IIST इंदौर का 24 घंटे का ‘अप्रतिम सृजन कुंभ 2026’ बना नवाचार का महाकुंभ, 800 विद्यार्थियों ने 130 टीमों में विकसित किए भविष्य के तकनीकी समाधान
इंदौर। तकनीक, नवाचार और शोध को नई दिशा देने की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIST), इंदौर ने अपने वार्षिक 24 घंटे के फ्लैगशिप इंटरनल हैकाथॉन “अप्रतिम सृजन कुंभ 2026” का सफल आयोजन किया। इस भव्य आयोजन में संस्थान के 800 से अधिक विद्यार्थियों ने 130 टीमों के रूप में भाग लेकर समाज और उद्योग जगत की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए अत्याधुनिक तकनीकी मॉडल एवं नवाचार प्रस्तुत किए।
24 घंटे तक लगातार चले इस हैकाथॉन में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक सोच, इंजीनियरिंग कौशल, टीमवर्क और डिज़ाइन थिंकिंग का शानदार प्रदर्शन किया। आयोजन का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करना और उन्हें भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना भी था।
24 घंटे तक चला नवाचार का सफर
“अप्रतिम सृजन कुंभ 2026” का शुभारंभ 17 जुलाई को सुबह 11 बजे हुआ और अगले 24 घंटों तक लगातार प्रतिभागी अपने प्रोजेक्ट्स पर कार्य करते रहे। इस दौरान छात्रों ने सीमित समय में विचार विकसित करने, प्रोटोटाइप तैयार करने और विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत करने की चुनौती स्वीकार की।
पूरे आयोजन के दौरान परिसर में उत्साह, ऊर्जा और नवाचार का वातावरण देखने को मिला। विभिन्न इंजीनियरिंग शाखाओं के विद्यार्थियों ने एक साथ मिलकर बहु-विषयक (Interdisciplinary) टीमों का गठन किया और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से समाज की जटिल समस्याओं के समाधान विकसित किए।
800 विद्यार्थी और 130 टीमों की रिकॉर्ड सहभागिता
इस वर्ष के हैकाथॉन में 130 टीमों के साथ 800 से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी रही, जिसने इसे मध्य भारत ही नहीं बल्कि क्षेत्र के सबसे बड़े इंटरनल इंजीनियरिंग हैकाथॉनों में शामिल कर दिया।
संस्थान प्रबंधन के अनुसार यह आयोजन विद्यार्थियों में अनुभवात्मक शिक्षा (Experiential Learning), नवाचार, अनुसंधान और उद्योगोन्मुखी कौशल विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सहभागिता संस्थान में नवाचार संस्कृति के लगातार मजबूत होने का प्रमाण है।
छह प्रमुख क्षेत्रों में तैयार किए तकनीकी समाधान
हैकाथॉन के दौरान विद्यार्थियों ने वर्तमान समय की प्रमुख चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए छह महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपने प्रोजेक्ट विकसित किए—
- एग्रीटेक (AgriTech) – आधुनिक कृषि और स्मार्ट फार्मिंग समाधान।
- स्पेस टेक्नोलॉजी – अंतरिक्ष विज्ञान और उपग्रह आधारित तकनीक।
- हेल्थकेयर – स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने वाले समाधान।
- डिजास्टर मैनेजमेंट – प्राकृतिक एवं मानव निर्मित आपदाओं के लिए स्मार्ट तकनीकी मॉडल।
- साइबर सेफ्टी – डिजिटल सुरक्षा एवं साइबर अपराधों की रोकथाम।
- क्लीन एंड ग्रीन एनवायरनमेंट – पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास आधारित तकनीक।
इन सभी विषयों पर तैयार किए गए मॉडल वास्तविक समस्याओं के समाधान पर आधारित थे, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), ऑटोमेशन और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया गया।
देश की अग्रणी कंपनियों के विशेषज्ञों ने किया मूल्यांकन
प्रतिभागी टीमों द्वारा प्रस्तुत प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन देश की प्रतिष्ठित तकनीकी कंपनियों और उद्योग विशेषज्ञों द्वारा किया गया।
इस अवसर पर Oracle, Microsoft, Tata Consultancy Services (TCS), Impetus, InfoBeans, Lirisoft सहित अन्य अग्रणी संस्थानों से जुड़े 12 विशिष्ट जूरी सदस्य उपस्थित रहे।
जूरी ने प्रत्येक प्रोजेक्ट का मूल्यांकन निम्न आधारों पर किया—
- तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility)
- नवाचार (Innovation)
- वास्तविक उपयोगिता (Practical Utility)
- विस्तार क्षमता (Scalability)
- उद्योग में संभावित उपयोग
- सामाजिक प्रभाव
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि कई परियोजनाओं में स्टार्टअप बनने की क्षमता दिखाई देती है।

अनुभवी मेंटर्स ने दिया लगातार मार्गदर्शन
हैकाथॉन की विशेषता यह रही कि प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों को उद्योग जगत के 12 अनुभवी मेंटर्स का निरंतर मार्गदर्शन मिला।
मेंटर्स ने टीमों को तकनीकी चुनौतियों का समाधान खोजने, प्रोटोटाइप को बेहतर बनाने, बिजनेस मॉडल तैयार करने तथा प्रस्तुतीकरण को प्रभावी बनाने में सहयोग दिया।
इस मार्गदर्शन के कारण प्रतिभागी अपने विचारों को अधिक व्यवहारिक और प्रभावशाली तकनीकी समाधान में बदलने में सफल रहे।
विजेताओं के लिए ₹62 हजार की पुरस्कार राशि
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों के लिए कुल ₹62,000 की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई।
संस्थान का मानना है कि पुरस्कार विद्यार्थियों को केवल सम्मान ही नहीं देते, बल्कि उन्हें और अधिक नवाचार करने तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रेरित भी करते हैं।
अरुण एस. भटनागर ने बताया भविष्य के इंजीनियर तैयार करने का मंच
स्पर्श एवं IIST ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स के ग्रुप एडवाइजर अरुण एस. भटनागर ने कहा कि इंटरनल हैकाथॉन विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि IIST की Outcome-Based Education (OBE) प्रणाली विद्यार्थियों में व्यावहारिक ज्ञान, विश्लेषणात्मक सोच, डिज़ाइन थिंकिंग, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और समस्या समाधान जैसी महत्वपूर्ण क्षमताओं का विकास करती है।
उन्होंने कहा—
“अप्रतिम सृजन कुंभ केवल कोडिंग प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह ऐसा नवाचार मंच है जहां विद्यार्थी वास्तविक समस्याओं को समझते हैं, टीम के साथ समाधान विकसित करते हैं और भविष्य की तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि आज AI, Industry 5.0, Intelligent Automation और AI आधारित रोबोटिक सिस्टम्स तेजी से विकसित हो रहे हैं। ऐसे समय में इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को भविष्य के उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप सक्षम इंजीनियर बनने में मदद करते हैं।
आखिर क्या होता है हैकाथॉन?
