CJP Protest: जंतर-मंतर आंदोलन के बीच बीमार पड़े CJP प्रमुख अभिजीत दीपके, बोले- ‘तेज बुखार है, पेनकिलर के सहारे लड़ाई जारी है’
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन लगातार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले चल रहे इस विरोध प्रदर्शन ने अब दिल्ली की सीमाओं को पार करते हुए देश के कई बड़े शहरों तक अपनी पहुंच बना ली है। मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता सहित विभिन्न राज्यों में छात्र और युवा शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक, बेरोजगारी तथा युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
इसी बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रहे CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई है। उन्होंने बताया कि उन्हें पिछले कुछ दिनों से तेज बुखार और पूरे शरीर में दर्द की शिकायत है। इसके बावजूद वे दर्द निवारक दवाइयों के सहारे आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं और जल्द स्वस्थ होकर फिर से धरना स्थल पर लौटने की बात कही है।
जंतर-मंतर से देशभर तक पहुंचा छात्र आंदोलन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर का स्वरूप लेता दिखाई दे रहा है। आंदोलन में शामिल छात्र विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक की घटनाओं, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल किसी एक परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है। यही कारण है कि विभिन्न राज्यों के छात्र संगठन भी इस आंदोलन से जुड़ते जा रहे हैं।
अभिजीत दीपके की बिगड़ी तबीयत
आंदोलन के बीच CJP प्रमुख अभिजीत दीपके की तबीयत खराब होने की जानकारी सामने आई। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से समर्थकों को संबोधित करते हुए बताया कि उन्हें तेज बुखार और पूरे शरीर में दर्द है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण उन्हें कुछ घंटों के लिए आराम करना पड़ेगा, लेकिन आंदोलन से उनका संकल्प कमजोर नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेनकिलर दवाइयों की मदद से वे आंदोलन की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं और आराम के बाद पुनः धरना स्थल पर पहुंचेंगे।
दीपके ने अपने संदेश में समर्थकों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि आंदोलन पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा।
इंटरनेट सेवा प्रभावित होने का आरोप
CJP की ओर से यह भी दावा किया गया कि जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे आंदोलन से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचाने और समर्थकों से संपर्क बनाए रखने में कठिनाई हो रही है।
हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इंटरनेट सेवा प्रभावित होने के दावों को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक बना मुख्य मुद्दा
आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई की मांग है।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है। वर्षों तक कठिन मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा रद्द होने, नई तिथियों की घोषणा और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
इसके साथ ही बेरोजगारी, रिक्त पदों पर समय पर भर्ती न होने और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू करने की मांग भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बनी हुई है।
‘चलो संसद’ मार्च के दौरान बढ़ा तनाव
20 जुलाई को आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी। हजारों प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने लगे, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने का प्रयास किया।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया।
इस घटना में कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर सामने आई, जबकि कुछ पुलिसकर्मियों के भी चोटिल होने की जानकारी मिली।
बारिश और मुश्किलों के बावजूद जारी धरना
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बारिश, प्रशासनिक कार्रवाई और अन्य चुनौतियों के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा।
धरना स्थल पर मौजूद छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे। उनका दावा है कि यह संघर्ष केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए नहीं बल्कि आने वाले युवाओं के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।
सोनम वांगचुक को लेकर भी चर्चा
आंदोलन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का नाम भी चर्चा में बना हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार वे अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं।
प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित विभिन्न मांगों को लेकर दबाव बनाए रखने की बात कही जा रही है।
CJP का दावा- आंदोलन अनिश्चितकाल तक चलेगा
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट कहा कि यह आंदोलन किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है।
उनका कहना है कि यह देश के युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार की लड़ाई है। जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील भी की।
विपक्ष ने दिया समर्थन
इस आंदोलन को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस सहित INDIA गठबंधन के कई नेताओं ने संसद में NEET, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाया। विपक्षी सांसदों ने विरोध स्वरूप काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया और शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग दोहराई।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
संसद में भी गूंजा छात्र आंदोलन
मानसून सत्र के दौरान संसद परिसर में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल देखने को मिली।
सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने स्तर पर प्रदर्शन किए। संसद के भीतर भी इस विषय पर चर्चा की मांग उठी, हालांकि चर्चा किस नियम के तहत होगी और कितनी अवधि तक चलेगी, इस पर सहमति बनने में समय लगा।
संसदीय कार्य मंत्री ने लोकसभा और राज्यसभा में कहा कि सरकार इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और अंतिम निर्णय बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में लिया जाएगा।
एनडीए ने भी किया पलटवार
जहां विपक्ष सरकार को शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के मुद्दे पर घेर रहा है, वहीं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने भी संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।
एनडीए नेताओं ने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया और कहा कि युवाओं के मुद्दों पर राजनीति नहीं बल्कि समाधान की दिशा में काम होना चाहिए।
छात्रों की प्रमुख मांगें
आंदोलन में शामिल छात्र कई प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनमें शामिल हैं—
- पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच।
- दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई।
- भर्ती परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता।
- रिक्त सरकारी पदों पर जल्द नियुक्तियां।
- परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार।
- युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की नीति।
- शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल आंदोलन लगातार जारी है और सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
छात्र संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। वहीं राजनीतिक दल भी इस मुद्दे को लेकर लगातार सक्रिय हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह विषय राष्ट्रीय राजनीति और संसद दोनों में चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।
निष्कर्ष
जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर का स्वरूप ले चुका है। एक ओर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके खराब स्वास्थ्य के बावजूद प्रदर्शन जारी रखने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर देशभर के छात्र शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार, विपक्ष और छात्र संगठनों के बीच होने वाली गतिविधियां इस आंदोलन की दिशा और प्रभाव को तय करेंगी।
