भारत नगर जैन संघ में साध्वी सुव्रतयशाश्रीजी म.सा. का ऐतिहासिक चातुर्मास मंगल प्रवेश,
गाजे-बाजे, जयकारों और भक्ति संगीत के बीच हुआ भव्य स्वागत, संगीतकार प्रदीप भाई जोशी ने बांधा समां
मुंबई। महाराष्ट्र की मायानगरी मुंबई स्थित भारत नगर जैन संघ में परम पूज्य साध्वीश्री सुव्रतयशाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा का ऐतिहासिक चातुर्मास मंगल प्रवेश श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। चातुर्मास मंगल प्रवेश के इस पावन अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में गुरुभक्त एवं जैन समाज के श्रद्धालु भारत नगर पहुंचे और धर्म लाभ प्राप्त किया।
परम पूज्य गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद् विजय जयानंद सूरीश्वरजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती एवं परम पूज्य साध्वी मणीप्रभा प्रभाश्रीजी म.सा. की सुशिष्या साध्वीश्री सुव्रतयशाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा का मंगल प्रवेश गाजते-बाजते, जयकारों और भक्तिमय वातावरण के बीच हुआ। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और आस्था के साथ साध्वीवृंद का स्वागत किया।
भव्य शोभायात्रा और भक्तिमय माहौल
मंगल प्रवेश के दौरान भारत नगर जैन संघ का वातावरण पूरी तरह धर्ममय नजर आया। श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ साध्वीश्री का अभिनंदन किया। जगह-जगह स्वागत और भक्ति भाव से गुरुवंदना की गई। महिला, पुरुष और युवाओं ने बड़ी संख्या में शामिल होकर इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बना दिया।
चातुर्मास मंगल प्रवेश कार्यक्रम में प्रसिद्ध संगीतकार प्रदीप भाई जोशी ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने एक से बढ़कर एक धार्मिक एवं भक्ति गीतों की प्रस्तुति देकर पूरे आयोजन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया।

जिनवाणी से ही संभव है आत्मा का कल्याण : साध्वी सुव्रतयशाश्रीजी
धर्मसभा को संबोधित करते हुए परम पूज्य साध्वीश्री सुव्रतयशाश्रीजी म.सा. ने कहा कि जिनवाणी के मार्ग पर चलकर ही आत्मा का कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास आत्मचिंतन, साधना, त्याग और धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर होता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे नियमित रूप से धर्म से जुड़े रहें और अपने जीवन में भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपनाएं। साध्वीश्री ने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को श्रेष्ठ बनाने और आत्मा की उन्नति का मार्ग दिखाता है।

त्रिस्तुतिक जैन संघ के पहले IPS अधिकारी पक्षाल भाई जैन का सम्मान
इस अवसर पर त्रिस्तुतिक जैन संघ के पहले IPS अधिकारी पक्षाल भाई जैन भी भारत नगर जैन संघ के चातुर्मास मंगल प्रवेश कार्यक्रम में पहुंचे। भारत नगर जैन संघ द्वारा उनका हार्दिक बहुमान किया गया।
पक्षाल भाई जैन ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा वर्ग को धर्म और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने युवाओं से प्रशासनिक सेवाओं में आने की प्रेरणा देते हुए कहा कि शासन व्यवस्था में पहुंचकर समाज और धर्म की प्रभावना को बढ़ाने का अवसर मिलता है।
साध्वीश्री सुव्रतयशाश्रीजी म.सा. ने कहा कि समाज और शासन दोनों के लिए यह गौरव की बात है कि पक्षाल भाई जैन जैसे प्रतिभाशाली व्यक्ति समाज का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे युवाओं का उत्साहवर्धन और अनुमोदना करना समाज का कर्तव्य है।

देशभर से पहुंचे गुरुभक्त
चातुर्मास मंगल प्रवेश कार्यक्रम में मुंबई सहित देश के विभिन्न शहरों और क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल हुए। आहोर, बागोड़ा, गुड़ामालानी, सुराणा, पांथेडी, धुम्बडिया, मोरसीम, कोरा, भीनमाल, बैंगलोर, रानीवाड़ा, विजयवाड़ा, गुंटूर, मद्रास, मदुराई, हैदराबाद, अहमदाबाद, सूरत, भायखला, लालबाग, ताड़देव, मलाड, मुंबई सेंट्रल सहित अनेक स्थानों से जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।
श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने इस आयोजन को भव्य और ऐतिहासिक बना दिया। सभी ने साध्वीश्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और चातुर्मास के दौरान धर्म आराधना का संकल्प लिया।
भारत नगर जैन संघ पदाधिकारियों ने की व्यवस्थाएं
मंगल प्रवेश कार्यक्रम को सफल बनाने में भारत नगर जैन सकल संघ, ट्रस्ट मंडल और समाज के अनेक कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम में हिरांचदजी सालेचा, बाबूलालजी वाणीगोता बागोड़ा, रवजी, अशोकजी रांका, नेमीचंदजी बाफना, रणमलजी वाणीगोता, मुकेश भाई वर्धन, रमेशजी हुण्डिया, मुकेश भाई कावेडी, मुलचंदजी कावेडी सहित अनेक समाजबंधु उपस्थित रहे।
इसके अलावा सुराणा, बागोड़ा और अन्य क्षेत्रों से आए समाजजनों ने भी आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाई।

धर्म और समाज सेवा का संदेश
चातुर्मास मंगल प्रवेश के इस अवसर ने श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा और संस्कारों से जुड़ने का संदेश दिया। साध्वीश्री के प्रवचनों ने उपस्थित लोगों को आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित किया।
भारत नगर जैन संघ में आयोजित यह मंगल प्रवेश समारोह लंबे समय तक श्रद्धालुओं के लिए स्मरणीय रहेगा। भक्ति, अनुशासन और सामाजिक एकता के इस आयोजन ने जैन समाज की धार्मिक परंपराओं और संस्कारों को और मजबूत किया।