हैकाथॉन एक ऐसी नवाचार प्रतियोगिता होती है जिसमें प्रतिभागी सीमित समय के भीतर टीम बनाकर किसी वास्तविक समस्या का तकनीकी समाधान विकसित करते हैं।
इस प्रक्रिया में प्रतिभागियों को—
- समस्या की पहचान
- समाधान की रूपरेखा
- प्रोटोटाइप निर्माण
- प्रस्तुतीकरण
- विशेषज्ञों के प्रश्नों का उत्तर
जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों में रचनात्मकता, टीमवर्क, डिजाइन थिंकिंग, रैपिड प्रोटोटाइपिंग तथा इंजीनियरिंग ज्ञान के व्यवहारिक उपयोग को बढ़ावा देती है।
IIST में नवाचार संस्कृति को मिल रहा बढ़ावा
IIST में हैकाथॉन केवल वार्षिक कार्यक्रम नहीं बल्कि संस्थान की Experiential Learning प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
संस्थान नियमित रूप से—
- Skill Improvement Groups (SIGs)
- Ideathon
- Innovation Challenge
- Internal Hackathon
- National Hackathon Preparation
जैसी गतिविधियों का आयोजन करता है, जिससे विद्यार्थियों की तकनीकी दक्षता और नेतृत्व क्षमता में निरंतर वृद्धि होती है।
राष्ट्रीय हैकाथॉनों में IIST की शानदार उपलब्धियां
IIST ने पिछले कुछ वर्षों में देश की अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।
Smart India Hackathon (2020–2025) में संस्थान की 25 टीमें ग्रैंड फिनाले तक पहुंचीं, जिनमें से 9 टीमों ने जीत दर्ज कर ₹9.25 लाख की पुरस्कार राशि अर्जित की।
इसके अलावा—
- National Civil Engineering Hackathon 2025 (IIT गांधीनगर) – 5 टीमें फाइनल में, 1 विजेता।
- S&T Viksit Bharat Hackathon (IISF) 2025 – 2 टीमें फाइनल में, 1 टीम तीसरे स्थान पर।
- S&T Viksit Bharat Hackathon 2024 (IIT गुवाहाटी) – 2 विजेता टीमें।
- National Suvidha Hackathon 2026 – 1 विजेता टीम, ₹3 लाख पुरस्कार।
- I-Hack Hackathon 2025 (IIT बॉम्बे) – 1 विजेता टीम, ₹1 लाख पुरस्कार।
- National AI/ML Hackathon 2026 (IIT हैदराबाद) – 1 विजेता टीम, ₹3 लाख पुरस्कार।
- Tech Hackathon 2025 (Smart City Indore) – 1 विजेता टीम, ₹4 लाख पुरस्कार।
- Clear Skies Hackathon 2025 (IIT तिरुपति) – 1 टीम ग्रैंड फिनाले के लिए चयनित।
- Idea-One National One Health Hackathon 2025 – 1 टीम ग्रैंड फिनाले तक पहुंची।
ये उपलब्धियां संस्थान की मजबूत शोध संस्कृति और गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा का प्रमाण हैं।
नवाचार से राष्ट्र निर्माण की दिशा में मजबूत कदम
“अप्रतिम सृजन कुंभ 2026” केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ऐसा मंच है जो विद्यार्थियों को समस्याओं को अवसर में बदलने की सोच देता है। यहां विकसित होने वाले अनेक विचार भविष्य में स्टार्टअप, सामाजिक नवाचार और उद्योग आधारित समाधान का रूप ले सकते हैं।
IIST का यह प्रयास स्पष्ट करता है कि संस्थान केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे इंजीनियर तैयार कर रहा है जो तकनीक के माध्यम से समाज और राष्ट्र की वास्तविक समस्याओं का समाधान विकसित करने में सक्षम हों।
नवाचार, शोध उत्कृष्टता, उद्योगोन्मुखी शिक्षा और भविष्य की तकनीकों पर केंद्रित इस प्रकार की पहल के माध्यम से इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIST) मध्य भारत के अग्रणी इंजीनियरिंग संस्थानों में अपनी विशिष्ट पहचान को और अधिक मजबूत कर रहा है तथा “आत्मनिर्भर भारत” और “विकसित भारत” के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।
