आचार्य उदारसागर महाराज का वर्षायोग मुरैना में होने की संभावना, 25 या 26 जुलाई को हो सकता है भव्य मंगल प्रवेश
मुरैना में चातुर्मास को लेकर जैन समाज में उत्साह
Morena (मनोज जैन नायक) । जैन समाज के लिए धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अवसर आने वाला है। आचार्य श्री उदारसागर महाराज ससंघ का इस वर्ष का पावन वर्षायोग (चातुर्मास) मुरैना नगर में होने की संभावना प्रबल हो गई है। मुरैना के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आचार्य संघ के वर्षायोग स्थापना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं।
जैन साधु-संतों के वर्षायोग की स्थापना इस वर्ष 25 जुलाई से 3 अगस्त के बीच होने जा रही है। इसी क्रम में आचार्य श्री उदारसागर महाराज अपने शिष्यों सहित मुरैना की ओर पद विहार कर रहे हैं। उनके मुरैना आगमन की सूचना से स्थानीय जैन समाज में हर्ष और उत्साह का वातावरण है।
बड़ा जैन मंदिर कमेटी के प्रयास रंग लाए
मुरैना के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में वर्ष 2024 में युगल मुनिश्री प्रशंसानंद जी महाराज का तथा वर्ष 2025 में मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विवोधसागर जी महाराज का वर्षायोग संपन्न हुआ था।
वर्ष 2026 के वर्षायोग के लिए मंदिर कमेटी लगातार किसी संत या आर्यिका माताजी की स्वीकृति प्राप्त करने के प्रयास में जुटी हुई थी। लंबे प्रयासों के बाद अब आचार्य श्री उदारसागर महाराज के मुरैना में वर्षायोग स्थापित होने की संभावना दिखाई दे रही है।

सोनागिर-डबरा मार्ग पर संघ से हुई मुलाकात
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार आचार्य श्री उदारसागर महाराज के मुरैना में वर्षायोग को लेकर पहले से ही संकेत प्राप्त हो चुके थे। हाल ही में मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों एवं साधर्मी बंधुओं ने सोनागिर-डबरा के मध्य आचार्य संघ से मुलाकात कर मुरैना नगर में चातुर्मास करने का निवेदन किया था।
हालांकि आचार्य श्री द्वारा अभी तक मुरैना में वर्षायोग करने की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन समाज में इसे लगभग निश्चित माना जा रहा है।
25 या 26 जुलाई को हो सकता है मंगल प्रवेश
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर कमेटी के मंत्री विनोद जैन तार वाले ने बताया कि आचार्य श्री उदारसागर महाराज अपने शिष्यों के साथ पद विहार करते हुए मुरैना की ओर बढ़ रहे हैं।
आचार्य संघ झांसी, दतिया, डबरा और ग्वालियर होते हुए मुरैना पहुंचेगा। बुधवार को पूज्य श्री ने डबरा से ग्वालियर-मुरैना की दिशा में विहार किया। ग्वालियर पहुंचने के बाद मुरैना नगर प्रवेश एवं वर्षायोग स्थापना की घोषणा होने की संभावना है।
संभावना जताई जा रही है कि 25 या 26 जुलाई को आचार्य श्री संघ का भव्य मंगल प्रवेश मुरैना में हो सकता है। वर्तमान में संघ में आचार्य श्री उदारसागर महाराज, मुनिश्री उपशांत सागर महाराज, ऐलक श्री उत्साह सागर महाराज और क्षुल्लक श्री उपकार सागर महाराज सहित चार पिच्छिकाएं शामिल हैं।

आचार्य उदारसागर महाराज का जीवन परिचय
आचार्य श्री उदारसागर महाराज का गृहस्थ जीवन का नाम मुकेश जैन था। उनका जन्म 3 दिसंबर 1961 को मध्यप्रदेश के दमोह जिले के बांसा तारखेड़ा ग्राम में हुआ। उनके पिता का नाम श्री कोमलचंद जैन और माता का नाम श्रीमती धर्माबाई जैन है।
उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद 2 मार्च 1980 को सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के सान्निध्य में ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया। इसके बाद 10 फरवरी 1987 को नैनागिरि क्षेत्र में क्षुल्लक दीक्षा तथा 28 जुलाई 1988 को मढ़ियाजी जबलपुर में ऐलक दीक्षा प्राप्त की।
19 फरवरी 2007 को डूंगरपुर राजस्थान में आचार्य श्री अभिनंदन सागर महाराज से मुनि दीक्षा ग्रहण की। उनके तप, त्याग और साधना को देखते हुए 18 फरवरी 2016 को सांकवाड़ा डूंगरपुर में आचार्य श्री रायन सागर महाराज द्वारा उन्हें आचार्य पद प्रदान किया गया। इसके बाद वे आचार्य श्री उदारसागर महाराज के नाम से प्रसिद्ध हुए।
वर्षायोग का धार्मिक महत्व
जैन धर्म में वर्षायोग या चातुर्मास का विशेष महत्व माना जाता है। वर्षा ऋतु के दौरान साधु-संत चार माह तक एक ही स्थान पर रहकर साधना, ध्यान, स्वाध्याय और तप करते हैं।
जैन दर्शन के अनुसार वर्षा ऋतु में धरती पर अनेक सूक्ष्म जीवों की उत्पत्ति होती है। पैदल विहार करने से अनजाने में जीव हिंसा की संभावना बढ़ जाती है। अहिंसा के सिद्धांत का पालन करते हुए जैन साधु-संत इस अवधि में एक स्थान पर स्थिर रहकर आत्म साधना करते हैं।
चातुर्मास के दौरान धार्मिक प्रवचन, स्वाध्याय, तप, पूजा-अर्चना और आत्म चिंतन के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी जाती है। गृहस्थजन भी इस अवधि में उपवास, पूजा, दान-पुण्य और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेकर आत्म कल्याण का प्रयास करते हैं।

मुरैना में धार्मिक उत्साह का माहौल
आचार्य श्री उदारसागर महाराज के संभावित वर्षायोग को लेकर मुरैना जैन समाज में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। समाज के लोग मंगल प्रवेश और आगामी चार माह की धार्मिक गतिविधियों को लेकर तैयारियों में जुट गए हैं। यदि आचार्य संघ का वर्षायोग मुरैना में स्थापित होता है तो यह नगर के लिए धार्मिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण अवसर होगा।
