MP Weather Today: भोपाल-सीहोर-रायसेन में रातभर झमाझम बारिश, 4 जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट; प्रदेश में अब भी 17% बारिश की कमी
MP Weather Today: मध्य प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। राजधानी भोपाल, सीहोर और रायसेन में सोमवार रात से लगातार बारिश का दौर जारी है। बारिश के कारण मौसम सुहावना हो गया है और लोगों को उमस व गर्मी से राहत मिली है। हालांकि प्रदेश में अब भी सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खेती और जलस्तर को लेकर चिंता बनी हुई है। मौसम विभाग ने मंगलवार को चार जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि प्रदेश के कई अन्य हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है।
भोपाल, सीहोर और रायसेन में रातभर बरसे बादल
सोमवार देर रात से भोपाल, सीहोर और रायसेन में लगातार बारिश होती रही। कई इलाकों में सड़कें पानी से भर गईं और सुबह लोगों को ठंडे मौसम का एहसास हुआ। बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बीते कई दिनों से पड़ रही उमस से राहत मिली।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश मानसून के फिर से सक्रिय होने का संकेत है। यदि अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रही तो प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी वर्षा दर्ज हो सकती है।
इन चार जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार के लिए मुरैना, भिंड, दमोह और कटनी जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।
इसके अलावा राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।
वहीं नीमच, मंदसौर और रतलाम में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने का अनुमान है।
MP में अब भी 17 प्रतिशत वर्षा की कमी
बारिश का नया दौर शुरू होने के बावजूद मध्य प्रदेश अब भी सामान्य मानसूनी वर्षा से पीछे चल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अब तक प्रदेश में 268.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस समय तक सामान्य रूप से 323.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी।
इस तरह प्रदेश में कुल वर्षा की कमी बढ़कर 17 प्रतिशत बनी हुई है। पिछले लगभग 13 दिनों तक अधिकांश हिस्सों में व्यापक और लगातार बारिश नहीं हुई, जिसके कारण वर्षा का अंतर लगातार बढ़ता गया।
39 जिलों में सामान्य से कम बारिश
MP के 39 जिले अब भी सामान्य से कम वर्षा की श्रेणी में शामिल हैं। इसका सबसे अधिक असर खेती-किसानी पर पड़ सकता है, क्योंकि खरीफ फसलों के लिए जुलाई का महीना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो कई इलाकों में बोवनी और फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।
देवास सबसे आगे, आलीराजपुर सबसे पीछे
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो देवास जिला प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा वाला जिला बना हुआ है। यहां सामान्य से करीब 102 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।
इसके अलावा हरदा, इंदौर, सीहोर और भोपाल में भी मानसून का प्रदर्शन संतोषजनक रहा है।
दूसरी ओर आलीराजपुर सबसे कम बारिश वाला जिला बना हुआ है। यहां अब तक सामान्य से करीब 74 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी वर्षा का स्तर औसत से काफी नीचे बना हुआ है।
जुलाई के आखिरी सप्ताह से बढ़ी उम्मीद
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल प्रदेश में हल्की और मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। हालांकि सबसे ज्यादा उम्मीद जुलाई के अंतिम सप्ताह से है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में एक मजबूत मानसूनी सिस्टम बनने की संभावना है। यदि यह सिस्टम सक्रिय होकर मध्य प्रदेश की ओर बढ़ता है, तो प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार अच्छी बारिश हो सकती है।
इससे न केवल वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है, बल्कि किसानों को भी राहत मिलेगी और जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ने की संभावना है।
किसानों की बढ़ी चिंता, अच्छी बारिश का इंतजार
MP में खरीफ सीजन की फसलें बारिश पर निर्भर हैं। लगातार कम वर्षा के कारण कई जिलों में किसान चिंतित हैं। सोयाबीन, मक्का, धान और अन्य खरीफ फसलों के लिए समय पर पर्याप्त बारिश बेहद जरूरी मानी जाती है।
हालांकि मौसम विभाग का मानना है कि यदि जुलाई के आखिरी सप्ताह में अनुमान के मुताबिक मजबूत बारिश होती है, तो कृषि क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा और अब तक की वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकेगी। फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर आने वाले मानसूनी सिस्टम पर टिकी हुई है।
