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शमशाबाद के भरनाखेड़ा शासकीय विद्यालय में ऑनलाइन फर्जी उपस्थिति का आरोप, औचक निरीक्षण में अतिथि शिक्षक मिले अनुपस्थित

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Published On: 20 July 2026
शमशाबाद

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शमशाबाद के भरनाखेड़ा शासकीय विद्यालय में ऑनलाइन फर्जी उपस्थिति का आरोप, औचक निरीक्षण में अतिथि शिक्षक मिले अनुपस्थित

अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश अध्यक्ष ने किया निरीक्षण, विद्यालय की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

शमशाबाद से राजकुमार विश्वकर्मा की खास रिपोर्ट

शमशाबाद/विदिशा।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कई बार जमीनी स्तर पर सामने आने वाली लापरवाहियां इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर देती हैं। ऐसा ही एक मामला विदिशा जिले के शमशाबाद तहसील अंतर्गत ग्राम भरनाखेड़ा स्थित शासकीय विद्यालय से सामने आया है। यहां विद्यालय में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद (अखिल आर्यावर्त संघ) के मध्य भारत प्रांत अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के दौरान विद्यालय में कथित रूप से अनियमितताएं सामने आईं। निरीक्षण के दौरान आरोप लगाया गया कि कुछ अतिथि शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति पोर्टल पर दर्ज थी, लेकिन वे विद्यालय में मौजूद नहीं थे। इस मामले के सामने आने के बाद विद्यालय की कार्यप्रणाली और ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली की निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं।

औचक निरीक्षण में सामने आई कथित अनियमितता

जानकारी के अनुसार, ग्राम भरनाखेड़ा स्थित शासकीय विद्यालय में शिक्षण कार्य चल रहा था। इसी दौरान अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों द्वारा विद्यालय का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में मौजूद शिक्षकों और ऑनलाइन दर्ज उपस्थिति का मिलान किया गया।

निरीक्षणकर्ताओं का आरोप है कि ऑनलाइन पोर्टल पर कुछ अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज थी, लेकिन वास्तविक स्थिति में वे विद्यालय में उपस्थित नहीं पाए गए। इस स्थिति को लेकर निरीक्षण दल ने नाराजगी जताई और इसे विद्यार्थियों के हितों से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

विद्यालय में वर्तमान में तीन अतिथि शिक्षकों के नाम ऑनलाइन उपस्थिति पोर्टल पर दर्ज बताए गए हैं। इनमें श्रीमती नीलम सैनी, श्री मुकेश विश्वकर्मा और श्री बाबूलाल अहिरवार शामिल हैं।

अनुपस्थित शिक्षक की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होने का आरोप

निरीक्षण के दौरान अतिथि शिक्षक बाबूलाल अहिरवार के विद्यालय में अनुपस्थित मिलने की बात सामने आई। इसके बावजूद उनकी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होने का आरोप लगाया गया।

निरीक्षणकर्ताओं का कहना है कि यदि कोई शिक्षक विद्यालय में उपस्थित नहीं है और फिर भी उसकी उपस्थिति दर्ज की जाती है तो यह व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और शिक्षा व्यवस्था कमजोर हो सकती है।

हालांकि, मामले में संबंधित शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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प्रधानाध्यापक से मांगी जानकारी

निरीक्षण के बाद विद्यालय के प्रधानाध्यापक दिनेश सेन से पूरे मामले को लेकर जानकारी मांगी गई। निरीक्षणकर्ताओं के अनुसार प्रधानाध्यापक इस संबंध में कोई संतोषजनक जवाब या आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके।

विद्यालय में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया, शिक्षकों की वास्तविक मौजूदगी और निगरानी व्यवस्था को लेकर जवाब नहीं मिलने के बाद संगठन के पदाधिकारियों ने उच्च अधिकारियों से जांच की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों की नियमित उपस्थिति बेहद आवश्यक है। यदि शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुंचते हैं तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ता है।

ग्रामीणों और पदाधिकारियों की मौजूदगी में हुआ निरीक्षण

औचक निरीक्षण के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्थानीय ग्रामीण और संगठन के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। मौके पर अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा, नगर अध्यक्ष नीलेश धाकड़, ग्राम सरपंच राकेश शर्मा सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।

इसके अलावा विद्यालय से जुड़े शिक्षक और ग्रामीण भी इस दौरान मौजूद रहे। निरीक्षण के बाद ग्रामीणों ने विद्यालय की व्यवस्था में सुधार और नियमित निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी विद्यालय गांव के बच्चों की शिक्षा का प्रमुख माध्यम होते हैं। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की लापरवाही विद्यार्थियों के हितों के खिलाफ है।

विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा बताया मामला

अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में अनुशासन और ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण है। यदि उपस्थिति जैसी मूल व्यवस्था में ही लापरवाही होगी तो इसका प्रभाव शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ना स्वाभाविक है।

संगठन का कहना है कि विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे नियमित रूप से उपस्थित रहकर विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान करें। केवल ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वास्तविक रूप से विद्यालय में उपस्थित रहकर शिक्षण कार्य करना जरूरी है।

उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।

संगठन ने दी आंदोलन की चेतावनी

अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद मध्य भारत प्रांत के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि यदि मामले में जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन द्वारा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के समक्ष विरोध दर्ज कराया जाएगा।

उन्होंने मांग की कि फर्जी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने वाले जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों के कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

शिक्षा विभाग की जांच पर टिकी नजर

मामला सामने आने के बाद अब शिक्षा विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ग्रामीणों और संगठन की मांग है कि पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

यदि जांच में ऑनलाइन उपस्थिति और वास्तविक उपस्थिति में अंतर पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो संबंधित पक्ष को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।

फिलहाल ग्रामीणों और संगठन की नजर शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। सभी की मांग है कि विद्यालयों में ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए जिससे विद्यार्थियों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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