19 जुलाई को होगी ‘नशे से दूरी है जरूरी’ युवा संगोष्ठी, युवाओं से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील
राज्यव्यापी नशामुक्ति जनजागरण अभियान के तहत सागर में आयोजित होगी विशेष युवा संगोष्ठी
संवाददाता: अजीज ख़ान खुरई
सागर। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा संचालित राज्यव्यापी ‘नशे से दूरी है जरूरी’ जनजागरण अभियान के तहत आयोजित की जाने वाली युवा संगोष्ठी अब 17 जुलाई के स्थान पर 19 जुलाई को आयोजित होगी। कार्यक्रम की तिथि में बदलाव की जानकारी युवा नेता अविराज सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि यह संगोष्ठी प्रदेश सरकार के नशामुक्त मध्य प्रदेश के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी।
अविराज सिंह के अनुसार, यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि युवाओं को समाज में सकारात्मक बदलाव का सहभागी बनाने का प्रयास है। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों तथा विभिन्न युवा संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
15 से 30 जुलाई तक चल रहा है राज्यव्यापी जनजागरण अभियान
अविराज सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 15 जुलाई से 30 जुलाई तक पूरे मध्य प्रदेश में नशे के खिलाफ व्यापक जनजागरण अभियान संचालित किया जा रहा है।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए जनभागीदारी को बढ़ावा देना है।
राज्य सरकार का मानना है कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि परिवार, समाज और आर्थिक व्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव डालती है। इसलिए इस अभियान के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया जा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है युवा संगोष्ठी?
युवा संगोष्ठी का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं बल्कि युवाओं को संवाद, विचार-विमर्श और सामाजिक नेतृत्व के लिए प्रेरित करना है।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ नशे के कारण होने वाले सामाजिक, मानसिक और आर्थिक दुष्परिणामों पर अपने विचार साझा करेंगे। साथ ही युवाओं को यह समझाया जाएगा कि वे अपने परिवार, मित्रों और समाज में जागरूकता फैलाकर नशामुक्त वातावरण बनाने में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
संगोष्ठी के दौरान युवाओं के सुझाव भी लिए जाएंगे ताकि भविष्य में जनजागरण अभियानों को और प्रभावी बनाया जा सके।
विशेषज्ञ बताएंगे नशे के दुष्परिणाम
संगोष्ठी में विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी देंगे। इनमें प्रमुख रूप से शामिल होंगे—
- नशे का शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव।
- मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव।
- परिवार और सामाजिक संबंधों पर नशे का असर।
- आर्थिक नुकसान और रोजगार पर प्रभाव।
- युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को रोकने के उपाय।
- समाज की सामूहिक जिम्मेदारी।
विशेषज्ञ यह भी बताएंगे कि समय रहते जागरूकता और सही मार्गदर्शन से नशे की लत से बचाव संभव है।
सोशल मीडिया बनेगा जागरूकता का प्रभावी माध्यम
अविराज सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया युवाओं तक संदेश पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है।
इसी को ध्यान में रखते हुए संगोष्ठी में इस बात पर भी चर्चा होगी कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व में ट्विटर), यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नशामुक्ति का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक कैसे पहुंचाया जा सकता है।
युवाओं को सकारात्मक डिजिटल अभियान चलाने और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
युवाओं की भूमिका पर रहेगा विशेष फोकस
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण विषय युवाओं की भूमिका होगी।
वक्ताओं का मानना है कि यदि युवा वर्ग नशे के खिलाफ जागरूक होकर समाज में सकारात्मक संदेश फैलाए, तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
संगोष्ठी में इस बात पर चर्चा होगी कि युवा अपने विद्यालय, महाविद्यालय, कार्यस्थल और सामाजिक संगठनों के माध्यम से नशे के खिलाफ अभियान चला सकते हैं।
इसके अलावा खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामाजिक अभियानों के माध्यम से सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए भी युवाओं को प्रेरित किया जाएगा।
सामाजिक संगठनों और शिक्षण संस्थानों की भागीदारी
युवा संगोष्ठी में विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, छात्र संगठनों और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है।
इन संस्थाओं की भागीदारी से अभियान को व्यापक स्तर पर समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
आयोजकों का मानना है कि यदि शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संगठन और युवा मंच मिलकर कार्य करें, तो नशामुक्ति अभियान को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
नशामुक्त समाज के निर्माण का साझा संकल्प
अभियान का उद्देश्य केवल लोगों को नशे के नुकसान बताना नहीं, बल्कि उन्हें स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है।
संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों से नशे से दूर रहने और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करने का संकल्प दिलाया जाएगा।
आयोजकों का कहना है कि जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभाएगा, तभी नशामुक्त समाज का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
अविराज सिंह ने युवाओं से की विशेष अपील
अविराज सिंह ने सागर जिले के सभी युवाओं, छात्र-छात्राओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और विभिन्न युवा संगठनों से अपील की है कि वे 19 जुलाई को आयोजित होने वाली युवा संगोष्ठी में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें।
उन्होंने कहा कि युवाओं की भागीदारी इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है। यदि युवा स्वयं जागरूक होंगे और दूसरों को भी जागरूक करेंगे, तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाना संभव होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक प्रतिभागी अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करने का संकल्प लेकर जाए।
जनभागीदारी से ही सफल होगा नशामुक्ति अभियान
विशेषज्ञों का मानना है कि नशे जैसी सामाजिक चुनौती से केवल कानून या सरकारी प्रयासों के माध्यम से पूरी तरह नहीं निपटा जा सकता। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
युवा संगोष्ठी जैसे कार्यक्रम लोगों को जागरूक करने, सकारात्मक संवाद स्थापित करने और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यदि युवाओं, शिक्षकों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो, तो नशामुक्त समाज का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।
निष्कर्ष
19 जुलाई को सागर में आयोजित होने वाली ‘नशे से दूरी है जरूरी’ युवा संगोष्ठी राज्य सरकार के नशामुक्त मध्य प्रदेश अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। इस कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने, सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देने और जनभागीदारी को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
आयोजकों को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में युवा इस संगोष्ठी में भाग लेकर नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए अपना योगदान देंगे और जागरूकता के इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
