहा कि जनता भी ऐसे पुलिसकर्मियों की पहचान करेगी जिन पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसक कार्रवाई करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

हालांकि इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं आई है।

सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी

प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर तथा आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी है।

अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई है। संवेदनशील स्थानों पर लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

पुलिस का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी नागरिकों का अधिकार है, लेकिन हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या कानून-व्यवस्था भंग करने के किसी भी प्रयास पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी इस्तेमाल हो चुकी है यह तकनीक

दिल्ली पुलिस के अनुसार Facial Recognition System का उपयोग पहली बार नहीं किया जा रहा है।

इससे पहले भी राजधानी में आयोजित बड़े आयोजनों और संवेदनशील अवसरों पर यह तकनीक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा रही है। इनमें प्रमुख रूप से—

  • गणतंत्र दिवस समारोह
  • स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम
  • होली
  • दिवाली
  • ईद
  • रामलीला
  • अन्य बड़े सार्वजनिक आयोजन

शामिल हैं।

पुलिस का कहना है कि बड़े आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और वांछित अपराधियों की पहचान के लिए यह प्रणाली प्रभावी साबित हुई है।

आंदोलन और सुरक्षा के बीच संतुलन की चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े सार्वजनिक आंदोलनों के दौरान प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती होती है। एक ओर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करना आवश्यक होता है, वहीं दूसरी ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी होती है।

ऐसे में आधुनिक तकनीकों का उपयोग सुरक्षा एजेंसियों की क्षमता बढ़ाता है, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है।

फिलहाल क्या है स्थिति?

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, जबकि प्रदर्शनकारी संगठन अपनी मांगों पर कायम हैं।

इस बीच FRS को लेकर सामने आए पुलिस के दावों और CJP की प्रतिक्रिया ने आंदोलन को नया राजनीतिक और प्रशासनिक आयाम दे दिया है। आने वाले दिनों में जांच, सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शन की दिशा पर सभी की नजर बनी रहेगी।

 

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