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Ujjain News: देवशयनी एकादशी पर वैष्णव तिलक से सजे बाबा महाकाल, बेलपत्र और मखाने की माला से हुआ दिव्य श्रृंगार

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Published On: 25 July 2026
Ujjain
— देवशयनी एकादशी पर दिव्य रूप में दर्शन दिए बाबा महाकाल

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Ujjain News: देवशयनी एकादशी पर वैष्णव तिलक से सजे बाबा महाकाल, बेलपत्र और मखाने की माला से हुआ दिव्य श्रृंगार

Ujjain News: आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर शनिवार सुबह उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के सुबह हुई भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष वैष्णव तिलक से श्रृंगार किया गया। भगवान को बेलपत्र और मखाने की माला अर्पित की गई, जिससे उनका दिव्य स्वरूप भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। भस्म आरती में शामिल होने के लिए हजारों श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर अपने आराध्य के दर्शन का इंतजार करते रहे।

सुबह चार बजे खुले बाबा महाकाल के पट

देवशयनी एकादशी पर भगवान महाकाल के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। शनिवार सुबह निर्धारित समय पर करीब 4 बजे मंदिर के पट खोले गए। मंदिर की परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र भगवान से आज्ञा ली गई, जिसके बाद गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया गया।

इसके बाद भगवान महाकाल का पवित्र जलाभिषेक संपन्न हुआ। अभिषेक में जल, दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस का उपयोग किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच प्रथम घंटा बजाकर ‘हरि ओम’ का जल अर्पित किया गया। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।

वैष्णव तिलक और विशेष श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन

Ujjain भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों ने भगवान को नवीन मुकुट धारण कराया और आकर्षक फूलों से सजाया। इस अवसर की सबसे खास बात यह रही कि भगवान महाकाल का वैष्णव तिलक से श्रृंगार किया गया, जो देवशयनी एकादशी के धार्मिक महत्व को दर्शाता है।

श्रृंगार में भगवान को बेलपत्र और मखाने की सुंदर माला पहनाई गई। जैसे ही बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप भक्तों के सामने आया, पूरा मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर बाबा के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की।

Ujjain भस्म आरती का हुआ भव्य आयोजन

Ujjain महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, पूजन-अर्चन और विशेष श्रृंगार के बाद कपूर आरती की गई। इसके पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के ज्योतिर्लिंग पर परंपरा अनुसार पवित्र भस्म अर्पित की गई।

भस्म अर्पण के दौरान मंदिर में झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की गूंज से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। भस्म आरती के दिव्य दर्शन करने के लिए देशभर से आए श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक क्षण का लाभ उठाया।

देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। यह आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार माह बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी, जिसे देवोत्थानी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है, उस दिन जागते हैं।

देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है। यह चार महीने का धार्मिक काल अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दौरान साधु-संत एक स्थान पर रहकर तप, जप और साधना करते हैं। श्रद्धालु भी व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना करते हैं।

पुराणों के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु राजा बलि के लोक में निवास करते हैं और देवोत्थानी एकादशी पर पुनः देवलोक लौटते हैं। इसी कारण इस दिन का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

चातुर्मास में नहीं होते मांगलिक कार्य

देवशयनी एकादशी से शुरू होने वाले चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत संस्कार, प्रतिष्ठा, दीक्षा, यज्ञ और अन्य शुभ एवं मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में पूजा-पाठ, दान-पुण्य, जप और तप को विशेष महत्व दिया जाता है।

Ujjain महाकाल मंदिर की आरती का समय

Ujjain महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक आरतियों के समय में बदलाव किया गया है। वर्तमान में आरतियों का समय इस प्रकार है—

  • भस्म आरती: सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे तक
  • दद्योदक आरती: सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
  • भोग आरती: सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक
  • संध्या पूजन: शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक
  • संध्या आरती: शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
  • शयन आरती: रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक

देवशयनी एकादशी के अवसर पर बाबा महाकाल के दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती के दर्शन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया। वैष्णव तिलक, बेलपत्र और मखाने की माला से सजे बाबा महाकाल के अलौकिक स्वरूप ने भक्तों के मन में श्रद्धा और भक्ति का संचार किया। मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण रही कि महाकाल के प्रति आस्था आज भी करोड़ों लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा है।

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