ग्वालियर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम: श्री दिगंबर जैन स्वर्ण मंदिर में वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न, 81 कलशों की घटयात्रा के साथ नवीन वेदियों में विराजित हुईं भगवान जिनेंद्र की प्रतिमाएं
ग्वालियर। श्री दिगंबर पार्श्वनाथ जैन स्वर्ण मंदिर कमेटी एवं जैन स्वर्ण महिला मंडल, ग्वालियर के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को पंचमेरू स्थापना दिवस के पावन अवसर पर भव्य वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंदिर की जीर्णोद्धारित वेदियों का विधिवत शुद्धिकरण, याग महामंडल विधान, 81 मंगल कलशों की भव्य घटयात्रा, भगवान जिनेंद्र का अभिषेक तथा नवीन वेदियों में प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा जैसे अनेक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।
पूरे मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र के जयकारों के साथ पूजा-अर्चना कर धर्मलाभ अर्जित किया। समारोह में बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठजन, महिला मंडल की सदस्याएं, युवा एवं श्रद्धालु परिवार सहित उपस्थित रहे।
पंचमेरू स्थापना दिवस पर हुआ भव्य धार्मिक आयोजन
पंचमेरू स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित इस विशेष धार्मिक कार्यक्रम का उद्देश्य मंदिर की जीर्णोद्धारित वेदियों में भगवान जिनेंद्र की प्रतिमाओं को पुनः विधिवत प्रतिष्ठित करना था। धार्मिक परंपराओं एवं शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार सभी अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ हो गया था। भक्ति संगीत, मंगलाचरण और मंत्रोच्चारण के बीच पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार दिखाई दिया। मंदिर को आकर्षक फूलों, रंग-बिरंगी सजावट और विद्युत रोशनी से सजाया गया था, जिससे पूरा परिसर दिव्यता का अनुभव करा रहा था।
81 मंगल कलशों के साथ निकली भव्य घटयात्रा
वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव का सबसे आकर्षक और श्रद्धापूर्ण आयोजन 81 मंगल कलशों की घटयात्रा रही। जैन स्वर्ण महिला मंडल की महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित होकर सिर पर मंगल कलश धारण किए और मंदिर परिसर में भव्य शोभायात्रा निकाली।
घटयात्रा के दौरान महिलाएं मंगल गीत गाती हुई आगे बढ़ रही थीं। श्रद्धालु भगवान जिनेंद्र के जयकारे लगाते हुए यात्रा में शामिल हुए। पूरे मार्ग पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया।
घटयात्रा मंदिर परिसर पहुंचने के बाद वैदिक एवं जैन परंपरा के अनुसार मंगल कलशों के पवित्र जल से नवीन वेदियों का शुद्धिकरण किया गया। मंत्रोच्चारण के बीच सम्पन्न इस अनुष्ठान ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
याग महामंडल विधान में श्रद्धालुओं ने चढ़ाए अर्घ्य
वेदी प्रतिष्ठा कार्यक्रम के अंतर्गत याग महामंडल विधान का भी आयोजन किया गया। जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि इस विधान के पुण्यार्जक परिवार प्रमोद कुमार पाटनी एवं नीलिमा पाटनी, शिल्पी पाटनी, अंकित एवं अनामिका पाटनी, मोक्ष पाटनी तथा शौर्य पाटनी परिवार रहे।
पुण्यार्जक परिवार द्वारा सबसे पहले भगवान जिनेंद्र की वेदी पर प्रथम अर्घ्य समर्पित किया गया। इसके पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं ने क्रमवार भगवान के समक्ष अर्घ्य अर्पित कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
पंडित अनुभाव जैन के मार्गदर्शन में हुआ अभिषेक
धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन पंडित अनुभाव जैन के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। उनके निर्देशन में भगवान जिनेंद्र का पवित्र कलशों से अभिषेक कराया गया। अभिषेक के दौरान वातावरण भगवान के जयघोष, मंत्रोच्चारण और धार्मिक संगीत से गूंज उठा।
श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा और भक्तिभाव से भगवान का जलाभिषेक किया तथा विश्व शांति, समाज की उन्नति और परिवारों के सुख-समृद्धि की कामना की।
अष्टद्रव्य से हुई पूजन-अर्चना
