जावरा में ‘सुर संगम’ ने बिखेरा संगीत का जादू, मधुर गीतों और तालियों की गूंज से सराबोर हुई संगीतमय शाम
रिपोर्ट: पवन धाकड़ | जावरा (रतलाम)
लता मंगेशकर म्यूजिकल अकादमी के आयोजन में बाल, युवा और वरिष्ठ कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुतियां, संगीत गुरुओं का हुआ सम्मान
जावरा (रतलाम)। संगीत की मधुर स्वर लहरियों, सुरों की मिठास और कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों से सजी शनिवार की शाम जावरा के संगीत प्रेमियों के लिए अविस्मरणीय बन गई। लता मंगेशकर म्यूजिकल अकादमी, जावरा द्वारा करनावट एवेन्यू, सिविल लाइन रोड पर आयोजित “सुर संगम” कार्यक्रम में शहर एवं आसपास के क्षेत्र के कलाकारों ने एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन मोह लिया। देर रात तक चले इस भव्य आयोजन में सभागार तालियों की गड़गड़ाहट और मधुर संगीत से गूंजता रहा।
कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना, भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को बढ़ावा देना तथा नई पीढ़ी को संगीत और संस्कृति से जोड़ना था। बाल कलाकारों से लेकर अनुभवी गायकों तक सभी ने अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
माँ सरस्वती की वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय संस्कृति की परंपरा के अनुरूप माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।
नगर के प्रख्यात गायक चिराग चोपड़ा, प्रतीक जैन एवं महेश शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ किया। इसके बाद सुधा शर्मा ने भावपूर्ण सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सरस्वती वंदना के साथ ही सभागार में उपस्थित श्रोताओं ने कार्यक्रम की शानदार शुरुआत का स्वागत जोरदार तालियों से किया।
शहर की प्रमुख हस्तियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
संगीत समारोह में अनेक सामाजिक, राजनीतिक एवं चिकित्सा क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम में सांसद प्रतिनिधि प्रदीप चौधरी, एडवोकेट संतोष मेडतवाल, डॉ. हमीर सिंह राठौर, डॉ. प्रकाश उपाध्याय, शेखर नाहर, नीतिराज सिंह, डॉ. घनश्याम पाटीदार तथा पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह सोलंकी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
अकादमी परिवार की ओर से सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया गया।
सुरों की महफिल में कलाकारों ने बांधा समां
कार्यक्रम में शहर और आसपास के क्षेत्रों से आए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि श्रोता देर रात तक अपनी सीटों पर डटे रहे।
भव्यराज सिंह ने प्रसिद्ध गीत “मधुबन में राधिका नाचे रे” प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी, जबकि संजोत सिंह गंभीर ने अपनी प्रस्तुति “अपनी तस्वीर को” से दर्शकों का दिल जीत लिया।
हर प्रस्तुति के बाद सभागार देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा।
बाल और युवा कलाकारों ने दिखाई अपनी प्रतिभा
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें बाल एवं युवा कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का भरपूर अवसर मिला।
रश्मित कौर, स्वीटी, अमरप्रीत कौर, नीलम मनवानी, रितेश श्रीवास्तव, महिमा पाटीदार, सनम खान, यज्ञराज हरगोड़, वाहिद नदीम, जीवनदास बैरागी, अली हसन और अली हुसैन सहित अनेक कलाकारों ने फिल्मी, सदाबहार और लोकप्रिय गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दीं।
इन कलाकारों की गायकी ने यह साबित किया कि जावरा और आसपास के क्षेत्र में संगीत प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।
देशभक्ति गीतों ने जगाया उत्साह
कार्यक्रम के दौरान पुलिस बैंड के तय्यब रज़ा ने देशभक्ति गीतों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
उनकी प्रस्तुति ने पूरे सभागार में उत्साह और ऊर्जा का नया संचार कर दिया। दर्शकों ने खड़े होकर तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया।
देशभक्ति गीतों ने कार्यक्रम को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा बल्कि राष्ट्रप्रेम का संदेश भी दिया।
संगीत गुरुओं का किया गया सम्मान
