Bandhavgarh Tiger Reserve में बाघ शावक का शव मिलने से मचा हड़कंप, सिर की हड्डी में फ्रैक्चर; वन विभाग ने शुरू की गहन जांच
संभागीय ब्यूरो प्रमुख : सुनील रैदास
धमोखर परिक्षेत्र के चापर राजस्व क्षेत्र में मिला मादा बाघ शावक का शव
उमरिया। विश्व प्रसिद्ध Bandhavgarh Tiger Reserve में एक मादा बाघ शावक का शव मिलने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है। शुक्रवार को टाइगर रिजर्व के धमोखर परिक्षेत्र से जुड़े चापर राजस्व क्षेत्र में करीब 5 माह की मादा बाघ शावक मृत अवस्था में मिली। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश और दुनिया में बाघों की बढ़ती संख्या और संरक्षण प्रयासों के लिए जाना जाता है। ऐसे में एक बाघ शावक की मौत की सूचना मिलने के बाद वन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और मृत्यु के कारणों का पता लगाने के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
मौके पर पहुंची विशेषज्ञों की टीम
शावक का शव मिलने की सूचना मिलते ही टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारी, वन्यजीव चिकित्सकों की टीम, डॉग स्क्वॉड और मेटल डिटेक्टर टीम को घटनास्थल पर भेजा गया। विशेषज्ञों की टीम ने क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया और आसपास के हालातों की जांच की।
जांच टीम द्वारा घटनास्थल से जुड़े सभी संभावित साक्ष्यों को एकत्रित करने का प्रयास किया गया। वन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि शावक की मौत किसी प्राकृतिक कारण से हुई है या इसके पीछे कोई अन्य वजह है।
प्रारंभिक जांच में सिर की हड्डी में फ्रैक्चर
वन्यजीव चिकित्सकों द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में बाघ शावक के सिर की हड्डी में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह फ्रैक्चर किस कारण से हुआ और शावक की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केवल प्रारंभिक जांच के आधार पर मौत के कारणों का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के परिणामों का इंतजार किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार शनिवार को शावक का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मृत्यु के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। इसके बाद नियमानुसार शावक के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

बाघों की मॉनिटरिंग के बीच सामने आई घटना
वर्तमान में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की गणना और उनकी गतिविधियों की मॉनिटरिंग का कार्य जारी है। इसी दौरान वन विभाग को शावक के मृत पाए जाने की जानकारी मिली।
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने जांच टीम से घटना की जानकारी ली और पूरे मामले की प्रगति की समीक्षा की।
वन विभाग का कहना है कि बाघ संरक्षण के लिए प्रत्येक बाघ और शावक की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए इस घटना की जांच को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
पोचिंग की संभावना पर भी नजर
वन अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में शावक के शरीर पर शिकार यानी पोचिंग से जुड़े कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। जांच के दौरान शावक के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे फिलहाल अवैध शिकार की संभावना कम दिखाई दे रही है।
हालांकि वन विभाग किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं कर रहा है। घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है, जिसमें प्राकृतिक कारण, दुर्घटना या किसी अन्य वजह से हुई मौत की संभावनाओं को भी शामिल किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही सामने आएगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि शावक की मौत का वास्तविक कारण क्या था।
वन्यजीव सुरक्षा को लेकर बढ़ाई गई सतर्कता
घटना के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत कर दिया गया है। वन विभाग द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने और मॉनिटरिंग को बेहतर करने के निर्देश दिए गए हैं।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बड़ी संख्या में बाघ और अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना वन विभाग की प्रमुख जिम्मेदारी है। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी वन्यजीव की असामान्य मौत को गंभीरता से लिया जाता है और प्रत्येक मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाती है।
संरक्षण प्रयासों के बीच चुनौती
बाघ संरक्षण के क्षेत्र में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां वन विभाग लगातार बाघों की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण और निगरानी के लिए कई स्तरों पर कार्य कर रहा है।
ऐसी घटनाएं वन्यजीव संरक्षण के सामने आने वाली चुनौतियों को भी उजागर करती हैं। इसलिए जरूरी है कि वन विभाग, स्थानीय समुदाय और सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहें।
फिलहाल वन विभाग की टीम जांच में जुटी हुई है और सभी की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि पांच माह की मादा बाघ शावक की मौत किन कारणों से हुई।
