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MP-CG Pensioners DR New Rule 2026: पेंशनर्स को बड़ी राहत, अब महंगाई राहत बढ़ाने के लिए नहीं लेनी होगी दूसरे राज्य की मंजूरी

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Published On: 18 July 2026
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— MP-CG Pensioners Good News: मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनर्स को बड़ी राहत!

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MP-CG Pensioners DR New Rule 2026: पेंशनर्स को बड़ी राहत, अब महंगाई राहत बढ़ाने के लिए नहीं लेनी होगी दूसरे राज्य की मंजूरी

MPऔर छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनर्स के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। दोनों राज्यों की सरकारों ने महंगाई राहत (Dearness Relief-DR) बढ़ाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब पेंशनर्स को महंगाई राहत जारी होने के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार ने दूसरे राज्य की सहमति लेने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है।

इस फैसले के बाद दोनों राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर निर्णय लेकर महंगाई राहत बढ़ाने के संबंध में कार्यकारी आदेश जारी कर सकेंगी। इससे पेंशनर्स को समय पर बढ़ी हुई राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है। यह आदेश 17 जुलाई 2026 से प्रभावी माना जाएगा।

दूसरे राज्य की मंजूरी लेने की व्यवस्था खत्म

अब तक MP और छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स को महंगाई राहत में बढ़ोतरी के लिए दोनों राज्यों के बीच सहमति का इंतजार करना पड़ता था। राज्य पुनर्गठन के बाद बनी इस व्यवस्था के कारण कई बार महंगाई राहत जारी होने में देरी होती थी।

वित्त विभाग की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार, अब किसी भी राज्य को महंगाई राहत घोषित करने से पहले दूसरे राज्य की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। दोनों राज्य अपने स्तर पर फैसला लेकर पेंशनर्स को बढ़ी हुई राहत का लाभ दे सकेंगे।

हालांकि, नए नियमों के तहत कोई भी राज्य केंद्र सरकार द्वारा तय महंगाई राहत की दर से अधिक भुगतान नहीं कर सकेगा। साथ ही, यदि किसी निर्णय से राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय भार आता है, तो इसकी जानकारी दूसरे राज्य को पत्र के माध्यम से देनी होगी।

पेंशनर्स संगठनों ने फैसले का किया स्वागत

MP पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने कहा कि लंबे समय से इस व्यवस्था में बदलाव की मांग की जा रही थी।

उन्होंने बताया कि दूसरे राज्य की सहमति की प्रक्रिया के कारण पेंशनर्स को कई बार महीनों तक महंगाई राहत का इंतजार करना पड़ता था। इस मुद्दे को लेकर एसोसिएशन ने जबलपुर हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी।

संगठन का कहना है कि सरकार के इस निर्णय से भविष्य में महंगाई राहत जारी करने की प्रक्रिया आसान और तेज हो जाएगी।

हाईकोर्ट में लंबित है मामला

MP पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49 को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में मामला लंबित है। पेंशनर्स एसोसिएशन का कहना है कि अधिनियम में दूसरे राज्य की सहमति लेने का स्पष्ट प्रावधान नहीं था, लेकिन पिछले करीब 25 वर्षों से इसी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा था।

एसोसिएशन ने कोर्ट में तर्क दिया था कि महंगाई राहत पेंशनर्स का अधिकार है और इसमें अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने भी इस मामले में केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के सामान्य प्रशासन एवं वित्त विभागों से जवाब मांगा था। कोर्ट ने पूछा था कि आखिर महंगाई राहत देने से पहले दूसरे राज्य की सहमति क्यों जरूरी है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई संयुक्त जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है।

बकाया महंगाई राहत भुगतान की मांग

पेंशनर्स संगठनों ने सरकार के नए फैसले का स्वागत करने के साथ-साथ लंबित महंगाई राहत के भुगतान की मांग भी उठाई है।

संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि कई वर्षों से पेंशनर्स को महंगाई राहत की बकाया राशि नहीं मिल पाई है। उन्होंने सरकार से लंबित डीआर का जल्द भुगतान करने की मांग की है, ताकि बुजुर्ग पेंशनर्स को आर्थिक राहत मिल सके।

MP-सीजी में कितने हैं पुराने पेंशनर्स?

MP पेंशन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक प्रदेश में 4 लाख 40 हजार से अधिक पेंशनर्स हैं। इनमें करीब 19 हजार ऐसे पेंशनर्स हैं जो 1 नवंबर 2000 से पहले के हैं, यानी मध्यप्रदेश विभाजन से पहले सेवा में रहे कर्मचारी हैं।

वहीं छत्तीसगढ़ में ऐसे पुराने पेंशनर्स की संख्या करीब 7 हजार बताई जा रही है। दोनों राज्यों को मिलाकर इनकी संख्या लगभग 26 हजार है।

इसके अलावा मध्यप्रदेश विभाजन के बाद करीब 4.13 लाख कर्मचारी रिटायर हुए हैं, जो कुल पेंशनर्स का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा हैं।

सरकार के फैसले के पीछे क्या वजह?

पेंशनर्स एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका और लंबे समय से चल रही मांगों के बाद सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव किया है। एसोसिएशन का कहना था कि 1 नवंबर 2000 के बाद रिटायर हुए कर्मचारियों पर भी दूसरे राज्य की सहमति की शर्त लागू करना उचित नहीं है।

संगठन ने सूचना के अधिकार के तहत राज्य पुनर्गठन अधिनियम से जुड़ी जानकारी भी मांगी थी। हालांकि, जानकारी नहीं मिलने के बाद केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की गई।

सुप्रीम कोर्ट भी दे चुका है अहम टिप्पणी

पेंशनर्स एसोसिएशन ने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया है। संगठन के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि पेंशन कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार है, इसे किसी बोनस या कृपा के रूप में नहीं देखा जा सकता।

नए आदेश के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स को भविष्य में महंगाई राहत बढ़ोतरी के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हो जाएगी।

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