कलेक्टर ने उप स्वास्थ्य केंद्र एवं ग्राम पंचायत का किया निरीक्षण, लापरवाही पर सचिव के निलंबन के दिए निर्देश
झाबुआ प्रतिनिधि मनीष कुमट
Jhabua जिले में शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने सोमवार को उप स्वास्थ्य केंद्र रंगपुरा एवं ग्राम पंचायत देवझिरी पण्डा का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, पंचायत प्रशासन, विकास कार्यों तथा शासकीय योजनाओं की जमीनी स्थिति का बारीकी से अवलोकन किया। इस दौरान जहां स्वास्थ्य केंद्र में बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, वहीं ग्राम पंचायत में सामने आई लापरवाही पर कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित पंचायत सचिव के निलंबन के निर्देश जारी किए।
उप स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं का लिया जायजा
निरीक्षण की शुरुआत उप स्वास्थ्य केंद्र रंगपुरा से हुई, जहां कलेक्टर डॉ. भरसट ने सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने केंद्र पर आने वाले मरीजों की संख्या, उपलब्ध दवाइयों, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण तथा विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की उपलब्धता, साफ-सफाई, आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था और मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए और मरीजों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी अनावश्यक रूप से जिला अस्पताल या अन्य स्थानों पर भेजने की नौबत नहीं आनी चाहिए।
स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने पर जोर
कलेक्टर ने स्वास्थ्य अधिकारियों से कहा कि शासन की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए।
उन्होंने नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने, टीकाकरण अभियान को गति देने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम चलाने पर भी विशेष जोर दिया।
ग्राम पंचायत देवझिरी पण्डा का किया निरीक्षण
स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण के बाद कलेक्टर ग्राम पंचायत देवझिरी पण्डा पहुंचे, जहां उन्होंने पंचायत कार्यालय, अभिलेखों और पंचायत क्षेत्र में संचालित विकास कार्यों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान पंचायत क्षेत्र में अवैध निर्माण पाए जाने पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूछा कि अवैध निर्माण होने के बावजूद समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कलेक्टर ने पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए पाया कि पंचायत स्तर पर कई कार्य अपेक्षित गति से नहीं किए जा रहे हैं।
सचिव की कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी
निरीक्षण के दौरान जानकारी मिली कि संबंधित पंचायत सचिव ने 1 जुलाई को पदभार ग्रहण किया था, लेकिन पदभार संभालने के बाद भी पंचायत में शासकीय कार्यों को गति देने के लिए कोई प्रभावी प्रयास नहीं किए गए।
कलेक्टर ने इस स्थिति को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए सचिव की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पंचायत सचिव की जिम्मेदारी केवल कार्यालय में उपस्थित रहना नहीं, बल्कि गांव के विकास कार्यों की नियमित निगरानी करना, योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करना और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करना भी है।
निलंबन की कार्रवाई के दिए निर्देश
शासकीय कार्यों में लापरवाही और दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत को संबंधित पंचायत सचिव के विरुद्ध तत्काल निलंबन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन की योजनाओं के संचालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी स्तर पर कार्य में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विकास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पंचायत स्तर पर संचालित सभी विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की नियमित निगरानी की जाए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, मनरेगा, पेयजल व्यवस्था, सड़क निर्माण, स्वच्छता अभियान और अन्य विकास कार्यों में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।
साथ ही उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में समय-समय पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए और जहां भी अनियमितताएं मिलें, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।
प्रशासनिक जवाबदेही पर दिया जोर
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना भी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक कर्मचारी अपने दायित्वों का पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ निर्वहन करे। आम नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध निराकरण किया जाए और विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश
कलेक्टर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों से कहा कि वे नियमित रूप से फील्ड में जाकर कार्यों की समीक्षा करें और योजनाओं की वास्तविक प्रगति का आकलन करें।
उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप विकास कार्यों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
ग्रामीणों को मिलेगा बेहतर लाभ
निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों से यह उम्मीद जताई जा रही है कि ग्राम पंचायत देवझिरी पण्डा सहित आसपास के क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी और स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार होगा।
ग्रामीणों का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारियों के नियमित निरीक्षण से कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ती है और योजनाओं का लाभ आम लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंचता है।
अधिकारियों की रही मौजूदगी
निरीक्षण के दौरान सहायक कलेक्टर सुश्री आयुषी बंसल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एम.एल. चोपड़ा सहित जिला पंचायत एवं स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने कलेक्टर के निर्देशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट के इस निरीक्षण ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि जिले में प्रशासनिक लापरवाही और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करना होगा, अन्यथा उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का मानना है कि नियमित निरीक्षण, जवाबदेही और समयबद्ध कार्रवाई से ही ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलेगी तथा शासन की योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र हितग्राहियों तक प्रभावी रूप से पहुंच सकेगा।
