स्वराज वाणी | शाजापुर | चंद्रेश जैन संवाददाता
मंत्री की नाराज़गी, ABVP का विरोध… फिर भी कार्रवाई नहीं, आखिर टीआई प्रवीण पाठक पर अब तक फैसला क्यों नहीं?
शुजालपुर। हाल ही में सामने आए कथित नशे के नेटवर्क से जुड़े मामले ने शुजालपुर की कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम में शुजालपुर सिटी थाना प्रभारी (टीआई) प्रवीण पाठक की भूमिका को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मामले ने उस समय अधिक तूल पकड़ लिया, जब शुजालपुर विधायक एवं मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री इंदर सिंह परमार ने सार्वजनिक रूप से थाना प्रभारी की कार्यशैली पर नाराज़गी व्यक्त की। इसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने एसडीओपी कार्यालय का घेराव करते हुए थाना प्रभारी को तत्काल हटाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की भी मांग उठाई।
हालांकि मंत्री की सार्वजनिक नाराज़गी और छात्र संगठन के विरोध प्रदर्शन के बावजूद अब तक थाना प्रभारी के संबंध में किसी प्रशासनिक कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर यह प्रश्न लगातार उठ रहा है कि यदि मामला इतना गंभीर माना गया था, तो अब तक कोई स्पष्ट निर्णय क्यों नहीं लिया गया।
स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, कथित नशे के नेटवर्क का दायरा केवल शुजालपुर सिटी थाना क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि मंडी थाना क्षेत्र का नाम भी सामने आया है। यदि इन दावों में तथ्य पाए जाते हैं, तो जानकारों का मानना है कि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष एवं व्यापक जांच आवश्यक होगी, ताकि किसी भी स्तर पर यदि लापरवाही या संलिप्तता रही हो तो उसके संबंध में तथ्य सामने आ सकें।
वहीं नागरिकों का कहना है कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है। यदि किसी अधिकारी के विरुद्ध गंभीर प्रश्न उठते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कर समय पर स्थिति स्पष्ट करना प्रशासन के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत करता है। दूसरी ओर, यदि आरोप निराधार हों, तो जांच के माध्यम से संबंधित अधिकारी का पक्ष भी स्पष्ट होना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले में किसी स्वतंत्र या विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, और यदि हां, तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? साथ ही यह भी देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कोई औपचारिक निर्णय या स्पष्टीकरण जारी करता है या नहीं।
फिलहाल संबंधित प्रशासनिक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में विभिन्न स्तरों पर केवल चर्चाएं और कयास लगाए जा रहे हैं। आमजन की अपेक्षा है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो और जो भी निर्णय हो, वह साक्ष्यों एवं नियमों के आधार पर लिया जाए।
नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोपों और दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। किसी भी जांच या प्रशासनिक कार्रवाई का अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी एवं जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में है।
