*सीए “एडवोकेट” विमल जैन: अप्रत्यक्ष कराधान का एक प्रतिष्ठित नाम*
“जीएसटी गुरु” के नाम से ख्याति प्राप्त व्यक्तित्व
मुरैना/नोएडा (मनोज जैन नायक) CA Bimal Jain एडवोकेट का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। आपका जन्म पश्चिम बंगाल के महानगर कोलकाता में दिगम्बर जैसवाल जैन उपरोचियां समाज के श्रावक श्रेष्ठी मुरारीलाल श्रीमती शैलवाला जैन के यहां 15 दिसंबर को हुआ था । वर्तमान में आप अपनी पत्नी बीना जैन (ग्वालियर), पुत्र एडवोकेट अनुमेय व अनुराग एवं पुत्रवधु कृतिका (आगरा) के साथ आनंदमय खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं। आपने अपनी योग्यता, लगन एवं परिश्रम के बलबूते पर सम्पूर्ण भारतवर्ष में जी एस टी गुरु के नाम से ख्याति प्राप्त कर देश, समाज एवं परिवार का नाम रोशन किया है।
जैन समाज के गौरव सीए (अधिवक्ता) बिमल जैन, FCA, FCS, LLB देश के अग्रणी अप्रत्यक्ष कर विशेषज्ञों में से एक हैं, जिन्होंने अपने ज्ञान, परिश्रम और दूरदृष्टि के बल पर कराधान एवं विधि के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान स्थापित की है। लगभग तीन दशकों से अधिक समय से वे जीएसटी, सेवा कर, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क, वैट/सीएसटी, विदेश व्यापार नीति (FTP), डीजीएफटी, विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ), निर्यात उन्मुख इकाइयों (EOU) तथा आयात-निर्यात कानूनों से जुड़े परामर्श, प्रतिनिधित्व और वादकरण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
मई 1994 में भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (ICAI) के सदस्य बनने के साथ उनके पेशेवर जीवन की शुरुआत हुई। इसके बाद दिसंबर 2006 में उन्होंने भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (ICSI) की सदस्यता प्राप्त की तथा विधि स्नातक (LLB) की शिक्षा हासिल कर अपने ज्ञान को और व्यापक आयाम प्रदान किया। कराधान, विधि और व्यवसाय—इन तीनों क्षेत्रों की गहन समझ ने उन्हें एक बहुआयामी विशेषज्ञ के रूप में स्थापित किया।
उनकी व्यावसायिक यात्रा संघर्ष, निरंतर अध्ययन और आत्मविश्वास की प्रेरक कहानी है। उस दौर में जब अधिकांश पेशेवर प्रत्यक्ष कर, लेखा परीक्षण अथवा वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र को प्राथमिकता देते थे, उन्होंने अप्रत्यक्ष कराधान जैसे अपेक्षाकृत जटिल और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र को चुना। उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट से लेकर जीएसटी तक के संक्रमण काल में उन्होंने न केवल स्वयं को समय के अनुरूप ढाला, बल्कि हजारों व्यवसायियों, अधिकारियों और पेशेवरों को भी नई व्यवस्थाओं के प्रति जागरूक और प्रशिक्षित किया।

बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी सीए बिमल जैन A2Z Taxcorp LLP, नई दिल्ली के संस्थापक हैं, जो अप्रत्यक्ष कर एवं विधिक परामर्श के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित संस्था के रूप में स्थापित है। सीमित संसाधनों से शुरू हुई यह संस्था आज देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित कंपनियों, उद्योग समूहों और व्यावसायिक संगठनों को विशेषज्ञ सेवाएँ प्रदान कर रही है। संस्था की विशेषता यह है कि यह केवल अनुपालन (Compliance) तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जटिल कर एवं विधिक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करती है।
वर्तमान में वे एक सफल कर सलाहकार, प्रभावशाली वक्ता, प्रशिक्षक एवं लेखक के रूप में सक्रिय हैं। वे ICAI, ICSI तथा ICMAI जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के नियमित संकाय सदस्य रहे हैं और देशभर में आयोजित सैकड़ों राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों, कार्यशालाओं तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अपने विचार प्रस्तुत कर चुके हैं। उनकी व्याख्यान शैली विषय की गहराई, व्यावहारिक दृष्टिकोण और सरल प्रस्तुति के लिए विशेष रूप से सराही जाती है।
लेखन के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। उनकी चर्चित पुस्तक “GST Law and Commentary (with Analyses & Procedures)” जीएसटी विषय पर एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है। वर्ष 2026 में इसका 10वाँ संस्करण प्रकाशित होना इस बात का प्रमाण है कि यह पुस्तक कराधान जगत में व्यापक रूप से स्वीकार और उपयोग की जाती है। इसके अतिरिक्त वे नियमित रूप से लेख, न्यूज़लेटर एवं विधिक विश्लेषण प्रकाशित करते रहते हैं, जिनसे हजारों पेशेवरों और उद्यमियों को लाभ मिलता है।
राष्ट्रीय स्तर पर उनकी विशेषज्ञता को अनेक मंचों पर सम्मानित किया गया है। ICSI द्वारा आयोजित “Largest Taxation Lesson on GST” नामक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड कार्यक्रम में उन्होंने मुख्य वक्ता (Keynote Speaker) की भूमिका निभाई, जिसमें 4500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त उन्हें विभिन्न संस्थाओं द्वारा बिज़नेस लीडर अवार्ड, बेस्ट स्पीकर अवार्ड, यंग अचीवर्स अवार्ड तथा अन्य प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
वे केवल पेशेवर सफलता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उद्योग एवं व्यापार जगत की समस्याओं को सरकार तक पहुँचाने और नीतिगत सुधारों में सक्रिय योगदान देने के लिए भी जाने जाते हैं। जीएसटी और अन्य अप्रत्यक्ष कर कानूनों से संबंधित अनेक व्यावहारिक सुझावों एवं प्रतिवेदनों के माध्यम से उन्होंने करदाताओं और व्यापारिक समुदाय की आवाज़ को प्रभावी ढंग से उठाया है।

सीए बिमल जैन का मानना है कि सफलता का आधार केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि निरंतर सीखने और स्वयं को समयानुकूल विकसित करते रहने की क्षमता है। उनका विश्वास है कि आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालन कई पारंपरिक कार्यों को सरल बना देंगे, किंतु विश्लेषण, निर्णय क्षमता, नेतृत्व और प्रतिनिधित्व जैसे गुण सदैव मानव की सबसे बड़ी शक्ति बने रहेंगे।
युवा पीढ़ी के लिए उनका संदेश अत्यंत प्रेरणादायक है—“जिस क्षेत्र को चुनें, उसमें गहराई तक जाएँ। निरंतरता को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाइए और जो ज्ञान प्राप्त करें, उसे समाज के साथ साझा कीजिए। ज्ञान बाँटने से घटता नहीं, बल्कि सम्मान और विश्वास के रूप में कई गुना होकर लौटता है।”
आज सीए (अधिवक्ता) बिमल जैन केवल एक सफल पेशेवर नहीं, बल्कि कराधान जगत में ज्ञान, विश्वसनीयता, नैतिकता और उत्कृष्टता के पर्याय बन चुके हैं। उनका जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि समर्पण, अध्ययन और सकारात्मक दृष्टिकोण के बल पर साधारण शुरुआत को भी असाधारण उपलब्धियों में बदला जा सकता है।
