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ब्राइट स्टार अकैडमी में पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी के प्रेरक प्रवचन: बच्चों को भारतीय संस्कृति अपनाने और जंक फूड से दूर रहने का दिया संदेश

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Published On: 22 July 2026
Jain Sadhvi Dr. Amritrasa Shri addresses over 700 students at Bright Star Academy, encouraging healthy living, moral values, and Indian culture
— Jain Sadhvi Dr. Amritrasa Shri addresses over 700 students at Bright Star Academy, encouraging healthy living, moral values, and Indian culture

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ब्राइट स्टार अकैडमी में पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी के प्रेरक प्रवचन: बच्चों को भारतीय संस्कृति अपनाने और जंक फूड से दूर रहने का दिया संदेश

महिदपुर रोड स्थित ब्राइट स्टार अकैडमी हायर सेकेंडरी स्कूल का वातावरण उस समय आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रेरणा से सराबोर हो गया, जब जैन समाज की पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज, साध्वी निरागरसा श्रीजी महाराज, साध्वी जिनांशरसा श्रीजी महाराज सहित ठाणा का विद्यालय में मंगल आगमन हुआ। विद्यालय परिसर में आयोजित विशेष प्रवचन कार्यक्रम में 700 से अधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं समाजजनों ने भाग लिया।

इस अवसर पर पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, अनुशासित जीवन, स्वस्थ खान-पान और विनम्रता के महत्व पर प्रेरणादायी संदेश दिए। उन्होंने बच्चों से पश्चिमी संस्कृति की अंधी दौड़ से बचने तथा भारतीय संस्कारों को अपने जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।

आध्यात्मिक वातावरण में हुआ प्रवचन कार्यक्रम

कार्यक्रम का आयोजन ब्राइट स्टार अकैडमी हायर सेकेंडरी स्कूल के संचालक नरेंद्र आकाश अरोड़ा के विशेष आग्रह पर किया गया। विद्यालय परिसर में पूज्य साध्वी मंडल के आगमन पर विद्यार्थियों और समाजजनों ने श्रद्धा एवं भक्ति के साथ उनका स्वागत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण और गुरु वंदना के साथ हुई। इसके बाद पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए जीवन को सफल बनाने वाले अनेक प्रेरक सूत्र बताए।

विद्यालय परिसर में उपस्थित सभी विद्यार्थी पूरे समय अत्यंत अनुशासन और श्रद्धा के साथ प्रवचन सुनते रहे।

“नम जाना, गम खाना और कम खाना” – सफल जीवन का मूल मंत्र

अपने प्रवचन के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने जीवन को सफल और संतुलित बनाने के लिए तीन सरल लेकिन अत्यंत प्रभावी सूत्र बताए।

उन्होंने कहा—

“नम जाना, गम खाना और कम खाना – यही जीवन को श्रेष्ठ बनाने का मंत्र है।”

उन्होंने समझाया कि जो व्यक्ति जीवन में विनम्र रहता है, वही वास्तव में ऊँचाइयों तक पहुंचता है।

साध्वी श्रीजी ने कहा कि विनम्रता मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण है। अहंकार व्यक्ति को कभी आगे नहीं बढ़ने देता, जबकि नम्र स्वभाव हर जगह सम्मान दिलाता है।

फलदार वृक्ष की तरह झुकना सीखें

प्रवचन के दौरान उन्होंने प्रकृति का सुंदर उदाहरण देते हुए कहा कि फलों से लदा हुआ वृक्ष हमेशा झुक जाता है।

इसके विपरीत बबूल का वृक्ष कठोर होता है। वह झुकता नहीं, बल्कि तेज हवा या आंधी आने पर टूट जाता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में सफलता पाने के बाद भी कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। जो व्यक्ति जितना बड़ा बनता है, उसे उतना ही अधिक विनम्र होना चाहिए।

स्वस्थ जीवन के लिए संयमित भोजन जरूरी

साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने विद्यार्थियों को स्वास्थ्य के महत्व पर भी विस्तार से समझाया।

उन्होंने कहा कि आज अधिकांश बीमारियों का कारण असंतुलित खान-पान और बदलती जीवनशैली है।

उन्होंने सलाह दी कि—

  • जितनी भूख हो, उससे थोड़ा कम भोजन करें।
  • भोजन हमेशा संतुलित और पौष्टिक होना चाहिए।
  • अधिक खाने की आदत कई रोगों को जन्म देती है।
  • नियमित दिनचर्या और संयमित जीवन स्वस्थ शरीर का आधार है।

उन्होंने कहा कि शरीर स्वस्थ रहेगा तभी विद्यार्थी अपने लक्ष्य की ओर पूरी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ सकेंगे।