सुर संगम कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण संगीत क्षेत्र की महान हस्तियों का सम्मान रहा।
इस अवसर पर अकादमी द्वारा प्रख्यात तबला वादक उस्ताद ईश्वरलाल राठौर, प्रख्यात तबला एवं ढोलक वादक स्वर्गीय उस्ताद बगदीराम सोनगरा तथा उस्ताद मोहम्मद रफीक के संगीत जगत में दिए गए अमूल्य योगदान का सम्मान किया गया।
उपस्थित अतिथियों ने कहा कि ऐसे वरिष्ठ कलाकारों का सम्मान नई पीढ़ी को प्रेरणा देने का कार्य करता है और संगीत परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संगीत समाज को जोड़ने का सबसे मजबूत माध्यम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि समाज को जोड़ने वाली एक सशक्त सांस्कृतिक शक्ति है।
उन्होंने कहा कि संगीत भाषा, धर्म और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों को एक सूत्र में बांधता है।
अतिथियों ने लता मंगेशकर म्यूजिकल अकादमी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने के साथ-साथ भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को जीवंत बनाए रखते हैं।
संगीतकारों की शानदार संगत ने बढ़ाया कार्यक्रम का आकर्षण
गायकों की प्रस्तुतियों को और अधिक प्रभावशाली बनाने में वाद्य यंत्र कलाकारों की भूमिका भी उल्लेखनीय रही।
कार्यक्रम में आमिर रज़ा ने की-बोर्ड पर शानदार संगत की, जबकि ताहिर रज़ा, लक्की राठौर, भागीरथ मालवीय, अल्तमश खान एवं जय रांका ने विभिन्न वाद्य यंत्रों पर अपनी बेहतरीन प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को संगीतमय ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।
संगीतकारों और गायकों के तालमेल ने प्रत्येक प्रस्तुति को और भी प्रभावशाली बना दिया।
स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देना है अकादमी का उद्देश्य
लता मंगेशकर अवॉर्ड से सम्मानित तथा अकादमी के डायरेक्टर एहमद रज़ा (पप्पन) ने कहा कि अकादमी का मुख्य उद्देश्य जावरा और आसपास के क्षेत्र में छिपी संगीत प्रतिभाओं को उचित मंच उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि छोटे शहरों में अनेक प्रतिभाशाली कलाकार होते हैं, लेकिन उन्हें अपनी कला दिखाने का अवसर नहीं मिल पाता। अकादमी लगातार ऐसे कलाकारों को मंच देने का कार्य कर रही है ताकि वे राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकें।
उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में भी इसी प्रकार के संगीत कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाएगा।
कवि चंचल चौहान ने किया प्रभावशाली संचालन
पूरे कार्यक्रम का प्रभावशाली और रोचक संचालन कवि चंचल चौहान (रतलाम) ने किया।
उन्होंने अपने विशिष्ट अंदाज और सहज शैली से कार्यक्रम को लगातार रोचक बनाए रखा। कार्यक्रम के अंत में भागीरथ मालवीय ने सभी कलाकारों, अतिथियों, आयोजकों और उपस्थित संगीत प्रेमियों का आभार व्यक्त किया।
जावरा के संगीत प्रेमियों के लिए यादगार रही संध्या
संस्था के प्रचार-प्रसार मंत्री संजय सुराणा ने बताया कि “सुर संगम” का उद्देश्य केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं था, बल्कि शहर की प्रतिभाओं को सम्मानजनक मंच देना और संगीत के प्रति नई पीढ़ी में रुचि विकसित करना भी था।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में मिली अभूतपूर्व सफलता और लोगों के उत्साह को देखते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की श्रृंखला जारी रहेगी।
संगीत और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल
जावरा में आयोजित “सुर संगम” कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि छोटे शहरों में भी संगीत के प्रति गहरी रुचि और प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।
इस आयोजन ने स्थानीय कलाकारों को अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर दिया, वरिष्ठ संगीत गुरुओं को सम्मानित किया और नई पीढ़ी को भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत से जोड़ने का संदेश दिया।
देर रात तक चले इस संगीतमय आयोजन ने जावरा के संगीत प्रेमियों के दिलों में अपनी विशेष छाप छोड़ दी। सुरों की मिठास, कलाकारों का आत्मविश्वास और श्रोताओं का उत्साह इस बात का प्रमाण था कि संगीत आज भी लोगों को जोड़ने और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
