जीवन को सार्थक बनाने के लिए धैर्य, संयम और आत्म नियंत्रण जरूरी : बाल ब्रह्मचारी बसंत जी महाराज
सिलवानी में भव्य मंगल आगमन, शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
सिलवानी संवाददाता वैभव जैन मस्ताना।
धर्म नगरी सिलवानी में आध्यात्मिक वातावरण उस समय और अधिक भक्तिमय हो गया, जब बाल ब्रह्मचारी श्री बसंत जी महाराज का नगर में भव्य आगमन हुआ। अखंड दिगंबर जैन समाज एवं तारण तरण जैन समाज के संयुक्त तत्वावधान में गुरुदेव का श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ स्वागत किया गया। उनके आगमन को लेकर समाज के लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
गुरुदेव की अगवानी गैरतगंज मार्ग स्थित सांदीपनि विद्यालय के सामने से की गई। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए और मंगल गीतों, जयघोषों तथा धार्मिक नारों के साथ उनका स्वागत किया। इसके बाद भव्य शोभायात्रा प्रारंभ हुई, जिसमें समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।
गाजे-बाजे और केसरिया ध्वजों के साथ निकली शोभायात्रा
बाल ब्रह्मचारी श्री बसंत जी महाराज की शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर निकली। शोभायात्रा में गाजे-बाजे, केसरिया ध्वज और भगवान के जयघोष आकर्षण का केंद्र रहे। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने गुरुदेव का स्वागत किया और उनके दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
शोभायात्रा में महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। श्रद्धालुओं की उपस्थिति से पूरा नगर धार्मिक भक्ति और आस्था के रंग में रंगा हुआ दिखाई दिया। नगरवासियों ने भी उत्साहपूर्वक गुरुदेव का स्वागत किया।
शोभायात्रा का समापन होली चौक स्थित तारण तरण जैन चैत्यालय में हुआ, जहां धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के प्रवचनों का लाभ लिया और धर्म मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने का दिया संदेश
धर्मसभा को संबोधित करते हुए बाल ब्रह्मचारी श्री बसंत जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन अत्यंत अनमोल है। यह जीवन बहते हुए जल की धारा के समान निरंतर आगे बढ़ता रहता है। इस जीवन को सार्थक बनाने के लिए व्यक्ति को धैर्य, संयम और आत्म नियंत्रण का पालन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में मानसिक शांति से दूर होता जा रहा है। इच्छाओं और चिंताओं के कारण जीवन में तनाव बढ़ रहा है। ऐसे समय में धैर्य और संयम ही व्यक्ति को सही दिशा प्रदान कर सकते हैं।
गुरुदेव ने कहा कि जीवन में आने वाली परिस्थितियां हमेशा हमारे अनुकूल नहीं होतीं, लेकिन हमारा व्यवहार और सोच हमेशा हमारे नियंत्रण में होती है। कठिन समय में धैर्य बनाए रखना ही व्यक्ति की वास्तविक शक्ति होती है।
धैर्य है सफलता का महामंत्र
बसंत जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि धैर्य केवल एक गुण नहीं बल्कि सफलता प्राप्त करने का महामंत्र है। जल्दबाजी और अधीरता से किए गए निर्णय कई बार परेशानियों का कारण बन जाते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को शांत मन से विचार कर कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को किसी भी कार्य को लेकर अत्यधिक व्याकुलता और बेचैनी से बचना चाहिए। आत्म शांति के मार्ग पर चलते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। इससे जीवन में संतुलन, सुख और शांति की अनुभूति होती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरणा देते हुए कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे विचार, अच्छा व्यवहार और संयमित जीवन जीना भी धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
संयमित जीवन से मिलता है आत्मिक सुख
गुरुदेव ने कहा कि मनुष्य को अपने विचारों, इच्छाओं और व्यवहार पर नियंत्रण रखना चाहिए। आत्म नियंत्रण के माध्यम से ही व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बना सकता है। संयमित जीवन व्यक्ति को बाहरी परिस्थितियों से ऊपर उठाकर आत्मिक सुख की ओर ले जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कुछ समय आत्म चिंतन, स्वाध्याय और धार्मिक गतिविधियों के लिए निकालना चाहिए। इससे मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
श्रद्धालुओं ने लिया धर्म लाभ
इस अवसर पर सिलवानी नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सभी ने गुरुदेव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और धर्मसभा में शामिल होकर आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ लिया।
कार्यक्रम में जैन समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी, युवा वर्ग, महिला मंडल और समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। समाज के सदस्यों ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
गुरुदेव के आगमन से सिलवानी नगर में धार्मिक उत्साह का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे संतों का सानिध्य जीवन को सही दिशा देने वाला होता है और उनके प्रवचन समाज में नैतिक मूल्यों एवं संस्कारों को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
धर्म और संस्कारों की प्रेरणा देता है ऐसा आयोजन
बाल ब्रह्मचारी श्री बसंत जी महाराज के प्रवचनों ने उपस्थित लोगों को धैर्य, संयम और आत्म नियंत्रण का महत्व समझाया। उन्होंने जीवन में शांति और संतुलन बनाए रखने के लिए धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
सिलवानी में आयोजित यह धार्मिक कार्यक्रम समाज के लिए प्रेरणादायी रहा। श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के संदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया और आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।