जंक फूड और फास्ट फूड से दूर रहने की सलाह

आज की युवा पीढ़ी में बढ़ती जंक फूड की आदतों पर चिंता व्यक्त करते हुए साध्वी श्रीजी ने कहा कि बच्चों को पिज्जा, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक और अन्य फास्ट फूड से दूरी बनानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसे खाद्य पदार्थ स्वाद तो देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे शरीर को अनेक गंभीर बीमारियों की ओर ले जाते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे घर का बना पौष्टिक भोजन ग्रहण करें और फल, हरी सब्जियां तथा पारंपरिक भारतीय भोजन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

भारतीय संस्कृति अपनाने का आह्वान

प्रवचन के दौरान साध्वी श्रीजी ने पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण पर भी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि आधुनिकता अपनाना गलत नहीं है, लेकिन अपनी संस्कृति और संस्कारों को छोड़ देना उचित नहीं है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा—

“हमें पाश्चात्य संस्कृति की नकल करने के बजाय अपनी भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों को अपनाना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया में सम्मानित है और यही संस्कृति मनुष्य को परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनाती है।

स्कूल संस्कारों की प्रथम पाठशाला

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साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने विद्यालयों की भूमिका पर भी विशेष प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की सबसे बड़ी पाठशाला है।

उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा—

“आज आप सभी भारत का उज्ज्वल भविष्य हैं। आपके व्यक्तित्व का निर्माण विद्यालय से ही शुरू होता है।”

उन्होंने शिक्षकों से भी आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को केवल अकादमिक शिक्षा ही नहीं बल्कि नैतिक शिक्षा और जीवन मूल्यों का भी ज्ञान दें।

शांत रहना भी एक बड़ी साधना

प्रवचन में उन्होंने “गम खाना” का अर्थ समझाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति कुछ कटु शब्द कह दे तो तुरंत प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता नहीं होती।

उन्होंने कहा कि धैर्य, सहनशीलता और शांत स्वभाव जीवन में अनेक समस्याओं का समाधान बन जाते हैं।

क्रोध और अहंकार मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरियां हैं, जबकि क्षमा और धैर्य उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं।

विद्यार्थियों ने उत्साह से सुने प्रेरक विचार

विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 700 से अधिक विद्यार्थियों ने बड़ी उत्सुकता के साथ साध्वी श्रीजी के प्रवचन सुने।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अनुशासन और एकाग्रता का परिचय दिया।

कई विद्यार्थियों ने प्रवचन के बाद स्वस्थ जीवन, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति से जुड़े संकल्प भी लिए।

समाजजनों ने किया भव्य स्वागत

जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि पूज्य साध्वी मंडल नागदा-रूपेटा मार्ग से होते हुए ब्राइट स्टार अकैडमी पहुंचा।

विद्यालय में पहुंचने पर स्कूल संचालक नरेंद्र आकाश अरोड़ा, सह-संचालक अजीत बोथरा, प्राचार्य आकाश अरोड़ा, जैन श्रीसंघ अध्यक्ष अजय चोरड़िया एवं समाज के वरिष्ठजनों ने पूज्य साध्वी मंडल का भव्य स्वागत किया।

सभी ने मंगल आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य बताया।

विद्यालय परिवार ने जताया आभार

कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिवार की ओर से पूज्य साध्वी मंडल के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक एवं संस्कारप्रधान कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विद्यालय परिवार ने भविष्य में भी इस प्रकार के प्रेरणादायी आयोजनों को जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।

गुरुवार को होगा महिदपुर रोड में चातुर्मास का भव्य मंगल प्रवेश

जैन समाज के अनुसार पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज एवं साध्वी मंडल का महिदपुर रोड नगर में चातुर्मास हेतु भव्य मंगल प्रवेश गुरुवार को आयोजित किया जाएगा।

मंगल प्रवेश यात्रा का शुभारंभ प्रातः 9:30 बजे पारस पेट्रोलियम, नागदा रोड से होगा।

जैन समाज ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर मंगल प्रवेश यात्रा में सहभागी बनने का आग्रह किया है।

आध्यात्मिक संदेश बना विद्यार्थियों के लिए जीवन प्रेरणा

ब्राइट स्टार अकैडमी में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक धार्मिक प्रवचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों के लिए जीवन जीने की कला सीखने का अवसर भी बना। साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी द्वारा दिए गए संदेश—विनम्रता अपनाना, संयमित जीवन जीना, स्वस्थ भोजन करना, भारतीय संस्कृति से जुड़ना और नैतिक मूल्यों का पालन करना—ने उपस्थित सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को गहराई से प्रभावित किया।

कार्यक्रम के अंत में पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया गया। साध्वी श्रीजी के प्रेरक विचारों ने यह संदेश दिया कि यदि युवा पीढ़ी संस्कार, अनुशासन और भारतीय संस्कृति को अपनाए, तो वह न केवल अपना भविष्य उज्ज्वल बना सकती है बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

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