संवाददाता : अभिषेक द्विवेदी कोतमा
Kotma के गोडारु घाट निर्माण पर उठे सवाल, 25 लाख रुपये के विकास कार्य में अनियमितताओं के आरोप
जनसुविधा के लिए स्वीकृत राशि, लेकिन निर्माण कार्य पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
Kotma : अनूपपुर जिले की कोतमा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत गोडारु में निर्माणाधीन घाट को लेकर विवाद सामने आया है। मुख्यमंत्री अधोसंरचना मद से जनसुविधा के उद्देश्य से स्वीकृत करीब 25 लाख रुपये की राशि से किए जा रहे इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस उद्देश्य से इस घाट का निर्माण कराया जा रहा है, वह तभी पूरा होगा जब कार्य निर्धारित मापदंडों और गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया जाए। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए लोगों ने निर्माण कार्य की जांच की मांग उठाई है।
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों की शिकायत
ग्रामीणों का आरोप है कि घाट निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। स्थानीय लोगों ने निर्माण में इस्तेमाल होने वाली रेत, सीमेंट और अन्य सामग्री को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण कार्य में उपयोग की गई रेत से संबंधित वैध दस्तावेज और परिवहन अनुमति (टीपी) की जानकारी मांगी गई, लेकिन मौके पर मौजूद जिम्मेदार लोगों की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और वैधता की जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
हालांकि, इस मामले में ठेकेदार या संबंधित विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
अधूरे निर्माण और दरारों को लेकर चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही संरचना में दरारें दिखाई देने लगी हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि निर्माण में तकनीकी मानकों की अनदेखी हुई है तो भविष्य में यह लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
ग्रामीणों के अनुसार, सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाए जा रहे ऐसे निर्माण कार्यों में मजबूती और गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसलिए प्रशासन को मौके का निरीक्षण कर तकनीकी जांच करानी चाहिए।

पंचायत और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विकास कार्यों की नियमित निगरानी और गुणवत्ता की जांच संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है।
लोगों का आरोप है कि यदि समय-समय पर निरीक्षण किया जाता तो निर्माण कार्य में सामने आ रही कथित कमियों को शुरुआत में ही दूर किया जा सकता था।
ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि स्वीकृत राशि का उपयोग नियमों के अनुसार किया गया है या नहीं।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप, जांच की मांग
इस पूरे मामले में ग्रामीणों ने राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के नाम का हवाला देकर निर्माण कार्य में मनमानी की जा रही है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति या ठेकेदार को नियमों से ऊपर नहीं होना चाहिए और यदि कोई अनियमितता हुई है तो निष्पक्ष जांच के बाद कार्रवाई की जानी चाहिए।
ठेकेदार की भूमिका पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्माण कार्य में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है और संबंधित एजेंसी को गुणवत्ता से जुड़े सभी मानकों का पालन करना चाहिए।
ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य में लापरवाही बरती गई है और निर्माण की स्थिति इसकी जांच की आवश्यकता को दर्शाती है।
वहीं, संबंधित ठेकेदार की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक स्तर पर भी अभी जांच या कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

ग्रामीणों ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग
गोडारु के ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच में यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों की मांग है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या विशेषज्ञों की टीम से कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
इसके अलावा लोगों ने यह भी मांग की है कि यदि सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों से राशि की वसूली की जाए।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल गोडारु घाट निर्माण मामला ग्रामीणों की शिकायतों के कारण चर्चा में बना हुआ है। अब सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि जनता के लिए स्वीकृत धनराशि का सही उपयोग होना चाहिए और किसी भी प्रकार की अनियमितता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।
