Madhya Pradesh वन विभाग में प्रमोशन को लेकर विवाद, कार्यवाहक अधिकारियों को बनाए रखने की मांग तेज
पदोन्नति प्रक्रिया के बीच कार्यवाहक व्यवस्था पर उठे सवाल
भोपाल। Madhya Pradesh वन विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया के बीच कार्यवाहक अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विभाग में पदोन्नति नियम 2025 के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमित पदों पर पदोन्नति देने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन इसी दौरान कार्यवाहक पदों पर जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर मतभेद सामने आए हैं।
वन विभाग के एक वर्ग का मानना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमित पदोन्नति नहीं मिली है, उन्हें कार्यवाहक पदों से हटाया जाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर दूसरा पक्ष यह तर्क दे रहा है कि जब तक अगली नियमित पदोन्नति व्यवस्था पूरी नहीं हो जाती, तब तक वर्तमान कार्यवाहक अधिकारियों को उनके पदों पर बने रहने दिया जाना चाहिए, ताकि विभागीय कामकाज प्रभावित न हो।
पदोन्नति नियम 2025 के तहत चल रही प्रक्रिया
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लागू किए गए पदोन्नति नियम 2025 के तहत विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। वन विभाग में भी विभिन्न स्तरों के पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है।
इस प्रक्रिया के बीच कार्यवाहक व्यवस्था में तैनात अधिकारियों की स्थिति को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई अधिकारी लंबे समय से कार्यवाहक पदों पर जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। अब नियमित पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसे अधिकारियों को पद पर बनाए रखा जाए या उन्हें हटाकर नई व्यवस्था लागू की जाए।
कार्यवाहक अधिकारियों को बनाए रखने के पक्ष में एसोसिएशन
स्टेट फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर्स (राजपत्रित) एसोसिएशन ने इस मामले में वन विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर अपनी मांग रखी है। एसोसिएशन ने अनुरोध किया है कि वर्तमान कार्यवाहक अधिकारियों को अगली नियमित पदोन्नति व्यवस्था तक पद पर बने रहने का अवसर दिया जाए।
एसोसिएशन का कहना है कि कार्यवाहक अधिकारियों ने लंबे समय से विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है और प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से संचालित किया है। अचानक कार्यवाहक जिम्मेदारियों से हटाने की स्थिति में विभागीय कार्यप्रणाली पर असर पड़ सकता है।
एसोसिएशन ने यह भी आग्रह किया है कि नियमित पदोन्नति प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी तरह की जल्दबाजी में कार्रवाई न की जाए और अधिकारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए।
हटाने की मांग करने वाला पक्ष भी सक्रिय
दूसरी ओर, विभाग में एक वर्ग ऐसा भी है जो नियमों के अनुसार कार्यवाही किए जाने की मांग कर रहा है। इस पक्ष का तर्क है कि जब नियमित पदोन्नति प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो कार्यवाहक व्यवस्था में लंबे समय से बने अधिकारियों की स्थिति की समीक्षा की जानी चाहिए।
उनका कहना है कि नियमित पदोन्नति से वंचित अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यवाहक पदों पर बनाए रखना अन्य कर्मचारियों के हितों को प्रभावित कर सकता है। विभागीय नियमों और पदोन्नति प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती
वन विभाग जैसे बड़े विभाग में अधिकारियों की जिम्मेदारियां काफी महत्वपूर्ण होती हैं। वन संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन, क्षेत्रीय प्रशासन और विभागीय योजनाओं के संचालन के लिए अनुभवी अधिकारियों की आवश्यकता होती है।
ऐसे में कार्यवाहक अधिकारियों को हटाने या बनाए रखने का निर्णय विभाग के लिए एक चुनौती बन गया है। एक ओर जहां नियमों का पालन जरूरी है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता भी बनाए रखना आवश्यक है।
विभाग के सामने यह संतुलन बनाने की चुनौती है कि पदोन्नति प्रक्रिया भी नियमानुसार पूरी हो और विभागीय कार्यों में किसी प्रकार का व्यवधान भी न आए।
अधिकारियों और कर्मचारियों की नजरें विभागीय निर्णय पर
वन विभाग में चल रहे इस विवाद के बीच अब सभी की नजरें विभाग के अगले निर्णय पर टिकी हुई हैं। कार्यवाहक अधिकारियों के भविष्य को लेकर लिया जाने वाला फैसला आने वाले समय में विभागीय व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
यदि कार्यवाहक अधिकारियों को बनाए रखने का निर्णय लिया जाता है तो इससे वर्तमान व्यवस्था में स्थिरता बनी रह सकती है। वहीं यदि उन्हें हटाने का फैसला होता है तो नए अधिकारियों को जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया शुरू होगी।
फिलहाल विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया जारी है और कार्यवाहक अधिकारियों को लेकर अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मध्यप्रदेश वन विभाग में पदोन्नति और कार्यवाहक व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ विवाद आने वाले दिनों में और स्पष्ट हो सकता है। विभागीय अधिकारियों, कर्मचारी संगठनों और एसोसिएशन की मांगों के बीच सरकार और विभाग को ऐसा निर्णय लेना होगा जिससे नियमों का पालन भी हो और प्रशासनिक व्यवस्था भी सुचारू बनी रहे।
इस पूरे मामले में विभाग की ओर से आने वाले निर्देश महत्वपूर्ण होंगे। पदोन्नति प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कार्यवाहक अधिकारियों की स्थिति को लेकर अंतिम तस्वीर साफ हो पाएगी।