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं एवं पुरुषों ने सामूहिक रूप से अष्टद्रव्य पूजन संपन्न की। भगवान जिनेंद्र के समक्ष चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप, फल एवं जल सहित अष्टद्रव्यों से विधिवत पूजा-अर्चना की गई।
भक्तिमय भजनों और स्तुतियों के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान के समक्ष महाअर्घ्य अर्पित किए। मंदिर परिसर में गूंजते भक्ति गीतों ने कार्यक्रम को और अधिक दिव्य बना दिया।
नवीन वेदियों में विराजित हुईं भगवान जिनेंद्र की प्रतिमाएं

वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह रहा जब जीर्णोद्धारित नवीन वेदियों में भगवान जिनेंद्र की प्रतिमाओं को विधिवत विराजित किया गया।
श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर स्वामी, पार्श्वनाथ भगवान, आदिनाथ भगवान, मुनिसुव्रतनाथ भगवान, चंद्रप्रभु भगवान तथा शांतिनाथ भगवान सहित अन्य तीर्थंकरों की प्रतिमाओं को जयकारों के बीच नवीन वेदियों में स्थापित किया।
प्रतिमा प्रतिष्ठा के दौरान पूरा मंदिर परिसर “जय जिनेंद्र”, “भगवान महावीर स्वामी की जय” और अन्य धार्मिक जयघोषों से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति में भावविभोर होकर नृत्य करते हुए भगवान के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते नजर आए।
पंचमेरू की स्थापना कर अर्पित किया गया चांदी का छत्र
कार्यक्रम के दौरान दूसरी वेदी पर पंचमेरू की स्थापना भी विधिवत संपन्न कराई गई। धार्मिक विधानों के अनुसार पंचमेरू को विराजित करने के पश्चात उस पर चांदी का छत्र अर्पित किया गया।
यह क्षण श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक अनुभव का रहा। समाजजनों ने भगवान के समक्ष नमन कर परिवार और समाज की मंगलकामना की।
श्रद्धालुओं में दिखा अपार उत्साह

पूरे आयोजन के दौरान समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता देखने को मिली। महिलाओं, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों ने उत्साहपूर्वक धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए पूजा-अर्चना की विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। कार्यक्रम के दौरान अनुशासन एवं धार्मिक गरिमा का विशेष ध्यान रखा गया।
समाज के अनेक गणमान्यजन रहे उपस्थित
समारोह में श्री दिगंबर जैन स्वर्ण मंदिर कमेटी के अध्यक्ष प्रवीण गंगवाल ने सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों और आयोजन में सहयोग देने वाले समाजजनों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर जैन स्वर्ण महिला मंडल की अध्यक्ष मोनिका सेठी, सचिव अर्पिता अजमेरा, कोषाध्यक्ष मोनिका पाटनी सहित मंदिर परिवार के निर्मल पाटनी, अनिल शाह, सुरेंद्र सोनी, राजकुमार सेठी, निर्मल सोनी, प्रमोद सोगानी, अखिलेश सोनी, आदित्य गंगवाल, शोभित पाटनी, राकेश सोगानी, वसंत कुमार बड़जात्या, अनूप सोगानी, रतन अजमेरा, अशोक कटारिया, संदीप पाटनी सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
धर्म, संस्कृति और सामाजिक एकता का बना संदेश
वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि समाज को एक सूत्र में जोड़ने का भी माध्यम बना। महिलाओं की सक्रिय सहभागिता, युवाओं की सेवा भावना और समाजजनों की एकजुटता ने यह संदेश दिया कि धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में सामूहिक प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
श्रद्धालुओं ने आयोजन की भव्यता की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। पूरे दिन चले धार्मिक अनुष्ठानों के पश्चात वातावरण भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र के चरणों में सुख, शांति एवं समृद्धि की प्रार्थना की।
वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के समापन पर भगवान जिनेंद्र की मंगल आरती, शांति पाठ और सामूहिक प्रार्थना के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को नई ऊर्जा प्रदान की बल्कि जैन समाज की सांस्कृतिक परंपराओं को भी नई मजबूती प्रदान करने का कार्य किया।
