ग्राम पंचायत गोडारू में सचिव पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप, ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की उठाई मांग
फोन नहीं उठाने से लेकर फर्जी बिलों के जरिए राशि आहरण तक के लगाए आरोप, प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील
गोडारू। ग्राम पंचायत गोडारू में पदस्थ पंचायत सचिव विष्णु जायसवाल की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों में नाराजगी सामने आई है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने सचिव पर पंचायत कार्यों में लापरवाही, ग्रामीणों की समस्याओं की अनदेखी और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिव की निष्क्रियता के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली, पंचायत के वित्तीय दस्तावेजों और विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
पंचायत कार्यालय में अनुपस्थिति का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव विष्णु जायसवाल नियमित रूप से पंचायत कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते हैं। जरूरत के समय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों को उनसे संपर्क करने में परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि कई बार फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन फोन रिसीव नहीं किया जाता या उचित जवाब नहीं मिलता।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत स्तर पर होने वाले जरूरी कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन में सचिव की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में सचिव की अनुपलब्धता के कारण आम लोगों को शासकीय योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
विकास कार्यों को लेकर उठे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत क्षेत्र में विकास कार्यों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उनका कहना है कि कागजों में विकास कार्यों का उल्लेख किया जाता है, लेकिन धरातल पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं देते।
लोगों ने आरोप लगाया कि कई कार्यों में पारदर्शिता का अभाव है और पंचायत निधि के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत में हुए सभी निर्माण कार्यों, खरीदी और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच की जाए।
फर्जी बिल और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
ग्रामीणों ने पंचायत सचिव पर फर्जी बिल और वाउचर के माध्यम से सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि पंचायत के वित्तीय रिकॉर्ड की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो कई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में ऐसे प्रतिष्ठानों के बिलों का उपयोग किए जाने की आशंका है, जिनका वास्तविक कार्यों से कोई संबंध नहीं है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
जनप्रतिनिधियों में भी नाराजगी
पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर पंचायत से जुड़े जनप्रतिनिधियों में भी नाराजगी बताई जा रही है। उनका कहना है कि पंचायत के विकास कार्यों को गति देने के लिए सचिव और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है, लेकिन वर्तमान स्थिति में कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने की जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामवासियों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि पंचायत सचिव के कार्यकाल में हुए सभी कार्यों की जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत का उद्देश्य जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना और क्षेत्र का विकास करना है। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही या वित्तीय अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट
पंचायत सचिव पर लगाए गए सभी आरोपों की वास्तविकता जांच प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन द्वारा यदि जांच कराई जाती है तो पंचायत के रिकॉर्ड, भुगतान दस्तावेज, कार्यों की स्थिति और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर स्थिति सामने आ सकती है।
फिलहाल ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर पंचायत व्यवस्था को सुचारु बनाने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
