स्थानांतरण आदेश के बाद भी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं कर्मचारी, विभागीय सख्ती पर उठे सवाल
संवाददाता : राहुल जैन
कार्यमुक्ति आदेश जारी होने के बावजूद कई शिक्षक मूल पदस्थापना पर लौटने से कतरा रहे, वेतन रोकने की चेतावनी भी बेअसर
Ashoknagar। जिला शिक्षा विभाग में जारी एक प्रशासनिक आदेश इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय अशोकनगर द्वारा जारी कार्यमुक्ति आदेश के बाद भी कुछ शिक्षक और कर्मचारी अपनी वर्तमान पदस्थापना वाली जगहों को छोड़कर मूल संस्थाओं में जाने के लिए तैयार नहीं हैं। विभागीय निर्देशों की अनदेखी को लेकर अब शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और आदेशों के पालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा 14 जुलाई 2026 को जारी आदेश क्रमांक/स्था./2026/3397 के तहत जिले के 11 शिक्षकों और प्राचार्यों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर उनकी मूल पदस्थापना वाली संस्थाओं में वापस भेजने के निर्देश दिए गए थे। यह आदेश कार्यालय संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संभाग ग्वालियर के निर्देशों के आधार पर जारी किया गया था।
संयुक्त संचालक के निर्देश पर जारी हुआ था आदेश
जानकारी के अनुसार लोक शिक्षण संभाग ग्वालियर कार्यालय द्वारा जिले में लंबे समय से आसंजित, अस्थाई रूप से या अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में संलग्न शिक्षकों और कर्मचारियों की समीक्षा की गई थी। इसके बाद निर्देश दिए गए थे कि ऐसे सभी कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना वाली संस्थाओं में भेजा जाए, ताकि विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
इसी क्रम में जिला शिक्षा अधिकारी अशोकनगर ने 11 लोकसेवकों को कार्यमुक्त करने का आदेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि संबंधित कर्मचारी तत्काल प्रभाव से अपनी मूल संस्था में कार्यभार ग्रहण करें।
वेतन रोकने की चेतावनी भी दी गई
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश में कर्मचारियों को चेतावनी दी गई थी कि यदि वे निर्देशों का पालन नहीं करते हैं और अपनी मूल संस्था में कार्यभार ग्रहण नहीं करते हैं तो जुलाई 2026 का वेतन आहरित नहीं किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारी की होगी।
इसके बावजूद आदेश जारी होने के कई दिन बाद भी कुछ कर्मचारियों द्वारा वर्तमान स्थान नहीं छोड़े जाने की बात सामने आ रही है। इससे विभागीय अनुशासन और प्रशासनिक आदेशों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
सुविधाजनक स्थानों पर लंबे समय से जमे कर्मचारियों पर सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि कई शिक्षक लंबे समय से जिला मुख्यालय या अन्य प्रशासनिक कार्यालयों में अटैच होकर सेवाएं दे रहे हैं। इनमें कुछ कर्मचारी तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, निर्वाचन कार्यालय या अन्य सुविधाजनक स्थानों पर कार्यरत बताए जा रहे हैं।
शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि जहां एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर कुछ शिक्षक अपनी मूल शैक्षणिक संस्थाओं के बजाय अन्य कार्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं।
इस स्थिति से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावक भी मांग करते रहे हैं कि शिक्षकों को विद्यालयों में नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाए।
आदेश पालन में ढिलाई पर उठ रहे सवाल
विभागीय आदेश जारी होने के बावजूद यदि कर्मचारी कार्यमुक्त नहीं होते हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर स्थिति मानी जा रही है। सवाल उठ रहा है कि जब आदेश उच्च अधिकारी यानी संयुक्त संचालक स्तर से जारी निर्देशों के आधार पर हुआ है, तो उसके पालन में देरी क्यों हो रही है।
शिक्षा विभाग में चर्चा है कि यदि समय पर आदेशों का पालन नहीं कराया गया तो भविष्य में अन्य कर्मचारी भी प्रशासनिक निर्देशों को गंभीरता से नहीं लेंगे।
राजनीतिक दबाव की चर्चाएं भी तेज
इस पूरे मामले में राजनीतिक दबाव की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार कुछ प्रभावित कर्मचारी आदेश में राहत पाने के प्रयास कर रहे हैं।
चर्चा है कि कुछ कर्मचारी स्थानीय स्तर पर नेताओं और जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर आदेश को रुकवाने या संशोधित कराने की कोशिश कर रहे हैं।
यदि ऐसा होता है तो प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। विभागीय अधिकारियों के सामने अब यह चुनौती है कि वे नियमों के अनुसार आदेश का पालन सुनिश्चित कराएं।
ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी चुनौती
शिक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ी समस्या ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को लेकर सामने आती रही है। कई बार यह शिकायतें सामने आती हैं कि शिक्षक मूल विद्यालयों में नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते, जबकि विद्यार्थियों की संख्या लगातार बनी रहती है।
विभाग का उद्देश्य यही बताया जा रहा है कि सभी शिक्षकों को उनकी मूल पदस्थापना वाली जगहों पर भेजकर विद्यालयों की व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
यदि सभी कर्मचारी मूल संस्थाओं में पहुंचते हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
अब विभाग की अगली कार्रवाई पर नजर
फिलहाल सभी की नजर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग अपने ही आदेश को सख्ती से लागू कर पाएगा और क्या आदेश का पालन नहीं करने वाले कर्मचारियों पर वेतन रोकने जैसी कार्रवाई होगी।
यदि विभाग अपने निर्देशों पर कायम रहता है तो यह प्रशासनिक अनुशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश होगा। वहीं यदि आदेश केवल कागजों तक सीमित रह जाता है तो इससे विभागीय व्यवस्था पर सवाल और गहरे हो सकते हैं।
अब देखना होगा कि अशोकनगर शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या लंबे समय से चली आ रही अटैच व्यवस्था में वास्तविक बदलाव हो पाता है या नहीं।
